Thursday, May 6, 2021
Home देश-समाज अब नाबालिग बहन से रेप की सजा बॉम्बे हाईकोर्ट ने की रद्द, कहा- POCSO...

अब नाबालिग बहन से रेप की सजा बॉम्बे हाईकोर्ट ने की रद्द, कहा- POCSO कानून में नाबालिगों में सहमति से सेक्स अपरिभाषित

"मैं इस तथ्य से भी अवगत हूँ कि नाबालिगों के बीच सहमति से यौन संबंध एक कानूनी अस्पष्ट क्षेत्र रहा है, क्योंकि नाबालिग द्वारा दी गई सहमति को कानून की दृष्टि में एक वैध सहमति नहीं माना जाता है।"

बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने उस 19 वर्षीय लड़के को सुनाई जाने वाली दस साल के कठोर कारावास की सजा को रद्द कर दिया है, जिस पर अपनी चचेरी बहन के साथ रेप का आरोप था। इसके लिए बॉम्बे हाईकोर्ट का तर्क यह है कि नाबालिग की सहमति (Minor consent) पर कानूनी नजरिया साफ नहीं है। दरअसल, 19 साल के लड़के को अपने साथ रहने वाली नाबालिग चचेरी बहन के साथ दुष्कर्म के मामले में दोषी पाया गया था।

जानकारी के मुताबिक लड़की की उम्र 15 साल है और वह आठवीं कक्षा में पढ़ती है। लड़की दो सालों से अपने चाचा के घर पर रह रही थी। सितंबर 2017 में लड़की ने अपनी एक दोस्त को बताया कि उसके चचेरे भाई ने उसको गलत तरीके से हाथ लगाया था, जिसके बाद से उसके पेट में दर्द रहने लगा है। उसकी दोस्त ने उसकी यह बात अपनी क्लास टीचर को बताई।

पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने दिए ये बयान

जब टीचर ने पीड़ित लड़की से इस बारे में पूछा तो लड़की ने टीचर को अपने साथ हुए यौन शोषण की जानकारी दी और बताया कि उसका चचेरा भाई उसके साथ क्या करता है। तीन मार्च 2018 को उस लड़के के खिलाफ FIR दर्ज की गई। लेकिन जब FIR के बाद बच्ची का मेडिकल चेकअप किया गया, तो कोई बाहरी चोट नहीं पाई गई।

पीड़िता ने कोर्ट को बताया कि साल 2017 के सितंबर, अक्तूबर और फिर 2018 की फरवरी में उसके चचेरे भाई ने उसके साथ यौन शोषण किया। दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने पीड़ित बच्ची का बयान दर्ज किया गया। बयान में पीड़िता ने यह भी बताया कि यह सहमति से किया गया कार्य था और केवल एक बार नहीं, बल्कि चार-पाँच बार। लड़की ने मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज किए गए बयान में कहा कि उसने जो बयान पुलिस के सामने दिए थे, वे टीचर के आग्रह पर दिए गए थे।

कोर्ट ने नाबालिगों की सहमति पर दिया यह तर्क

निचली अदालत की तरफ से लड़के को दोषी ठहराए जाने के बाद लड़के ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की और जमानत की माँग की। तथ्यों को देखने के बाद न्यायमूर्ति शिंदे ने कहा कि हालाँकि कानून में नाबालिगों की सहमति को वैध नहीं माना गया है, लेकिन नाबालिगों के बीच सहमति से बनाए गए यौन संबंधों पर कोई कानूनी स्पष्टता नहीं है या कानूनी नजरिया साफ नहीं है।

न्यायमूर्ति शिंदे ने कहा, “मैं इस तथ्य से भी अवगत हूँ कि नाबालिगों के बीच सहमति से यौन संबंध एक कानूनी अस्पष्ट क्षेत्र रहा है, क्योंकि नाबालिग द्वारा दी गई सहमति को कानून की दृष्टि में एक वैध सहमति नहीं माना जाता है।” न्यायालय ने कहा कि इस तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है कि पीड़िता ने अपना बयान पलटा था और यहाँ तक ​​कि उसकी माँ अभियोजन पक्ष से भी नहीं मिली थी। 

बेंच ने आगे कहा कि ट्रायल के दौरान भी आरोपित को जमानत दी गई थी और उसने इसका दुरुपयोग नहीं किया था। इन सभी मुद्दों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने आरोपित की सजा को रद्द कर दिया है और लड़के को जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया है। बॉम्बे हाई कोर्ट तय समय में लड़के की अपील पर सुनवाई करेगा।

गौरतलब है कि बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने 19 जनवरी को अपने एक फैसले में कहा था कि ‘स्किन टू स्किन’ स्पर्श हुए बिना या कपड़ों के ऊपर से नाबालिग पीड़िता को ‘स्पर्श करना’ पॉक्सो कानून (POCSO Act) या यौन अपराधों पर बाल संरक्षण कानून के तहत यौन हमला नहीं माना जा सकता। हालाँकि चीफ जस्टिस एस ए बोबडे की अगुवाई वाली देश की शीर्ष कोर्ट ने इस फैसले पर 27 जनवरी को रोक लगा दी थी।

इसके बाद एक और मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच की एकल पीठ ने यह फैसला दिया कि किसी लड़की का हाथ पकड़ना और आरोपित का पैंट की जिप खोलना प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज ऐक्ट, 2012 (POCSO) के तहत यौन हमले की श्रेणी में नहीं आता। 

बुधवार (जनवरी 29, 2021) को बॉम्बे हाई कोर्ट का एक और फैसला सामने आया। ये भी रेप से जुड़ा मामला था। इस मामले में भी निचली अदालत ने 26 साल के आरोपित को रेप का दोषी पाया था, लेकिन जस्टिस पुष्पा ने उसे बरी कर दिया। जस्टिस पुष्पा ने तर्क दिया, “बिना हाथापाई किए युवती का मुँह दबाना, कपड़े उतारना और फिर रेप करना एक अकेले आदमी के लिए बेहद असंभव लगता है।” 

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

असम में भाजपा के 8 मुस्लिम उम्मीदवारों में सभी की हार: पार्टी ने अल्पसंख्यक मोर्चे की तीनों इकाइयों को किया भंग

भाजपा से सेक्युलर दलों की वर्षों पुरानी शिकायत रही है कि पार्टी मुस्लिम सदस्यों को टिकट नहीं देती पर जब उसके पंजीकृत अल्पसंख्यक सदस्य ही उसे वोट न करें तो पार्टी क्या करेगी?

शोभा मंडल के परिजनों से मिले नड्डा, कहा- ‘ममता को नहीं करने देंगे बंगाल को रक्तरंजित, गुंडागर्दी को करेंगे खत्म’

नड्डा ने कहा, ''शोभा मंडल के बेटों, बहू, बेटी और बच्चों को (टीएमसी के गुंडों ने) मारा और इस तरह की घटनाएँ निंदनीय है। उन्होंने कहा कि बीजेपी और उसके करोड़ों कार्यकर्ता शोभा जी के परिवार के साथ खड़े हैं।

‘द वायर’ हो या ‘स्क्रॉल’, बंगाल में TMC की हिंसा पर ममता की निंदा की जगह इसे जायज ठहराने में व्यस्त है लिबरल मीडिया

'द वायर' ने बंगाल में हो रही हिंसा की न तो निंदा की है और न ही उसे गलत बताया है। इसका सारा जोर भाजपा द्वारा इसे सांप्रदायिक बताए जाने के आरोपों पर है।

TMC के हिंसा से पीड़ित असम पहुँचे सैकड़ों BJP कार्यकर्ताओं को हेमंत बिस्वा सरमा ने दो शिविरों में रखा, दी सभी आवश्यक सुविधाएँ

हेमंत बिस्वा सरमा ने ट्वीट करके जानकारी दी कि पश्चिम बंगाल में हिंसा के भय के कारण जारी पलायन के बीच असम पहुँचे सभी लोगों को धुबरी में दो राहत शिविरों में रखा गया है और उन्हें आवश्यक सुविधाएँ मुहैया कराई जा रही हैं।

5 राज्य, 111 मुस्लिम MLA: बंगाल में TMC के 42 मुस्लिम उम्मीदवारों में से 41 जीते, केरल-असम में भी बोलबाला

तृणमूल कॉन्ग्रेस ने 42 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया था, जिसमें से मात्र एक की ही हार हुई है। साथ ही ISF को भी 1 सीट मिली।

हिंसा की गर्मी में चुप्पी की चादर ही पत्रकारों के लिए है एयर कूलर

ऐसी चुप्पी के परिणाम स्वरूप आइडिया ऑफ इंडिया की रक्षा तय है। यह इकोसिस्टम कल्याण की भी बात है। चुप्पी के एवज में किसी कमिटी या...

प्रचलित ख़बरें

बंगाल में हिंसा के जिम्मेदारों पर कंगना रनौत ने माँगा एक्शन तो ट्विटर ने अकाउंट किया सस्पेंड

“मैं गलत थी, वह रावण नहीं है... वह तो खून की प्यासी राक्षसी ताड़का है। जिन लोगों ने उसके लिए वोट किया खून से उनके हाथ भी सने हैं।”

BJP की 2 पोल एजेंट से गैंगरेप की खबरों को बंगाल पुलिस ने नकारा

बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्याओं के बाद अब पार्टी की दो पोल एजेंट से गैंगरेप की खबर आ रही है। कई अन्य जगहों पर भी हिंसा की खबर है।

NDTV पत्रकार ने ABVP पर टीएमसी गुंडों के हमले को किया जस्टिफाई, गुल पनाग के पिता को ‘जश्न’ पर लगी लताड़

खबर थी एबीवीपी के ऑफिस पर टीएमसी के गुंडों ने हमला किया। भगवान हनुमान और माँ काली की मूर्ति क्षतिग्रस्त कर दी। NDTV पत्रकार ने लिखा- जैसी करनी, वैसी भरनी।

‘कपड़े उतारो, देखूँगा बॉडी रोल के लिए सही है या नहीं’ – कास्टिंग काउच पर ईशा अग्रवाल का खुलासा

ईशा अग्रवाल ने कास्टिंग काउच का खुलासा किया। ईशा अग्रवाल ने बताया, “मेरा सफर आसान नहीं रहा। मुझे इसमें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा।"

वैज्ञानिक गोबर्धन दास परिवार सहित ‘नजरबंद’, घर को घेर TMC के गुंडों ने फेंके बम: गृह मंत्रालय भेज रहा CRPF

JNU में मॉलिक्यूलर मेडिसिन के प्रोफेसर गोबर्धन दास बंगाल विधानसभा चुनावों में बीजेपी के उम्मीदवार थे। उनके गाँव में कई भाजपा कार्यकर्ताओं के घरों को निशाना बनाया गया है।

जय भीम-जय मीम: न जोगेंद्रनाथ मंडल से सीखा, न मरीचझापी में नामशूद्रों के नरसंहार से

जोगेंद्रनाथ मंडल के साथ जो कुछ हुआ वह बताता है कि 'जय भीम-जय मीम' दलितों के छले जाने का ही नारा है। मजहबी उन्मादी उनकी आड़ लेते हैं। कॉन्ग्रेसी और वामपंथी उनकी लाशों पर चढ़ 'मीम' का तुष्टिकरण करते हैं। #CAA के नाम पर जो हो रहा है वह इससे अलग नहीं।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,363FansLike
89,288FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe