Tuesday, August 3, 2021
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एलोपैथी पर टिप्पणी मामले में दर्ज केसों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँचे बाबा रामदेव, FIR पर रोक लगाने की माँग

बाबा रामदेव ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर इन सभी मामलों पर रोक लगाने और उन्हें एक साथ जोड़कर दिल्ली ट्रांसफर करने की माँग की है। इसमें उन्होंने उनके खिलाफ पटना और रायपुर में दर्ज एफआईआर पर रोक लगाने की माँग की है।

योग गुरु बाबा रामदेव एलोपैथी पर टिप्पणी के बाद उनके खिलाफ देशभर में दर्ज कराए गए एफआईआर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुँच गए हैं। उन्होंने शीर्ष अदालत में याचिका दायर कर इन सभी मामलों पर रोक लगाने और उन्हें एक साथ जोड़कर दिल्ली ट्रांसफर करने की माँग की है। इसमें उन्होंने उनके खिलाफ पटना और रायपुर में दर्ज एफआईआर पर रोक लगाने की माँग की है।

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान पिछले महीने (मई 2021) में उन्होंने कोरोना के इलाज में एलोपैथी दवाओं के असर पर सवाल कर दिया था। इसके बाद इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने उनके बयान का कड़ा विरोध करते हुए उनसे माफी माँगने की माँग की थी।

दरअसल, एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें बाबा रामदेव को यह कहते हुए सुना गया था, “एलोपैथिक दवाओं के कारण लाखों लोग मारे गए हैं, जो इलाज या ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण मारे गए हैं।” इतना ही नहीं उन्होंने एलोपैथी को बकवास करार दिया था।

केंद्रीय मंत्री ने लिखा था पत्र

उनके इस वीडियो के विरोध में आईएमए की विभिन्न इकाइयों ने कई शिकायतें दर्ज कराई थी। विरोध बढ़ने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने बाबा रामदेव को पत्र लिखकर कहा था कि उनके शब्दों से न केवल कोरोना वॉरियर्स का अपमान हुआ है, लोगों के दिल को भी इससे ठेस पहुँची है।

उन्होंने लिखा, “आपके शब्दों ने कोरोना योद्धाओं को आहत और अपमान किया है, जो इस महामारी के खिलाफ लड़ाई में सबसे आगे रहे हैं और दूसरों की जिंदगियों को बचाने के लिए खुद को खतरे में डाल रहे हैं। ऐसे समय आपने जो कहा वो बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि आधुनिक दवाओं ने कईयों की जानें बचाई है।”

उन्होंने आगे लिखा, “कोरोना को मात देकर हजारों लोग अपने घरों को जा रहे है। अगर देश की मृत्यु दर 1.13 प्रतिशत है और रिकवरी रेट 88 फीसदी से भी ज्यादा है तो इसका श्रेय एलोपैथी और उसके डॉक्टरों को जाता है। मुझे उम्मीद है कि आप अपने आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बयान को वापस लेंगे।”

केंद्रीय मंत्री डॉ हर्षवर्धन सिंह के पत्र के बाद बाबा रामदेव ने शर्तों के साथ माफी माँगते हुए कहा था कि उनके बयान को गलत तरीके से लिया गया है। उन्होंने कहा कि वो उन्हें कोट किए गए व्हाट्सएप मैसेज को पढ़ रहे थे। फिर भी अगर किसी को इससे दुख हुआ तो माफी चाहते हैं।

इसके साथ ही बाबा रामदेव ने ये भी कहा कि अगर कोई इलाज के किसी तरीके की गलती को उजागर करता है तो उसे हमला समझने के बजाय एक रचनात्मक आलोचना समझना चाहिए।

आईएमए ने बाबा रामदेव को भेजा था 1000 करोड़ का नोटिस

एलोपैथी को लेकर जारी विवाद के बीच इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने 26 मई 2021 को बाबा रामदेव को 1000 करोड़ रुपए की मानहानि का नोटिस भेजा था। नोटिस में उनसे अपने बयान का खंडन कर लिखित और वीडियो के जरिए माफी की माँग की गई थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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