Homeदेश-समाजकिसान आंदोलन में आतंकी भिंडरावाले का झंडा: ट्रैक्टर से दिल्ली आने वाले वालों का...

किसान आंदोलन में आतंकी भिंडरावाले का झंडा: ट्रैक्टर से दिल्ली आने वाले वालों का मकसद क्या?

ये सारे ट्रैक्टर दिल्ली सीमाओं पर इकट्ठा होंगे। इन्हीं में देख सकते है कि खुलेआम बड़ा सा झंडा लगाकर इसे दिल्ली लाने की तैयारी हो रही है। वीडियो में दिख रहा है कि एक साथ कई ट्रैक्टर आगे बॉर्डर की ओर आगे बढ़ रहे हैं।

किसान आंदोलन में खालिस्तानी आतंकी भिंडरावाले का पोस्टर अभी से दिखने लगा है। वीडियो सामने आई है जिसमें अंबाला के शंभू बॉर्डर के पास किसान अपने ट्रैक्टर लेकर फतेहगढ़ साहिब से आ रहे हैं। ये सारे ट्रैक्टर दिल्ली सीमाओं पर इकट्ठा होंगे। इन्हीं में देख सकते है कि खुलेआम बड़ा का झंडा लगाकर इसे दिल्ली लाने की तैयारी हो रही है।

वीडियो में दिख रहा है कि एक साथ कई ट्रैक्टर आगे बॉर्डर की ओर आगे बढ़ रहे हैं। इसमें दूसरे नंबर पर जो ट्रक आ रहा है उसमें बड़ा सा झंडा लगा है जिसमें खालिस्तानी आतंकी भिंडारावाले का झंडा लगा है। इसे देखने के बाद लोग याद कर रहे हैं दिल्ली में जब इससे पहले किसान आंदोलन हुआ था तो किस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया गया।

याद दिला दें कि इससे पहले भी जब किसानों ने दिल्ली सीमाओं पर धरना देना शुरू किया था, उस समय भी प्रदर्शनकारियों के पास भिंडरावाले के पोस्टर देखे गए थे और फिर खुलेआम नारे सुनाई पड़े थे- “भिंडरावाले तेरी सोच पर राज करेगा…।” इसके अलावा ये बात भी गौर करनी वाली है कि जब-जब भिंडरावाले के पोस्टर या झंडे देखे जाते रहे हैं तब तब कट्टरपंथी खालिस्तानी भीड़ का उग्र चेहरा सामने आया है।

2020-2021 के किसान आंदोलन को ही यदि याद करें तो भीड़ ने नारेबाजी के साथ तिरंगा का अपमान किया था। इसके अलावा कुछ दिन पहले की ही बात है कि आतंकी भिंडरावाले का पोस्टर गुरुद्वारे में लगाने से जब रिटायर कर्नल ने मना किया था तो कैसे खालिस्तानी उन पर टूट पड़े थे और उनकी गाड़ी को तोड़ दिया गया था। इन सब घटनाओं को देखते हुए ये सोचना अहम है कि आखिर इन बड़े-बड़े ट्रैक्टरों में बैठकर कौन से किसान दिल्ली आ रहे हैं जिनके लिए ऐसे झंडे लगाने जरूरी हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘काफ़िर’ अब समंदर पार नहीं है.. कैसे 11वीं सदी का क्रूसेड बना नए पेंटागन की विचारधारा? डोनाल्ड ट्रंप और अमरीकी कल्चर वॉर

1095 में पोप अर्बन द्वितीय ने यरूशलम के लिए जिस धर्मयुद्ध का ऐलान किया था, आज डोनाल्ड ट्रंप के नए अमेरिका के पीछे वही विचार काम कर रहा है। ट्रंप के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और उनकी किताब 'The War on Warriors' से समझिए कि कैसे 1000 साल पुराना 'Deus Vult' का सिद्धांत आज अमरीकी राजनीति और कल्चर वॉर को चला रहा है।

‘मेविस्तान’ बनाने का सपना, अलवर-भरतपुर में हिंसा और फिर गाँधी-नेहरू का हस्तक्षेप: जानिए मेवात के उस इतिहास की पूरी कहानी, जिसने बदल दिया इलाके...

मेविस्तान की माँग, 1933 का गोविंदगढ़ संघर्ष, 1947 का अलवर-भरतपुर घटनाक्रम और गाँधी-नेहरू के हस्तक्षेप से जुड़ी मेवात की पूरी कहानी जानिए।
- विज्ञापन -