आज के डिजिटल दौर में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है। बैंकिंग से लेकर शॉपिंग, OTP से लेकर पर्सनल बातचीत सब कुछ इसी एक डिवाइस पर निर्भर है।
लेकिन अब साइबर अपराधियों ने इस भरोसेमंद सिस्टम को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया है। कुछ समय पहले कनाडा में टोरन्टो पुलिस सर्विस ने एक ऐसे हाई-टेक साइबर फ्रॉड का खुलासा किया है, जिसने पूरी दुनिया के एक्सपर्ट्स को चौंका दिया है।
इस मामले में SMS ब्लास्टर नाम की तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जो एक नकली मोबाइल टावर की तरह काम करती है। आरोपित इस डिवाइस को कार में लेकर शहर में घूमते थे और जहाँ भी भीड़ होती, वहाँ यह फर्जी टावर एक्टिव कर देते थे।
जैसे ही आसपास के मोबाइल फोन इस नेटवर्क से जुड़ते है, लोगों को फर्जी SMS मिलने लगते है, जो दिखने में बिल्कुल असली लगते थे जैसे बैंक, सरकारी संस्था या किसी सर्विस प्रोवाइडर के नाम से।
इन मैसेज में दिए लिंक पर क्लिक करते ही यूजर्स का पर्सनल और बैंकिंग डेटा चोरी हो जाता था। पुलिस के मुताबिक, इस ऑपरेशन के दौरान 13 मिलियन से ज्यादा नेटवर्क डिसरप्शन हुए और हजारों लोग प्रभावित हुए।
यह सिर्फ एक देश का मामला नहीं, बल्कि एक ऐसा खतरा है जो तेजी से पूरी दुनिया में फैल रहा है और अब भारत जैसे देशों के लिए भी बड़ा अलार्म बन चुका है।
कनाडा में पहली बार सामने आया SMS ब्लास्टर केस
कनाडा में इस तरह का यह पहला मामला है, जिसने साइबर सिक्योरिटी सिस्टम की कमजोरियों को सामने ला दिया है। पुलिस ने इस पूरे ऑपरेशन को प्रोजेक्ट लाइट्हाउस नाम दिया। जाँच की शुरुआत नवंबर 2025 में हुई, जब अधिकारियों को डाउनटाउन टोरंटो में एक संदिग्ध डिवाइस के बारे में जानकारी मिली।
धीरे-धीरे जाँच आगे बढ़ी तो पता चला कि यह कोई साधारण डिवाइस नहीं, बल्कि एक मोबाइल SMS ब्लास्टर है, जिसे कार के अंदर छिपाकर चलाया जा रहा था। इससे आरोपित आसानी से लोकेशन बदलते हुए ज्यादा से ज्यादा लोगों को निशाना बना रहे थे।
Arrests Made in Project Lighthouse, First-of-its-Kind SMS Blaster Investigation in Canada
— Toronto Police (@TorontoPolice) April 23, 2026
News release: https://t.co/kDAgK2NTnx pic.twitter.com/1dO2K1DQDb
इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनकी उम्र 21 से 27 साल के बीच है। इन पर धोखाधड़ी, कंप्यूटर सिस्टम में हस्तक्षेप और लोगों की जान को खतरे में डालने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस का कहना है कि यह एक संगठित साइबर क्राइम था, जो लंबे समय से चल रहा था।
क्या है SMS ब्लास्टर और कैसे करता है काम
अगर आसान भाषा में समझें, तो SMS ब्लास्टर एक नकली मोबाइल टावर है। तकनीकी तौर पर इसे IMSI कैचर भी कहा जाता है। इसका काम असली टावर की तरह सिग्नल देना और आसपास के मोबाइल फोन को अपनी तरफ खींचना होता है।
हमारा फोन हमेशा उसी नेटवर्क से जुड़ता है, जहाँ सिग्नल सबसे ज्यादा मजबूत होता है। स्कैमर्स इसी बात का फायदा उठाते हैं। वे एक ऐसा डिवाइस तैयार करते हैं, जो असली टावर से भी ज्यादा स्ट्रॉन्ग सिग्नल देता है।

जैसे ही आपका फोन इस फर्जी टावर से कनेक्ट होता है, वह असली नेटवर्क से कट जाता है और स्कैमर के कंट्रोल में आ जाता है। इसके बाद आपके फोन पर सीधे SMS भेजे जाते हैं। ये मैसेज इतने असली लगते हैं कि यूजर को शक ही नहीं होता।
कैसे हजारों लोगों को बनाया जाता है शिकार
इस स्कैम की सबसे बड़ी ताकत इसका दायरा और तेजी है। यह कोई ऐसा फ्रॉड नहीं है जिसमें एक-एक करके लोगों को कॉल या मैसेज किया जाता है, जैसा हम हर दिन अपने आस-पास देखते है।
फर्जी फोन कॉल जिसमें कभी बैंक अकाउंट बंद होने के नाम पर OTP माँगा जाता है,काभी ATM कार्ड को अनब्लॉक करने के नाम पर OTP के बहाने पैसे ट्रैन्स्फर कर लिए जाते है, जैसा हुमने जामतारा सीरीज में देखा है।
लेकिन अगर बात SMS ब्लास्टर की करे तो यह एक साथ सैकड़ों-हजारों मोबाइल फोन को टारगेट कर सकता है। स्कैमर्स इसके लिए खासतौर पर भीड़भाड़ वाले इलाके चुनते हैं, जैसे मॉल, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, बाजार, धार्मिक स्थल या बड़े इवेंट। वजह साफ है जितनी ज्यादा भीड़, उतने ज्यादा फोन एक साथ उनके जाल में फंस सकते हैं।
ये लोग अपने SMS ब्लास्टर डिवाइस को कार, बैग या किसी बॉक्स में छिपाकर रखते हैं। जैसे ही डिवाइस ऑन होता है, यह आसपास के मोबाइल फोन को अपने नेटवर्क से जोड़ना शुरू कर देता है।
चूँकि फोन हमेशा सबसे मजबूत सिग्नल से जुड़ता है, इसलिए वह असली टावर छोड़कर इस फर्जी टावर से कनेक्ट हो जाता है। इसके बाद स्कैमर्स उन सभी यूजर्स को एक साथ फर्जी SMS भेजते हैं।
टोरंटो केस में सामने आया कि हजारों फोन इस नेटवर्क से जुड़े और 13 मिलियन से ज्यादा बार नेटवर्क को लेकर समस्या का सामना करना पड़ा। इसका मतलब यह है कि एक ही डिवाइस से लंबे समय तक लगातार बड़े पैमाने पर हमला किया जा सकता है। कई बार लोग समझ ही नहीं पाते कि उनके फोन के साथ क्या हो रहा है और अनजाने में वे फ्रॉड का शिकार बन जाते हैं।
2G नेटवर्क कैसे है सबसे बड़ी कमजोरी
इस पूरे फ्रॉड का असली खेल 2G नेटवर्क पर निर्भर करता है। आमतौर पर आजकल ज्यादातर लोग 4G या 5G नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं, जो ज्यादा सुरक्षित होते हैं और इनमें बेहतर एन्क्रिप्शन होता है।
लेकिन SMS ब्लास्टर एक ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करता है जिसे ‘साइलन्ट डाउन्ग्रैड 2G’ कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि आपका फोन बिना आपको बताए 4G/5G से हटकर 2G नेटवर्क पर शिफ्ट हो जाता है।
2G नेटवर्क में सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि इसमें सिक्योरिटी सिस्टम बहुत पुराना और कमजोर है। इसमें फोन और टावर के बीच मजबूत ऑथेंटिकेशन नहीं होता, जिससे स्कैमर्स आसानी से बीच में घुस सकते हैं। कई मामलों में एन्क्रिप्शन या तो बहुत कमजोर होता है या बिल्कुल नहीं होता, जिसे नल साइफर कहा जाता है।
जब आपका फोन इस 2G नेटवर्क पर आ जाता है, तो स्कैमर्स को आपके डिवाइस से कम्युनिकेशन कंट्रोल करने का मौका मिल जाता है। वे मैसेज भेज सकते हैं, डेटा इंटरसेप्ट कर सकते हैं और आपको पता भी नहीं चलता। यही वजह है कि भले ही आपके पास नया स्मार्टफोन हो लेकिन अगर वो 2G सपोर्ट करता है, तो आप इस फ्रॉड के दायरे में आ सकते हैं।
क्यों इतना खतरनाक है ये फ्रॉड
यह स्कैम बाकी साइबर फ्रॉड से इसलिए अलग और ज्यादा खतरनाक है, क्योंकि यह सीधे नेटवर्क लेवल पर काम करता है। आमतौर पर फ्रॉड में यूजर से कोई गलती करवाई जाती है, जैसे लिंक पर क्लिक करना, ऐप डाउनलोड करना या कॉल पर जानकारी देना। लेकिन यहाँ मामला उल्टा है। आपका फोन खुद ही फर्जी नेटवर्क से जुड़ जाता है और आपको पता भी नहीं चलता कि आप खतरे में हैं।
इस फ्रॉड में टेलीकॉम कंपनियाँ भी ज्यादा मदद नहीं कर पातीं, क्योंकि जो मैसेज भेजे जा रहे हैं, वे उनके नेटवर्क से होकर नहीं गुजरते। यानी न तो उन्हें ट्रैक किया जा सकता है और न ही आसानी से ब्लॉक किया जा सकता है।
इसके अलावा ये मैसेज देखने में बिल्कुल असली लगते हैं जैसे बैंक, सरकारी विभाग या किसी बड़ी कंपनी के नाम से। ऐसे में यूजर आसानी से भरोसा कर लेता है और लिंक पर क्लिक कर देता है।

इसके बाद उसका बैंकिंग डेटा, OTP, पासवर्ड या अन्य पर्सनल जानकारी चोरी हो सकती है। सबसे खतरनाक बात यह है कि ये सब चुपचाप होता है कि यूजर को काफी देर तक पता ही नहीं चलता कि उसके साथ फ्रॉड हो चुका है।
पब्लिक सेफ्टी के लिए भी है बड़ा खतरा
इस तकनीक का खतरा सिर्फ पैसों की ठगी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर समस्या बन सकता है। जब आपका फोन फर्जी टावर से जुड़ जाता है, तो वह असली मोबाइल नेटवर्क से कट जाता है। इसका सीधा असर यह होता है कि आप कॉल या इंटरनेट का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाते।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि इस दौरान इमरजेंसी सेवाएँ भी प्रभावित हो सकती हैं। अगर कोई व्यक्ति ऐसी स्थिति में फंस जाए जहाँ उसे तुरंत पुलिस, एंबुलेंस या फायर ब्रिगेड को कॉल करना हो, तो वह ऐसा नहीं कर पाएगा।
पुलिस के मुताबिक, नेटवर्क डिसरप्शन कुछ सेकंड से लेकर कई मिनट तक हो सकता है। अब सोचिए अगर किसी सड़क दुर्घटना, मेडिकल इमरजेंसी या किसी खतरे के समय आपका फोन नेटवर्क ही काम न करे, तो हालात कितने गंभीर हो सकते हैं। यही वजह है कि इसे सिर्फ साइबर फ्रॉड नहीं, बल्कि पब्लिक सेफ्टी का भी बड़ा खतरा माना जा रहा है।
स्कैमर्स के लिए क्यों फायदेमंद है यह तकनीक
SMS ब्लास्टर स्कैमर्स के लिए एक बेहद प्रभावी और फायदेमंद टूल बन चुका है। सबसे पहली बात, इसमें भेजे गए मैसेज लगभग 100% लोगों तक पहुँचते हैं। क्योंकि ये मैसेज सीधे फोन में जाते हैं, टेलीकॉम नेटवर्क इन्हें ब्लॉक नहीं कर पाता।
दूसरी बड़ी बात, इसकी लागत ज्यादा नहीं है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऐसे डिवाइस 5000 से 10000 डॉलर यानि (लगभग 4-8 लाख रुपए) में मिल जाते हैं।
तीसरी और सबसे खतरनाक बात यह है कि स्कैमर्स इसमें अपने हिसाब से मैसेज तैयार कर सकते हैं। वे ऐसे मैसेज बनाते हैं जो बिल्कुल असली लगते हैं, जैसे आपका बैंक अकाउंट बंद होने वाला है, KYC अपडेट करें या बिजली बिल बकाया है।
ऐसे मैसेज लोगों में डर और घबराहट का माहौल बनाते हैं, जिससे वे बिना सोचे-समझे लिंक पर क्लिक कर देते हैं। कम लागत, ज्यादा पहुँच और पकड़ में न आने की वजह से यह तकनीक साइबर अपराधियों के लिए एक परफेक्ट हथियार बनती जा रही है।
भारत में क्या है स्थिति और खतरा
भारत में यह खतरा और भी ज्यादा गंभीर हो सकता है, क्योंकि यहाँ कई ऐसे फैक्टर हैं जो इस तरह के स्कैम को आसान बना देते हैं। सबसे पहला कारण है 2G नेटवर्क की मौजूदगी। भले ही शहरों में 4G और 5G आ चुका है, लेकिन देश के कई हिस्सों में अभी भी 2G नेटवर्क चलता है, जो इस तरह के हमले के लिए सबसे कमजोर कड़ी है।
दूसरा बड़ा कारण है भारत की विशाल आबादी और मोबाइल यूजर्स की संख्या। करोड़ों लोग स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, जिससे स्कैमर्स को एक बड़ा टारगेट बेस मिल जाता है।
तीसरा कारण है डिजिटल पेमेंट का तेजी से बढ़ता चलन। UPI, नेट बैंकिंग और मोबाइल वॉलेट के कारण लोग सीधे अपने फोन से पैसे का लेन-देन करते हैं, जिससे फ्रॉड का खतरा और बढ़ जाता है।
ऐसे में टेलीकॉम रेग्यलटोरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया और साइबर एजेंसियों के सामने यह एक बड़ी चुनौती बन सकती है कि वे इस नई तकनीक से कैसे निपटें।
भारत में सामने आ चुके ऐसे मामले
भारत में भी इस तरह के साइबर फ्रॉड के मामले सामने आने लगे हैं, जो यह दिखाते हैं कि खतरा अब हमारे करीब पहुँच चुका है। हाल के महीनों में दिल्ली, नोएडा और चंडीगढ़ जैसे शहरों में एजेंसियों ने छापेमारी कर ऐसे नेटवर्क पकड़े हैं, जो बड़े पैमाने पर फर्जी SMS भेज रहे थे।
इसी तरह हैदराबाद के साइबराबाद इलाके में पुलिस ने एक बड़े गैंग का पर्दाफाश किया, जिसमें कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। ये लोग विदेशी नेटवर्क से जुड़े थे और लोगों को फर्जी बैंक मैसेज और ट्रेडिंग ऑफर भेजकर ठग रहे थे।
सरकारी आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को दिखाते हैं। 2024 से 2025 के बीच साइबर फ्रॉड के मामलों में करीब 300% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं 2025 में लोगों को करीब 30000 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि साइबर अपराध तेजी से बढ़ रहा है और SMS ब्लास्टर जैसी तकनीक इसे और खतरनाक बना सकती है।
कैसे पहचानें कि आप टारगेट हो सकते हैं
यह स्कैम काफी एडवांस है, फिर भी कुछ संकेत ऐसे होते हैं जिनसे आप सतर्क हो सकते हैं। सबसे पहला संकेत है आपके फोन का अचानक 4G या 5G से 2G नेटवर्क पर आ जाना। अगर ऐसा बिना किसी वजह के होता है, तो यह एक चेतावनी हो सकती है।
दूसरा संकेत है एक साथ कई संदिग्ध मैसेज आना। अगर आपको लगातार बैंक, बिजली, KYC या डिलीवरी से जुड़े मैसेज मिलने लगें, तो सावधान हो जाना चाहिए।
तीसरा संकेत है मैसेज की भाषा। अगर उसमें जल्दी करने का दबाव हो जैसे अभी क्लिक करें, तुरंत अपडेट करें या वरना अकाउंट बंद हो जाएगा तो यह स्कैम हो सकता है। इन संकेतों को पहचानकर आप खुद को समय रहते बचा सकते हैं।
कैसे रखें खुद को सुरक्षित
इस तरह के खतरे से बचने के लिए सबसे जरूरी है सतर्क रहना। सबसे पहले किसी भी अनजान या संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें, चाहे वह कितना भी असली क्यों न लगे। दूसरा कभी भी OTP, पासवर्ड या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ शेयर न करें। कोई भी असली बैंक या संस्था SMS के जरिए आपसे ऐसी जानकारी नहीं माँगती।
तीसरा अगर आपके फोन में ऑप्शन हो तो 2G नेटवर्क को बंद कर दें। इससे इस तरह के हमले का खतरा कम हो सकता है। इसके अलावा हमेशा किसी भी मैसेज की पुष्टि ऑफिशियल ऐप या वेबसाइट से करें। अगर शक हो, तो सीधे संबंधित कंपनी या बैंक से संपर्क करें।
SMS ब्लास्टर जैसी तकनीक यह साफ दिखाती है कि साइबर अपराध अब एक नए स्तर पर पहुँच चुका है। पहले जहाँ स्कैम सिर्फ कॉल या लिंक तक सीमित था, अब यह सीधे मोबाइल नेटवर्क को निशाना बना रहा है।


