Homeदेश-समाजबिहार में महादलित बच्चियों को अगवा कर गैंगरेप: सरफराज और साथियों को पंचायत ने...

बिहार में महादलित बच्चियों को अगवा कर गैंगरेप: सरफराज और साथियों को पंचायत ने जुर्माना लगा छोड़ा, थाना प्रभारी रहमान अंसारी ने भी नहीं सुनी

बच्चियों के अगवा होने के बाद परिवार ने इसकी सूचना पुलिस को दी। सरफराज, शमशाद और हिराज को नामजद भी किया। लेकिन थाना प्रभारी रहमान अंसारी कथित तौर पर शुरुआत में ऐसा आवेदन मिलने से इनकार करते रहे।

महादलित टोले की दो नाबालिग लड़कियों को अगवा किया गया। उनसे गैंगरेप हुआ। मामले को रफा-दफा करने के लिए पंचायत भी बैठ गई। 63 हजार रुपए का जुर्माना लगा आरोपितों को बरी कर दिया गया। थानाध्यक्ष रहमान अंसारी पीड़ितों के दावे के विपरीत आवेदन मिलने से इनकार करता रहा। आखिरकार जब मामला मीडिया में आ गया और सामाजिक संगठनों के लोग पीड़ित परिवार के साथ खड़े हुए तो पुलिस ने मामला दर्ज किया। यह सब कुछ हुआ है बि​हार में। घटना सहरसा के बसनही थाना क्षेत्र के महुआ उत्तरबाड़ी पंचायत की है। आरोपितों के नाम हैं: मोहम्मद सरफराज, मोहम्मद हिराज, मोहम्मद शमशाद और राजा।

अगवा कर गैंगरेप

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार पीड़िताओं की उम्र 15 साल और आठ साल है। दोनों शुक्रवार शाम (25 फरवरी 2022) को घर से शौच के लिए निकलीं, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों ने पूरी रात खोजा, लेकिन कोई खबर नहीं मिली। बसनही थाना को आवेदन देकर बच्चियों के अगवा होने की जानकारी दी। आवेदन में सरफराज, शमशाद और हिराज को नामजद किया गया था। रिपोर्ट की माने तो बसनही के थानाध्यक्ष रहमान अंसारी ऐसा कोई आवेदन मिलने से शुरुआत में इनकार करते रहे।

दोनों बच्चियाँ शनिवार दोपहर मधेपुरा जिला के खाड़ा गाँव में मिलीं। उन्हें घर वापस लाया गया। उन्होंने बताया कि अगवा कर पूरी रात गाँव के चार लड़कों ने उनके साथ दुष्कर्म किया और फिर सुबह खाड़ा में छोड़कर चले गए। इसके बाद मामले को दबाने का सिलसिला शुरू हो गया। ग्रामीणों की पंचायत बैठी जिसमें भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार मुखिया, सरपंच भी मौजूद थे। आरोपितों पर 63 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस पर किसी भी तरह की सक्रियता नहीं दिखाने का आरोप लग रहा है।

इस संबंध में ऑपइंडिया ने थाना प्रभारी अंसारी से मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया। सहरसा जिला प्रशासन की वेबसाइट पर जो नंबर उपलब्ध है, वह यहाँ पूर्व में तैनात रहे पवन पासवान ने उठाया। उन्होंने बताया कि उनका तबादला हो चुका है। साइट पर नया नंबर अपडेट नहीं किया गया है। जब दूसरे नंबर पर हमने रहमान से संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। उनका पक्ष जानने के बाद हम इस खबर को अपडेट करेंगे। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार सामजिक संगठनों के दबाव के बाद मंगलवार 1 मार्च 2022 को आखिरकार इस मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -