Sunday, April 14, 2024
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‘भैया मैं साँस नहीं ले पा रहा, मेरे बच्चों का ख्याल रखना’ – मौत से पहले आखिरी कॉल का दर्दनाक Audio

"अब कोई रास्ता नहीं बचा... बस मैं खत्म हूँ मैं भैया आज... मेरे बाद मेरे परिवार को ख्याल रखना... अब साँस भी नहीं आ रही है। मेरे परिवार का ख्याल रखना।"

दिल्ली के रानी झाँसी रोड स्थित चार मंजिला अनाज मंडी इमारत में रविवार (दिसंबर 8, 2019) को आग और धुएँ के बीच घिरे कई बदनसीबों को अपनी मौत का अंदाजा हो गया था। इनमें से कुछ ने अपने-अपने घरों पर परिजनों को फोन मिलाए। किसी ने अपने बूढ़े पिता से खुद को बचाने की गुहार लगाई, किसी ने अपने दोस्त को परिवार का ध्यान रखने के लिए कहा, तो किसी ने अपनी गर्भवती बीबी को आखिरी कॉल करके जिंदा न बचने की आशंका जाहिर की।

मौत सामने खड़ी देख मोहम्मद इमरान ने अपने पिता को फोन कर उसे बचाने की गुहार लगाई और कहा कि वह जिंदा बाहर नहीं आ पाएगा। इमरान ने अंतिम कॉल में अपने पिता से कहा, “अब्बा बहुत डर लग रहा है। फैक्ट्री में आग लग गई है। बचना मुश्किल लग रहा है। हमें बचा लो।” जवाब में पिता ने कहा, “चिंता मत करो, अल्लाह पर भरोसा रखो।” बेटे और पिता के बीच इतनी ही बात हो पाई थी कि फोन कट गया। पिता हेलो… हेलो… बोलते रहे, लेकिन उन्हें बेटे की ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

बिहार के सहरसा के 18 वर्षीय मुस्तकिन ने अपने 24 वर्षीय बड़े भाई अफसद को इस त्रासदी में खो दिया। मुस्तकिन ने कहा, “अफसद इस बार अपने परिवार के साथ ईद नहीं मना पाया था। वह सोमवार सुबह घर जाने वाला था और शनिवार रात को किए गए आखिरी फोन में उसने मुझसे घर का कुछ सामान खरीदने को कहा था।”

इस आग ने 43 लोगों की जान ले ली। रविवार तड़के 5 बजे के आसपास जब पूरी दिल्ली नींद के आगोश में डूबी हुई थी, तब आग में फँसा मोहम्मद मुशर्रफ अपने दोस्त को फोन मिला रहा था। मोनू को कॉल करके मुशर्रफ न केवल रो रहा था, बल्कि अपने दोस्त से कह रहा था कि कुछ ही देर में वह मरने वाला है और वह उसके बाद उसके परिवार को ख्याल रखे।

मुशर्रफ अपने दोस्त को फोन कर कहता है, “मोनू, भैया मैं आज खत्म होने वाला हूँ… चारों ओर धुआँ ही धुआँ है, एक-एक साँस लेना मुश्किल हो रहा है और कुछ ही पलों में आग लगने वाली है यहाँ। मोनू तुम करोल बाग आ जाना गुलजार से नंबर ले लेना…”

मोनू: कहाँ, दिल्ली? 

मुशर्रफ: हाँ…

मोनू: किसी तरह तुम निकलो वहाँ से…

मुशर्रफ: अब कोई रास्ता नहीं बचा… बस मैं खत्म हूँ मैं भैया आज… मेरे बाद मेरे परिवार को ख्याल रखना… अब साँस भी नहीं आ रहा है।

मोनू: पुलिस, फायर ब्रिगेड किसी नंबर पर कॉल कर बचने का प्रयास करो।

तभी मुशर्रफ का दम घुटने लगता है… मौत का सामने खड़ा देख वह रोने लगता है… और अल्लाह को याद करता है। फिर अचानक से मुशर्रफ की आवाज आने बंद हो जाती है और उसका दोस्त मोनू हेलो… हेलो करता है…

इंडिया टुडे टीवी से बात करते हुए मोनू ने कहा, “मैंने एक भाई खो दिया है। मैं उसके परिवार की मदद करने की अपनी प्रतिबद्धता लेकर जिऊँगा लेकिन मैंने आज सब कुछ खो दिया है। मेरा सबसे अच्छा दोस्त हमेशा के लिए चला गया।”

बिहार के मधुबनी जिले से 32 वर्षीय जाकिर हुसैन ने कहा कि उसके छोटे भाई शाकिर हुसैन ने अंतिम कॉल अपनी प्रेगनेंट बीबी को की थी। वह चौथी मंजिल पर स्थित टोपी बनाने वाले कारखाने में काम करता था। जाकिर ने कहा, “मैं फँस गया हूँ। मैं जिंदा बाहर नहीं आ पाऊँगा।”

दोनों भाइयों ने कल रात फोन पर बात की थी। उनके पिता भी दिल्ली में ही काम करते हैं और वे तीनों सोमवार को अपने गृहनगर जाने वाले थे। भाइयों ने रविवार को खरीददारी करने का मन बनाया था। जाकिर ने कहा, “शाकिर के तीन बच्चे हैं-दो बेटियाँ और एक बेटा। उसकी पत्नी गर्भवती है। वह एक और बच्चे का पिता बनने वाला था, लेकिन वो अपने बच्चों को अनाथ छोड़कर चला गया।”

उत्तर प्रदेश के शहजाद ने भी अपने सुबह 5 बजे अपने माता पिता को कॉल किया बचाने की गुहार लगाई। मगर कॉल बीच में ही कट हो गया और जल्द ही शहजाद के माता पिता को पता चला कि शहजाद मर चुका है। इसके अलावा राजू नाम के अन्य कर्मचारी ने भी अपने दोस्त फुरकान अहमद को कॉल किया। अहमद ने उस कॉल के बारे में बात करते हुए कहा, “उसकी आवाज़ अस्पष्ट थी लेकिन उसने मुझे बचाने के लिए विनती की। उसने कहा कि चारों तरफ आग और धुआँ था। मैंने पूछा कि क्या उन्होंने और अन्य लोगों ने पुलिस को मदद के लिए बुलाया, लेकिन मैं उनकी प्रतिक्रिया नहीं सुन सका। यह बातचीत केवल 30-40 सेकंड तक चली।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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