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श्रीलंका में 120+ मौतों के बाद भारत की ओर बढ़ा ‘दितवाह’, रेड अलर्ट जारी: सरकार ने लॉन्च किया ‘ऑपरेशन सागर बंधु’, जानें भारत के लिए कितना बड़ा खतरा है यह चक्रवात

श्रीलंका में इस तूफान ने जो भयानक मंजर पैदा किया, वह दुखद है। 120 से ज्यादा जानें गईं और हजारों लोग बेघर हुए। लेकिन इसी संकट की घड़ी में भारत ने अपने पड़ोसी धर्म को बखूबी निभाया। 'ऑपरेशन सागर बंधु' के तहत INS विक्रांत जैसे युद्धपोतों से राहत सामग्री भेजना सिर्फ मदद नहीं थी, बल्कि यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भरोसेमंद और जिम्मेदार दोस्त वाली छवि को मजबूत करता है।

चक्रवात ‘दितवाह’ (Cyclone Ditwah) एक शक्तिशाली तूफानी चक्रवात है जो बंगाल की खाड़ी में बना है। इसने सबसे पहले पड़ोसी देश श्रीलंका को बुरी तरह प्रभावित किया, जहाँ इसने अभूतपूर्व तबाही मचाई है। श्रीलंका में 120 से ज्यादा लोगों की जान गई है और बहुत बड़ा नुकसान हुआ है।

जानकारी के अनुसार, अब यह तूफान भारत के तटीय इलाकों यानी तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिण आंध्र प्रदेश की ओर बढ़ रहा है। भारत के मौसम विभाग (IMD) ने इन राज्यों में भारी बारिश और तूफानी हवाओं का रेड अलर्ट जारी किया है और लोगों को सुरक्षित रहने की सलाह दी गई है।

चक्रवात क्या होता है और यह कैसे बनता है?

चक्रवात को अंग्रेजी में साइक्लोन कहते हैं, असल में समंदर के ऊपर पैदा होने वाला एक बहुत बड़ा और ताकतवर तूफान होता है जो हवा के तेजी से गोल घूमने के कारण बनता है। आप इसे एक विशाल, घूमती हुई हवा की मशीन समझ सकते हैं, जो अपने साथ तेज हवा, मूसलाधार बारिश और ऊँची लहरें लेकर आती है। यह तूफान ख़ासतौर पर हिंद महासागर जैसे गर्म पानी वाले इलाकों में बनता है और जमीन पर आकर भारी तबाही मचाता है।

चक्रवात बनने के लिए कुछ खास चीजों का एक साथ होना बहुत जरूरी है और यह सब समंदर के ऊपर ही शुरू होता है। सबसे पहले, चक्रवात बनने के लिए समंदर की सतह का पानी बहुत ज्यादा गर्म होना चाहिए (करीब 26.5°C या उससे ज़्यादा)। यह गर्मी ही तूफान की ताकत होती है।

जब पानी गर्म होता है, तो उसके ऊपर की हवा भी गर्म होकर हल्की हो जाती है और तेजी से ऊपर उठने लगती है। हवा के ऊपर उठने से समंदर की सतह के पास एक खाली जगह बन जाती है। इस जगह पर हवा का दबाव (Pressure) बहुत कम हो जाता है। यही वह ‘केंद्र’ है जहाँ तूफान बनता है।

इस खाली जगह (कम दबाव वाले केंद्र) को भरने के लिए आस-पास की ठंडी हवा बहुत तेजी से दौड़कर अंदर आती है। जब ये हवाएँ केंद्र की तरफ आती हैं, तो पृथ्वी के घूमने की ताकत (जिसे कोरिओलिस बल कहते हैं) के कारण ये सीधा न आकर, गोल-गोल घूमने लगती हैं। यह गोल घूमना ठीक वैसा ही होता है जैसे आप वॉश बेसिन से पानी निकालते हैं तो वह गोल घूमता है।

यह गोल घूमती हुई हवा लगातार ऊपर उठती रहती है और भाप बनकर बड़े-बड़े बादल बनाती है। जब हवा की रफ्तार 119 किलोमीटर प्रति घंटा से ऊपर पहुँच जाती है, तो यह एक पूरा चक्रवाती तूफान (साइक्लोन) कहलाता है। चक्रवात ‘दितवाह’ भी बंगाल की खाड़ी में ऐसे ही बना है, और अब यह श्रीलंका के पास से घूमते हुए भारत के तटों की तरफ आ रहा है।

चक्रवात इतना खतरनाक क्यों होता है?

चक्रवात सिर्फ हवा या बारिश नहीं होते, बल्कि ये तीन चीजों से मिलकर सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाते हैं। तूफान में हवा की रफ्तार इतनी ज्यादा होती है कि यह पेड़ों को जड़ से उखाड़ देती है, मकानों और इमारतों को तोड़ देती है। इससे बिजली के खंभे भी गिर जाते हैं, जिससे सब जगह अंधेरा छा जाता है।

चक्रवात अपने साथ बहुत ज्यादा बारिश लाते हैं। यह बारिश इतनी होती है कि कुछ ही घंटों में बाढ़ आ जाती है। बाढ़ का पानी घरों और खेतों को डुबो देता है, जिससे बहुत नुकसान होता है। यह सबसे बड़ा खतरा होता है। तेज हवाएँ समंदर के पानी को बहुत ऊँचा उठा देती हैं और ये ऊँची लहरें (जैसे एक चलती हुई दीवार) तेजी से जमीन की तरफ आती हैं। इससे तटीय इलाके पल भर में पानी में डूब जाते हैं, जिससे जान-माल का सबसे ज्यादा नुकसान होता है।

चक्रवात इन तीनों चीजों से मिलकर खेती को, जानवरों को और पूरे इलाके की अर्थव्यवस्था को बहुत बुरी तरह बर्बाद कर देते हैं। इसलिए, जैसे ही मौसम विभाग ‘रेड अलर्ट’ जारी करे, हमें तुरंत सुरक्षित जगह पर चले जाना चाहिए।

श्रीलंका पर चक्रवात ‘दितवाह’ का भयानक असर

साइक्लोन ‘दितवाह’ श्रीलंका के लिए एक बड़ी आफत बनकर आया। वहाँ की सरकार ने इसे ‘ऐसी तबाही जो पहले कभी नहीं देखी’ बताया है। इस तूफान की वजह से 120 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और 130 लोग अभी भी लापता हैं। जोरदार बारिश के कारण कई जगहों पर बाढ़ आ गई और पहाड़ों या मिट्टी वाली जगहों पर जमीन खिसकने (Landslides) की घटनाएँ हुईं।

हालात इतने खराब थे कि सरकार को करीब 44 हजार लोगों को उनके घरों से निकालकर स्कूलों और दूसरी सुरक्षित जगहों पर बने कैंपों में पहुँचाना पड़ा। राजधानी कोलंबो और उसके आस-पास के इलाकों में पानी बहुत बढ़ गया था, इसलिए लोगों को तुरंत सुरक्षित जगह जाने को कहा गया। तूफान के कारण वहाँ स्कूल बंद कर दिए गए, ट्रेनें रोक दी गईं, और यहाँ तक कि शेयर बाजार को भी जल्दी बंद करना पड़ा।

PM मोदी के विजन ‘SAGAR’ से जुड़ा ‘ऑपरेशन सागर बंधु’

‘ऑपरेशन सागर बंधु’ सिर्फ श्रीलंका को मदद पहुँचाने का काम नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि भारत अपने पड़ोसियों के लिए कितना भरोसेमंद दोस्त है। भारत यह दिखाना चाहता है कि वह हिंद महासागर में ‘सबसे पहले’ खड़ा होने वाला देश और सुरक्षा देने वाला है।

मुश्किल समय में मदद करके भारत ने श्रीलंका के साथ अपने रिश्ते को और मजबूत किया है। यह दुनिया को दिखाता है कि भारत के पास आपदा में सहायता (HADR) पहुँचाने की कितनी अच्छी क्षमता है। भारत ने इस राहत काम में INS विक्रांत जैसे अपने बड़े-बड़े और आधुनिक युद्धपोतों को लगाया। इससे दुनिया भर में यह संदेश गया कि भारत की समुद्री ताक़त कितनी ज्यादा है और वह कितनी तेजी से किसी भी हालात में काम कर सकता है।

जब भी किसी पड़ोसी देश पर संकट आता है तो चीन भी वहाँ अपनी पैठ बनाने की कोशिश करता है। लेकिन भारत ने तेजी से और बिना किसी स्वार्थ के मदद भेजकर यह साबित किया कि वह इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा भरोसेमंद दोस्त है। यह चीन के बढ़ते असर को भी संतुलित करता है। यह ऑपरेशन प्रधानमंत्री मोदी के एक बड़े विजन ‘SAGAR’ (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) से जुड़ा है। इसका मतलब है कि भारत पूरे हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा और तरक्की के लिए हमेशा तैयार है।

चक्रवात ‘दितवाह’ का भारत पर क्या असर होगा?

श्रीलंका में तबाही मचाने के बाद, चक्रवात ‘दितवाह’ अब भारत की तरफ बढ़ रहा है। मौसम विभाग (IMD) का कहना है कि यह 30 नवंबर 2025 की सुबह तक हमारे किनारे वाले इलाकों यानी उत्तरी तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिण आंध्र प्रदेश के पास पहुँच सकता है। तूफान के खतरे को देखते हुए, मौसम विभाग ने तमिलनाडु के कई जिलों जैसे कुड्डालोर में ‘रेड अलर्ट’ यानी सबसे बड़ी चेतावनी जारी की है।

इसका मतलब है कि यहाँ बहुत-बहुत ज्यादा बारिश हो सकती है। इन इलाकों में अगले दो दिनों (शनिवार और रविवार) तक बाढ़ आ सकती है और निचले इलाके पानी में डूब सकते हैं। हवा की रफ्तार 70 से 90 किलोमीटर प्रति घंटा तक जा सकती है, जिससे पेड़ गिर सकते हैं, बिजली के खंभे टूट सकते हैं, और मकानों को नुकसान हो सकता है।

इसके अलावा, चेन्नई और आसपास के जिलों में भी तेज बारिश होगी, जिससे फ्लाइट सेवाएँ रुक गई हैं और रोजमर्रा के काम पर बुरा असर पड़ेगा, इसलिए ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी कर दिया गया है। इस खतरे से निपटने के लिए, प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। अकेले कुड्डालोर जिले में 1.5 लाख लोगों को रखने के लिए 233 राहत कैंप तैयार किए गए हैं। पानी निकालने के लिए मोटर और टीमें भी तैयार हैं और सभी सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर 24 घंटे काम कर रहे हैं।

लोगों को बहुत जरूरी सलाह दी गई है कि वे अगले कुछ दिनों तक घर के अंदर ही रहें। समंदर में जाने वाले मछुआरों को 1 दिसंबर 2025 तक समंदर में जाने से साफ मना किया गया है। साथ ही, चेन्नई और श्रीलंका के बीच की फ्लाइटों पर असर पड़ा है। अगर किसी को कोई परेशानी हो तो वे सरकार के हेल्पलाइन नंबर 1077 पर फोन कर सकते हैं।

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