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‘अयोध्या के भगवान रामलला नाबालिग हैं, उनकी संपत्ति को न तो बेचा और न ही छीना जा सकता है’

"अगर जमीन हमारी है और किसी और के द्वारा गैरकानूनी तौर पर कोई ढाँचा खड़ा कर लिया जाता है, तो जमीन उनकी नहीं होगी। यदि वहाँ पर मंदिर था, लोग पूजा भी कर रहे थे तो उन्हें और कुछ साबित करने की जरूरत नहीं है।"

रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का आज (अगस्त 21, 2019) नौवां दिन है। 6 अगस्त से सर्वोच्च अदालत इस मामले की रोजाना सुनवाई कर रही है, जिसके तहत हफ्ते में 5 दिन मामला सुना जा रहा है। रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने बुधवार (अगस्त 21, 2019) को अदालत में दलील देते हुए कहा कि अयोध्या के भगवान रामलला नाबालिग हैं। वैद्यनाथन ने कहा कि राम मंदिर में विराजमान रामलला नाबालिग हैं। नाबालिग की संपत्ति को ना तो बेचा जा सकता है और ना ही छीना जा सकता है।

रामलला के वकील ने अदालत के सामने अपनी दलील रखते हुए कहा कि अगर थोड़ी देर को ये मान भी लिया जाए कि वहाँ कोई मंदिर नहीं, कोई देवता नहीं थे, फिर भी लोगों का विश्वास है कि राम जन्मभूमि पर ही श्रीराम का जन्म हुआ था। ऐसे में वहाँ पर मूर्ति रखना उस स्थान को पवित्रता प्रदान करता है। वैद्यनाथन ने कहा, “अगर जमीन हमारी है और किसी और के द्वारा गैरकानूनी तौर पर कोई ढाँचा खड़ा कर लिया जाता है, तो जमीन उनकी नहीं होगी। यदि वहाँ पर मंदिर था, लोग पूजा भी कर रहे थे तो उन्हें और कुछ साबित करने की जरूरत नहीं है।”

उन्होंने कहा कि एक मंदिर हमेशा मंदिर ही रहता है, संपत्ति को ट्रांसफर नहीं किया जा सकता। मूर्ति किसी की संपत्ति नहीं है, मूर्ति ही देवता हैं। वैद्यनाथन ने कोर्ट से राम जन्मस्थान को लेकर हजारों साल से लगातार चली आ रही हिंदू आस्था को महत्व देने का निवेदन किया।

गौरतलब है कि, इससे पहले, मंगलवार (अगस्त 20, 2019) को रामलला के वकील ने अदालत में अपनी दलीलें रखते हुए  ASI की रिपोर्ट समेत कुछ साक्ष्य अदालत के सामने पेश किए थे। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की खुदाई में मिली चीजों का हवाला देते हुए दावा किया था कि मंदिर वहीं था, जहाँ मस्जिद बनाया गया। वैद्यनाथन ने कहा कि एएसआई की रिपोर्ट में मगरमच्छ और कछुए का जिक्र किया गया है, जो मुस्लिम संस्कृति का हिस्सा नहीं हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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