दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट 2026 का समापन एक ऐतिहासिक वैश्विक सहमति के साथ हुआ। इस शिखर सम्मेलन में 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट’ के घोषणापत्र पर साइन किया। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में सहयोग, समानता और भरोसे पर आधारित एक साझा वैश्विक विजन को आगे बढ़ाती है।
अमेरिका, चीन, ब्रिटेन, रूस, फ्रांस, जर्मनी, जापान, कनाडा जैसे प्रमुख देशों की भागीदारी ने इस सम्मेलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद महत्वपूर्ण बना दिया। केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे भारत की AI नीति और वैश्विक नेतृत्व की बड़ी सफलता बताया।
88 countries and international organisatons have signed the AI Impact Summit Declaration. Entire world has endorsed PM @narendramodi Ji’s human-centric vision of AI.
— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) February 21, 2026
The declaration is inspired by the principle of ‘Sarvajana Hitaya, Sarvajana Sukhaya’, for democratising AI… pic.twitter.com/dnnNTIMysl
मानव-केंद्रित AI और ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की भावना
इस सम्मेलन का मूल आधार भारतीय दर्शन के उस सिद्धांत पर रखा गया, जिसमें कहा गया है कि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचे। ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की भावना से प्रेरित यह घोषणा इस बात पर जोर देती है कि AI केवल आर्थिक लाभ तक सीमित न रहे, बल्कि सामाजिक भलाई, समान अवसर और मानव कल्याण का माध्यम बने।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मानव-केंद्रित AI की सोच को वैश्विक स्तर पर व्यापक समर्थन मिला। सभी देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि AI संसाधन, सेवाएँ और तकनीक समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचें और विकास का रास्ता समावेशी बने।
सात स्तंभों पर टिका वैश्विक AI सहयोग का ढाँचा
नई दिल्ली घोषणा को सात मुख्य स्तंभों पर आधारित किया गया है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक AI सहयोग की दिशा तय करेंगे। इनमें AI संसाधनों का लोकतंत्रीकरण, आर्थिक विकास के साथ सामाजिक भलाई, सुरक्षित और भरोसेमंद AI, विज्ञान के लिए AI का उपयोग, सामाजिक सशक्तिकरण के लिए तकनीक तक पहुँच, मानव पूँजी का विकास और लचीली व कुशल AI प्रणालियों का निर्माण शामिल है। इन स्तंभों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि AI का विकास संतुलित, जिम्मेदार और मानवता के हित में हो।
इस समिट में AI से जुड़े बुनियादी ढाँचे के लिए 250 अरब डॉलर से अधिक के निवेश को लेकर सहमति बनी, जो भविष्य में तकनीकी विकास और नवाचार को नई गति देगा। सम्मेलन में दुनिया भर से आए नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, उद्यमियों और स्टार्टअप्स ने भाग लिया।
करीब पाँच लाख लोगों की सहभागिता ने यह दिखाया कि भारत की AI पहल को घरेलू और वैश्विक स्तर पर जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। इस मंच से दीर्घकालिक अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को बढ़ावा मिला, जिससे AI को आर्थिक विकास का एक प्रमुख इंजन बनाने की दिशा में ठोस कदम बढ़े।
वैश्विक सहयोग से भविष्य की दिशा तय करता भारत
घोषणा में यह स्पष्ट किया गया कि AI का विकास केवल तेजी से तकनीकी प्रगति तक सीमित न रहे, बल्कि उसमें सुरक्षा, भरोसा और सामाजिक संतुलन भी केंद्र में हों। सुरक्षित और भरोसेमंद AI सिस्टम विकसित करने, ऊर्जा-कुशल ढाँचे को बढ़ावा देने और ओपन-सोर्स व सुलभ AI इकोसिस्टम बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया।
साथ ही AI आधारित शिक्षा, कौशल विकास और री-स्किलिंग कार्यक्रमों के जरिए मानव संसाधन को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करने पर भी सहमति बनी। AI इम्पैक्ट समिट 2026 ने भारत को वैश्विक AI विमर्श के केंद्र में स्थापित कर दिया है।
यह भी संदेश गया कि भारत न केवल तकनीकी नवाचार में अग्रणी बनना चाहता है, बल्कि वह AI को मानवता की भलाई, समान विकास और वैश्विक सहयोग का माध्यम भी बनाना चाहता है। 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की एकजुटता इस बात का प्रमाण है कि AI के भविष्य को लेकर दुनिया एक साझा, भरोसेमंद और समावेशी रास्ते पर आगे बढ़ने को तैयार है।


