Sunday, May 29, 2022
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‘द वायर’ के प्रोपेगेंडा पर अदालत का हथौड़ा: 14 आर्टिकल्स हटाने का आदेश, कोवैक्सीन के खिलाफ फैला रहा था झूठ

भारत बायोटेक ने पिछले महीने कोवैक्सीन के विरुद्ध अफवाह उड़ाने वाले कई मीडिया संस्थानों का फैक्ट चेक किया था। इसमें द वायर भी शामिल था। कम्पनी ने द वायर की खबर का दिसंबर महीने में ही खंडन किया था।

तेलंगाना (Telangana) की एक अदालत ने वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ को अपने 14 आर्टिकल्स 48 घंटे में हटाने के आदेश दिए हैं। ये सभी आर्टिकल्स भारत की दवा कम्पनी भारत बायोटेक और उसके द्वारा बनाई गई कोविड-19 की वैक्सीन कोवक्सीन के विरुद्ध भ्रामक प्रचार से संबंधित थे। यह आदेश भारत बायोटेक द्वारा द वायर और उससे जुड़े 12 लोगों के विरुद्ध दायर 100 करोड़ रुपए की मानहानि के मुकदमे की सुनवाई के दौरान दिया गया।

बार और बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने द वायर, उसके एडिटर सिद्धार्थ वरदराजन और मुकदमे में शामिल अन्य लोगों को भारत बायोटेक से जुड़ी मानहानि करने वाली कोई भी आर्टिकल प्रकाशित करने से मना किया है। भारत बायोटेक ने अदालत में द वायर पर अपने खिलाफ झूठे आर्टिकल्स छापने का आरोप लगाया था। भारत बायोटेक की तरफ से सीनियर वकील विवेक रेड्डी ने बहस की। उनके मुताबिक, द वायर के लेख तथ्यहीन और भ्रामक हैं, जिससे कम्पनी की छवि को नुकसान पहुँचा है।

कोर्ट में भारत बायोटेक के वकील के कहा कि भारत बायोटेक ने पहले भी टीबी, चिकुनगुनिया, जीका जैसी कई बीमारियों की दवाएँ बनाई हैं, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनुमोदित हुआ है। अब भारत सरकार के शीर्ष संस्थानों के साथ मिलकर कोविड-19 वैक्सीन बनाई गई है। द वायर ने कम्पनी पर आरोप लगाती हुई आर्टिकल्स की एक पूरी सीरीज प्रकाशित की है। इसमें तथ्यों को जाँच किए बिना कोवैक्सीन की प्रमाणिकता और एप्रूवल पर सवाल उठाए गए।

इस केस में शामिल नाम

साभार – बार एंड बेंच

बहस के दौरान कोर्ट ने यह भी नोट किया कि भारत सरकार द्वारा एप्रूवल मिलने के बाद भी द वायर कोवैक्सीन के खिलाफ लेख लिखता रहा। अदालत ने कहा कि सिर्फ कोवैक्सीन ही 15 से 18 साल के किशोरों के लिए एप्रूव है, लेकिन पोर्टल द्वारा भ्रामक खबरें लिखते रहने के चलते इस वैक्सीन पर संदेह पैदा हो सकता था। इसके बाद अदालत ने आदेश देते हुए द वायर को 48 घंटों के भीतर 14 आर्टिकल्स को हटाने के लिए कहा।

इस फैसले पर द वायर के एडिटर सिद्धार्थ वरदराजन ने कहा, “आंध्र प्रदेश की एक स्थानीय अदालत ने उन्हें बिना किसी नोटिस के 14 आर्टिकल्स को हटाने के आदेश दिए हैं। भारत बायोटेक ने लेखों में बदलाव करने या खंडन करने के कुछ भी नहीं दिया है।”

जब भारत बायोटेक और सीरम इंस्टिट्यूट जैसी भारतीय दवा कम्पनियाँ कोविड-19 की वैक्सीन बनाने में सफल रहीं तब से वामपंथी समूह उन्हें बदनाम करने में लगा हुआ है। वो अमेरिकी दवा कम्पनी फाइजर (Pfizer) द्वारा बनाई गई वैक्सीन को बेहतर साबित करना चाह रहे हैं। इसलिए वो अफवाह उड़ा कर भारतीय वैक्सीन के विरुद्ध भ्रामक लेख छाप रहे हैं। भारत बायोटेक ने पिछले महीने कोवैक्सीन के विरुद्ध अफवाह उड़ाने वाले कई मीडिया संस्थानों का फैक्ट चेक किया था। इसमें द वायर भी शामिल था। कम्पनी ने द वायर की खबर का दिसंबर महीने में ही खंडन किया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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