Homeदेश-समाजकश्मीर के पुलवामा में पलटी गैर-स्थानीयों से भरी बस, 4 बिहारी मजदूरों की मौत,...

कश्मीर के पुलवामा में पलटी गैर-स्थानीयों से भरी बस, 4 बिहारी मजदूरों की मौत, 28 घायल: पुलिस ने जाँच शुरू की

मृतकों की पहचान नसरुद्दीन अंसारी पुत्र इस्लाम अंसारी खैरावा टोला पकड़ी पश्चिमी चंपारण और राज करण दास पुत्र शिवू सिंघारी गोबिंदपुर किशनगंज, सलीम अली पुत्र मोहम्मद अलाउद्दीन निवासी कटिहार और कैशर आलम पुत्र शेओ मजाकुरुल निवासी कटिहार के रूप में हुई है।

जम्मू-कश्मीर के अवंतीपोरा में राष्ट्रीय राजमार्ग पर शनिवार (18 मार्च 2023) की सुबह हुई एक बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इसमें चार लोगों की मौत हो गई और कई अन्य 28 लोग घायल हो गए। इस बस में बाहरी राज्यों के मजूदर सवार थे।

हादसे में मारे गए पीड़ितों की पहचान नसरुद्दीन अंसारी, राज करण दास, सलीम अली और कैसर आलम के रूप में हुई है। ये लोग बिहार के रहने वाले थे। वहीं, सभी घायल यात्रियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ कुछ मजदूरों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

यह दुर्घटना सुबह करीब 7:30 बजे हुई। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि तेज रफ्तार से जा रही यह बस एक डिवाइडर से टकरा गई और अपना नियंत्रण खो बैठी। दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के बारसू इलाके में नेशनल हाईवे-44 पर झेलम ब्रिज के पास राज्य सड़क परिवहन निगम की यह बस पलट गई।

हादसे में कुल 28 यात्री घायल बताए जा रहे हैं। इनमें से 23 का अस्पताल में इलाज चल रहा है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ की हालत बेहद गंभीर है। वहीं, पुलिस ने मामले का संज्ञान लेते हुए जाँच शुरू कर दी है।

मृतकों की पहचान नसरुद्दीन अंसारी पुत्र इस्लाम अंसारी खैरावा टोला पकड़ी पश्चिमी चंपारण और राज करण दास पुत्र शिवू सिंघारी गोबिंदपुर किशनगंज, सलीम अली पुत्र मोहम्मद अलाउद्दीन निवासी कटिहार और कैशर आलम पुत्र शेओ मजाकुरुल निवासी कटिहार के रूप में हुई है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -