Homeदेश-समाजआगरा की 'द केरल स्टोरी' में इब्राहिम, रहमान और हसन समेत 6 का गैंग...

आगरा की ‘द केरल स्टोरी’ में इब्राहिम, रहमान और हसन समेत 6 का गैंग पकड़ाया, हिन्दू बहनों का किया था धर्मांतरण: J&K, बंगाल, राजस्थान समेत 7 राज्यों में है नेटवर्क, पढ़े-लिखे युवा थे टारगेट

आगरा पुलिस ने सात राज्यों- पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, राजस्थान, यूपी, बिहार, दिल्ली-एनसीआर और जम्मू-कश्मीर में छापेमारी कर दोनों बहनों को बैरकपुर से बरामद किया। पुलिस ने शेखर रॉय उर्फ हसन अली और रीत बनिक उर्फ मोहम्मद इब्राहिम समेत 5 को पकड़ा है।

उत्तर प्रदेश के आगरा में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें दो सगी बहनों के अपहरण और धर्मांतरण की कहानी ने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। आगरा पुलिस ने इस मामले में तेजी दिखाते हुए सात राज्यों में छापेमारी की और कई आरोपितों को गिरफ्तार किया।

इस रैकेट की जड़ें इतनी गहरी हैं कि इसके तार विदेशी फंडिंग से भी जुड़े होने का शक है। यह मामला फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ की तर्ज पर सामने आया है, जिसमें लालच, लग्जरी लाइफ का वादा और ब्रेनवॉश का कॉकटेल इस्तेमाल कर युवाओं को धर्मांतरण के लिए फँसाया जाता है। आइए ये पूरा मामला समझते हैं।

क्या है पूरा मामला?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये घटना शुरू होती है आगरा के सदर थाना क्षेत्र से, जहाँ पंजाबी समाज की दो सगी बहनें रहती थीं। ये बहनें 24 मार्च 2025 को अचानक अपने घर से गायब हो गईं। परिवार वालों ने पहले तो खुद तलाश की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। 4 मई 2025 को सदर थाने में अपहरण की धारा में मुकदमा दर्ज हुआ। परिवार का आरोप था कि उनकी बेटियों को जम्मू-कश्मीर के ऊधमपुर की रहने वाली एक युवती सायमा उर्फ खुशबू ने बहला-फुसलाकर ले गई है।

पुलिस की जाँच में जो खुलासा हुआ, वो चौंकाने वाला था। ये कोई साधारण अपहरण का मामला नहीं था, बल्कि एक बड़े धर्मांतरण रैकेट का हिस्सा था। पुलिस को पता चला कि इन बहनों का ब्रेनवॉश कर उनका धर्म परिवर्तन कराया गया है और अब वो खुद इस रैकेट का हिस्सा बन चुकी हैं।

कैसे शुरू हुई कहानी?

यह कहानी 2021 से शुरू होती है। उस वक्त बड़ी बहन, जो आगरा के दयालबाग एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में पढ़ती थी, सायमा उर्फ खुशबू नाम की एक युवती के संपर्क में आई। सायमा ने धीरे-धीरे उसका ब्रेनवॉश शुरू किया। उसे लग्जरी लाइफ और बड़े-बड़े वादों का लालच दिया गया। नतीजा ये हुआ कि 2021 में बड़ी बहन सायमा के साथ चली गई। परिवार वालों ने पुलिस को सूचना दी और रास्ते में लैंडस्लाइड होने की वजह से पुलिस और परिवार वाले उसे वापस घर ले आए।

लेकिन घर आने के बाद भी बड़ी बहन की हरकतें बदल चुकी थीं। वो पूजा-पाठ का विरोध करने लगी और इस्लाम की पैरवी करने लगी। परिवार वालों के लिए ये किसी सदमे से कम नहीं था। धीरे-धीरे उसने अपनी छोटी बहन को भी अपने प्रभाव में ले लिया। बड़ी बहन ने छोटी बहन का भी ब्रेनवॉश किया और दोनों 24 मार्च 2025 को घर से गायब हो गईं।

पुलिस ने कैसे पकड़ा?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब परिवार ने पुलिस से गुहार लगाई, तो आगरा पुलिस ने फौरन हरकत में आते हुए सात टीमें बनाईं। इनमें साइबर सेल, सर्विलांस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की टीमें शामिल थीं। डीजीपी राजीव कृष्ण के निर्देश पर पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने इस मामले को गंभीरता से लिया।

पुलिस ने सर्विलांस और साइबर सेल की मदद से दोनों बहनों का सुराग तलाशा। उनकी लोकेशन पश्चिम बंगाल के बैरकपुर में मिली। पुलिस ने तुरंत वहाँ छापेमारी की और दोनों बहनों को सुरक्षित बरामद कर लिया। इसके साथ ही बैरकपुर से दो लोगों, शेखर रॉय उर्फ हसन अली और रीत बनिक उर्फ मोहम्मद इब्राहिम को गिरफ्तार किया गया। हसन अली बारासात कोर्ट में कर्मचारी है।

पुलिस यहीं नहीं रुकी। उसने सात राज्यों – पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली-एनसीआर और बिहार में एक साथ छापेमारी की। उत्तराखंड के ऋषिकेश से रहमान नाम के एक शख्स को पकड़ा गया। बरेली और राजस्थान से भी एक-एक आरोपित को गिरफ्तार किया गया। सभी आरोपितों को ट्रांजिट रिमांड पर आगरा लाया जा रहा है।

धर्मांतरण गैंग का हाईटेक तरीका

पुलिस की जाँच में पता चला कि ये धर्मांतरण गैंग कोई छोटा-मोटा गिरोह नहीं है। ये एक हाईटेक नेटवर्क है, जो 2015 से सक्रिय है। ये गैंग पहले पढ़े-लिखे युवक-युवतियों को टारगेट करता है। उन्हें लग्जरी लाइफ, पैसे और बड़े-बड़े वादों का लालच दिया जाता है। फिर सोशल मीडिया के जरिए हाईटेक तरीके से ब्रेनवॉश किया जाता है। जो लोग इनके जाल में फँस जाते हैं, उनका धर्म परिवर्तन कराया जाता है और फिर उन्हें गैंग का हिस्सा बना लिया जाता है।

ये गैंग इतना शातिर है कि धर्मांतरण के बाद लोग खुद इसके लिए काम करने लगते हैं। वे सोशल मीडिया पर इस्लाम के पक्ष में मुहिम चलाते हैं और नए लोगों को फंसाने का काम करते हैं। पुलिस को कुछ ऐसे सोशल मीडिया अकाउंट्स मिले हैं, जिनकी गतिविधियाँ संदिग्ध हैं और धर्मांतरण से जुड़ी हुई हैं।

विदेशी फंडिंग का शक

पुलिस की शुरुआती जाँच में ये भी खुलासा हुआ कि इस गैंग के तार विदेशों से जुड़े हो सकते हैं। ठीक वैसे ही, जैसे बलरामपुर के छांगुर पीर उर्फ जलालुद्दीन के मामले में विदेशी फंडिंग की बात सामने आई थी। छांगुर पीर का मामला इन दिनों चर्चा में है, जहाँ ईडी, एटीएस और एसटीएफ ने छापेमारी की थी। हालाँकि, आगरा पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने साफ किया कि इस मामले का छांगुर पीर से कोई सीधा कनेक्शन नहीं है। फिर भी विदेशी फंडिंग की जाँच चल रही है और जल्द ही बड़ा खुलासा होने की उम्मीद है।

क्या कह रहा है पीड़ित परिवार?

पीड़ित परिवार का कहना है कि उनकी बेटियों को सायमा उर्फ खुशबू ने अपने जाल में फँसाया। सायमा ने पहले बड़ी बेटी को ब्रेनवॉश किया और फिर उसने अपनी छोटी बहन को भी उसी रास्ते पर ले गई। परिवार का आरोप है कि सायमा उनकी बेटियों को शादी के बहाने ले गई। पिता ने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी सायमा के प्रभाव में आकर दूसरे मजहब की बात करने लगी थी। परिवार ने पुलिस से जल्द से जल्द कार्रवाई की गुहार लगाई थी।

‘द केरल स्टोरी’ जैसी है ये कहानी भी…

लोगों का कहना है कि ये मामला फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ से मिलता-जुलता है। इस फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे युवतियों को प्रलोभन और ब्रेनवॉश के जरिए धर्मांतरण के लिए फँसाया जाता है। ठीक उसी तरह इस मामले में भी सायमा ने पहले बड़ी बहन को अपने जाल में फँसाया और फिर उसने छोटी बहन को भी उसी रास्ते पर ले गई।

आगरा पुलिस इस मामले में और गहराई से जाँच कर रही है। पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने बताया कि बाकी आरोपितों की तलाश में छापेमारी जारी है। साइबर सेल सोशल मीडिया अकाउंट्स और आरोपियों के मूवमेंट की बारीकी से जाँच कर रही है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही इस रैकेट का और बड़ा खुलासा होगा।

ये मामला न सिर्फ आगरा बल्कि पूरे देश के लिए एक चेतावनी है। धर्मांतरण का ये हाईटेक रैकेट पढ़े-लिखे युवाओं को टारगेट कर रहा है। सोशल मीडिया के इस दौर में ऐसे गैंग आसानी से लोगों को अपने जाल में फँसा लेते हैं। परिवार वालों को अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखनी होगी और पुलिस को भी ऐसे मामलों में और तेजी से कार्रवाई करनी होगी। आगरा पुलिस की इस कार्रवाई से एक बात तो साफ है कि कानून का शिकंजा अब इन गैंगों पर कस रहा है। लेकिन सवाल ये है कि क्या ये रैकेट पूरी तरह खत्म हो पाएगा?

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श्रवण शुक्ल
श्रवण शुक्ल
I am Shravan Kumar Shukla, known as ePatrakaar, a multimedia journalist deeply passionate about digital media. I’ve been actively engaged in journalism, working across diverse platforms including agencies, news channels, and print publications. My understanding of social media strengthens my ability to thrive in the digital space. Above all, ground reporting is closest to my heart and remains my preferred way of working. explore ground reporting digital journalism trends more personal tone.

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