Homeदेश-समाजकाली मंदिर में मांस के टुकड़े मिलने से तनाव, असम पुलिस ने किया 5...

काली मंदिर में मांस के टुकड़े मिलने से तनाव, असम पुलिस ने किया 5 लोगों को गिरफ्तार

ASP रोसीरानी सरमा ने बताया कि घटना को अंजाम देने वाले आरोपितों की तलाश करने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया और एक दिन बाद ही यानी शनिवार को इस मामले में संलिप्त 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।

असम के धुबरी जिले में शनिवार (5 जून 2021) को मंदिर के अंदर कथित रूप से मांस के टुकड़े रखने के आरोप में 5 लोगों को गिरफ्तार किया गया। एक पुलिस अधिकारी ने यह जानकारी दी है।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) रोसीरानी सरमा ने बताया कि गोलाकगंज थाना क्षेत्र के जिंकाता भाग-2 गाँव में शुक्रवार को काली मंदिर में मांस के टुकड़े मिलने के बाद तनाव पैदा हो गया। स्थानीय लोग दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की माँग को लेकर सड़कों पर उतर आए। एएसपी ने कहा कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तत्काल पुलिस बल को मौके पर भेजा गया।

सरमा ने बताया कि घटना को अंजाम देने वाले आरोपितों की तलाश करने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया गया और एक दिन बाद ही यानी शनिवार को इस मामले में संलिप्त 5 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।

उन्होंने आगे कहा कि इलाके में कोई अप्रिय घटना न हो इसके लिए कड़ी निगरानी की जा रही है। मंदिर से प्राप्त मांस के टुकड़ों को जाँच के लिए राज्य की फोरेंसिक लैब में भेजा गया है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -