Homeदेश-समाजप्रयागराज गोलीकांड में तीसरी मौत, उमेश पाल और संदीप निषाद के बाद गनर राघवेंद्र...

प्रयागराज गोलीकांड में तीसरी मौत, उमेश पाल और संदीप निषाद के बाद गनर राघवेंद्र भी नहीं रहे: तय हो गई थी शादी की तारीख़, पिता भी पुलिस में थे

हालाँकि, उनके शरीर से अत्यधिक खून बह चुका था। बम लगने के कारण उनके फेफड़े भी जख्मी हो गए थे। उनके शरीर में गंभीर संक्रमण फ़ैल रहा था।

प्रयागराज गोलीकांड में अब उमेश पाल और उनके गनर संदीप निषाद के बाद उनके एक अन्य गनर राघवेंद्र की भी मौत हो गई है। राजधानी लखनऊ स्थित PGI अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। प्रयागराज से ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बना कर उन्हें यहाँ लाया गया था। 5 मई को राघवेंद्र की शादी होने वाली है। बता दें कि ये घटना धूमनगंज में शुक्रवार (24 फरवरी, 2023) को हुई थी। उमेश पाल और संदीप निषाद की उसी दिन मौत हो गई थी।

राघवेंद्र को ICU में भर्ती कराया गया था, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। राघवेंद्र रायबरेली के लालगंज के रहने वाले थे, लेकिन उन्हें प्रयागराज में तैनाती मिली थी। उमेश पाल की जान बचाने के लिए वो हमलावरों और अतीक अहमद के गुर्गों के बीच आ गए थे। गुंडों ने उन्हें गोली मारी थी और साथ ही उन पर बम भी फेंके थे। बम से उनका कंधा उड़ गया था। प्रयागराज के SRN (स्वरूप रानी नेहरू) अस्पताल में उनके शरीर से गोलियाँ निकाल दी गई थीं।

हालाँकि, उनके शरीर से अत्यधिक खून बह चुका था। बम लगने के कारण उनके फेफड़े भी जख्मी हो गए थे। उनके शरीर में गंभीर संक्रमण फ़ैल रहा था। उनकी मौत शाम के पौने 6 बजे के करीब हुई। राघवेंद्र के पिता भी पुलिस में रहे हैं। राघवेंद्र की सगाई हो चुकी थी, ऐसे में घर वाले भी शादी की तैयारियों में जुटे हुए थे। यूपी पुलिस में भी इस घटना के बाद शोक की लहर है। इस तरह प्रयागराज गोलीकांड में मृतकों की संख्या अब 3 हो गई है।

उमेश पाल की हत्या के मामले में पुलिस ने अतीक अहमद के भाई, बेटों और बीवी समेत दर्जन भर गुर्गो के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। फिलहाल हत्या के इस मामले के ज्यादातर आरोपित फरार हैं। आरोपितों की तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। इधर प्रशासन ने खालिद जफर के घर को गिरा दिया। कहा जा रहा है कि हत्याकांड के बाद माफिया अतीक अहमद की बीवी शाइस्ता परवीन इसी घर में रुकी हुई थी।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -