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कानून की पढ़ाई करती थी दलित लड़की, अमीरुल इस्लाम ने घर में घुस किया रेप फिर मार डाला: मौत की सजा पर हाई कोर्ट की मुहर, असम से मजदूरी करने आया था केरल

LLB की पढ़ाई कर रही 30 वर्षीय दलित छात्रा का उसके ही घर में रेप हुआ था। रेप के बाद पीड़िता की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 49 दिन बाद अमीरुल इस्लाम को गिरफ्तार किया गया था।

केरल हाई कोर्ट ने दलित छात्रा की रेप के बाद हत्या करने वाले अमीरुल इस्लाम को निचली अदालत द्वारा सुनाई गई मौत की सजा बरकरार रखी है। 28 अप्रैल 2016 की इस घटना में अमीरुल को लगभग 1 साल बाद जिला अदालत ने मृत्युदंड दिया था। अमीरुल ने इस सजा के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी। सोमवार (20 मई 2024) को उच्च न्यायालय ने अमीरुल की याचिका ख़ारिज कर दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामले की सुनवाई जस्टिस पी बी सुरेश कुमार और जस्टिस एस मानू की डिवीजन बेंच में हुई। बचाव पक्ष के वकील ने अमीरुल इस्लाम को बेगुनाह बताया और निचली अदालत से मिली सजा को निरस्त करने की अपील की। वहीं राज्य सरकार की तरफ से पेश अधिवक्ता ने अमीरुल की करतूत को ‘रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर’ बताते हुए निचली अदालत द्वारा दी गई मौत की सजा को बरकरार रखने की दलील दी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने अमीरुल की अपील ख़ारिज कर दी।

क्या है मामला?

यह मामला 28 अप्रैल 2016 का है। एर्नाकुलम जिले में कानून की पढ़ाई (LLB) कर रही एक 30 वर्षीय दलित छात्रा का उसके ही घर में रेप हुआ था। रेप के बाद पीड़िता की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। यह घटना कुरुप्पमपडी के पास पेरुम्बावूर की थी। पुलिस ने जाँच शुरू की तो असम से केरल में मजदूरी करने गए अमीरुल इस्लाम का नाम सामने आया। घटना के लगभग 49 दिनों के बाद अमीरुल इस्लाम को गिरफ्तार कर लिया गया। उस पर IPC की धारा 449, 342, 302, 376 और 376 (ए) के तहत कार्रवाई की गई थी।

पुलिस ने अमीरुल इस्लाम के खिलाफ 17 सितंबर 2016 को 1500 पेज की चार्जशीट दाखिल कर दी थी। अमीरुल की गिरफ्तारी फोन की लोकेशन, कॉल रिकार्डिंग व DNA जाँच के आधार पर की गई थी। अमीरुल ने छात्रा को अकेला देख कर घर में प्रवेश किया था। उसने छात्रा से रेप किया और भेद खुल जाने के डर से धारदार हथियार से उसे मार डाला था। छात्रा का बलात्कार और उसकी हत्या करने के बाद अमीरुल ने फ़ौरन ही केरल छोड़ दिया था।

अमीरुल इस्लाम को केरल पुलिस ने तमिलनाडु के कांचीपुरम से गिरफ्तार किया था। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगे 100 से अधिक पुलिसकर्मियों ने 1500 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की थी। एर्नाकुलम की जिला अदालत ने साल 2017 में इस केस में अमीरुल इस्लाम को मौत की सजा सुनाई थी। उस पर 25 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था। जज ने इस घटना को रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर करार दिया था। अमीरुल को अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग सजाएँ मिली हैं। ये सभी सजाएँ एक साथ चलेंगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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