Tuesday, June 18, 2024
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लव और लैंड जिहाद से त्रस्त उत्तराखंड के हिंदू सड़कों पर उतरे: स्थानीय लोग बोले- लगातार बढ़ रही मुस्लिमों की जनसंख्या और कारोबार पर दबदबा, ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट

पुरोला के अनिल असवाल का दावा है कि साल 1978 में वहाँ महज 3 परिवार मुस्लिमों के थे। अब उसी पुरोला में मुस्लिमों की 40 से अधिक दुकानें हैं। दावा है कि इन दुकानों में कई तो स्थाई तौर पर बस गए हैं। बकौल अनिल इन 40 दुकानों और उससे जुड़े परिवारों ने ही आसपास के तमाम हिन्दुओं की नाक में दम कर रखा है।

मीडिया और सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म पर उत्तराखंड का उत्तरकाशी क्षेत्र इस समय चर्चा के केंद्र में है। पुरोला क्षेत्र से शुक्रवार (26 मई 2023) को लव जिहाद के आरोपित उबैद खान को गिरफ्तार किया गया है। कहा जा रहा है कि लव जिहाद की बढ़ती घटनाओं से हिन्दू समाज नाराज हैं। कुछ मीडिया संस्थानों ने पुरोला से मुस्लिमों के पलायन करने और कुछ ने हिन्दू संगठनों द्वारा उन्हें धमकाने जैसी बातें अपनी रिपोर्ट में कही हैं। आखिर सच क्या है?

ऑपइंडिया ने जब उत्तरकाशी और उत्तराखण्ड के हिन्दू संगठन से जुड़े कुछ लोगों से इस संबंध में बात की तो मामला उल्टा निकला। हिन्दू संगठनों ने उत्तराखंड के हिन्दुओं को लव जिहाद, लैंड जिहाद, डेमोग्राफी बदलाव, व्यापार जिहाद और हत्या जैसी घटनाओं से खुद को पीड़ित बताया।

मीडिया के कई संस्थानों ने यह साबित करने का प्रयास किया है कि पुरोला के हिन्दू संगठनों ने मुस्लिमों को बाजार छोड़ कर जाने का अल्टीमेटम दिया है। इस बावत वायरल हो रहे एक पोस्टर का भी खासतौर पर जिक्र किया जा रहा है।

पोस्टर में ‘जिहादियों’ को सम्बोधित करते हुए 15 जून 2023 तक अपनी दुकानें खाली करने के लिए कहा गया है। देवभूमि रक्षा अभियान नाम से जारी इस पोस्टर में 15 जून को महापंचायत का भी एलान हुआ है। हालाँकि, पोस्टर छापने वाले प्रिंटिंग प्रेस का जिक्र इसमें नहीं है।

‘द वायर’ की पत्रकार अरफ़ा खानम ने इस मामले में हिन्दू संगठनों के प्रदर्शन के वीडियो को काटकर दिखाया और मुस्लिमों को भयभीत बताया। ऑपइंडिया ने जब इन दावों की पड़ताल की तो असली भय देवभूमि के हिन्दुओं में देखने को मिला। पुलिस ने भी मुस्लिमों में किसी भी प्रकार के डर की बात से इनकार किया।

विक्टिम कार्ड खेलने वालों ने लगाए पोस्टर

ऑपइंडिया ने देवभूमि रक्षा अभियान संगठन के संस्थापक स्वामी दर्शन भारती से बात की। उन्होंने बताया कि घटना के दिन वो पुरोला में मौजूद थे, लेकिन न तो उन्होंने इन पोस्टरों को लगाया और न ही उनकी जानकारी में किसी ने ऐसा किया। स्वामी दर्शन भारती ने पोस्टरों को कुछ लोगों द्वारा विक्टिम कार्ड खेलने की साजिश करार दिया।

उत्तराखंड पुलिस ने भी पोस्टर लगाने के मामले में अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया है। उत्तरकाशी के पुलिस अधीक्षक IPS अपर्ण यदुवंशी के मुताबिक, जल्द ही आरोपित की पहचान की जाएगी। उन्होंने दावा किया कि जिले में कानून और शांति व्यवस्था पूरी तरह से कायम है।

रोटी, बेटी और चोटी तीनों खतरे में

स्वामी दर्शन भारती ने आगे बताया कि हिन्दू धर्म के उद्गम स्थल देवभूमि उत्तराखंड पर जिहादियों की मजहबी नजर पड़ चुकी है। दर्शन भारती ने कहा, “उत्तराखंड में काफी पहले कुछ मुस्लिम रोटी माँगने आए थे। अब वो हमारी बेटियाँ भगा रहे हैं। आने वाले समय में हमारी चोटियाँ खतरे में हैं।”

चोटियों का मतलब स्वामी भारती ने सनातन संस्कृति से संबंधित होना बताया। दर्शन भारती का दावा है कि लव जिहाद के मामले में फिलहाल उत्तराखंड देश में सबसे ज्यादा टारगेट पर है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम लड़कों द्वारा अपहृत हिंदू लड़कियों को मानव तस्करी में प्रयोग किया जाता है।

मार डाला गया था हिन्दू छात्र

पुरोला के एक अन्य स्थानीय निवासी अनिल असवाल ने ऑपइंडिया से बात की। अनिल ने बताया कि लगभग 3 साल पहले पुरोला से करीब 40 किलोमीटर दूर हिमाचल प्रदेश की सीमा से सटे मोरी इलाके में इंटर कॉलेज के अंदर मुस्लिम छात्र ने अपने हिंदू सहपाठी को मार डाला था।

हत्या की यह घटना दोनों छात्रों के बीच मामूली कहासुनी के बाद हुई थी। दावा है कि इस घटना से स्थानीय लोगों में काफी गुस्सा था, लेकिन तब वे सब खामोश रहे थे। हमें बताया गया कि मोरी इलाके के कई गाँवों में मुस्लिम रहते हैं।

आए दिन दुकानों और मकानों में होती हैं चोरियाँ

अनिल असवाल के मुताबिक, बाहर से आकर बसे मुस्लिमों की वजह से पुरोला और आसपास के क्षेत्र में आए दिन चोरी की घटनाएँ होती रहती हैं। इन घटनाओं में कभी शटर तोड़े जाने, गाड़ियों में तोड़फोड़ तो कभी साइकिल चोरी होने जैसी घटनाएँ शामिल हैं।

ऑपइंडिया को बताया गया कि पुलिस इन मामलों को अपनी तरफ से रफा-दफा करने का प्रयास करती रहती है। अनिल ने आगे बताया कि स्थानीय लोगों में पनपे गुस्से की एक बड़ी वजह ये घटनाएँ भी हैं, जिनसे स्थानीय लोगों को दो-चार होना पड़ रहा है।

नाबालिग लड़की को रखा था 5 दिनों तक बंधक

पुरोला की घटना से खुद को पूरी तरह से परिचित बताते हुए देहरादून निवासी राकेश उत्तराखंडी ने पिछले साल की एक घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि तब पुरोला में 15 साल की एक नाबालिग हिन्दू लड़की को 5 दिनों तक बंधक बनाए रखा गया था।

राकेश का दावा है कि इस घटना में सभी आरोपित मुस्लिम समुदाय के थे, जो कबाड़ का काम किया किया करते थे। लड़की को भूखा-प्यासा रखा जाता था। हालाँकि, लड़की को बचा लिया गया था और आरोपितों को जेल भेज दिया गया था, लेकिन राकेश ने इस सजा को नाकाफी बताया।

अनिल असवाल के मुताबिक, पुरोला के पास शरणौर गाँव से मई 2023 में एक मुस्लिम युवक हिन्दू समुदाय की 2 बच्चों की माँ को भगाकर ले गया था। उन्होंने दावा किया है कि इस महिला को अब तक बरामद नहीं किया जा सका है।

पुरोला के रहने वाले संजू ने भी ऑपइंडिया से बातचीत में यह स्वीकार किया है कि वहाँ लव जिहाद की वजह से हिन्दू समाज में भय का माहौल है। उन्होंने हिन्दुओं के आक्रोश की वजह बहन-बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ को बताया।

साल भर से हो रहा था अनाथ नाबालिग पीड़िता से रेप

जिस नाबालिग लड़की से हुए लव जिहाद पर पुरोला सहित पूरे उत्तराखंड में हंगामा मचा हुआ है, उसे स्थानीय निवासी अनिल असवाल ने अनाथ बताया। बकौल अनिल, बच्ची लगभग 40 किलोमीटर दूर मोरी विकास खंड की रहने वाली थी, जो माता-पिता की मौत के बाद पुरोला में अपने मामा के साथ रहती थी।

अनिल असवाल ने दावा किया कि आरोपित उबैद खान नाबालिग पीड़िता से लगभग एक साल से रेप कर रहा था। इस दौरान आरोपित ने नाबालिग लड़की के अश्लील फोटो और वीडियो भी बनाए थे।

घटना के दिन का जिक्र करते हुए अनिल ने बताया कि 26 मई शुक्रवार के दिन वह लड़की को लेकर बाजार से पैदल निकला और पेट्रोल पम्प के पास दूर कहीं ले जाने के लिए वाहन में बिठाने ही वाला था कि एक स्थानीय युवक ने पीड़िता को पहचान लिया।

स्थानीय युवक ने लोगों की मदद से आरोपित उबैद खान और लड़की को पकड़ लिया और उन दोनों को पुलिस के हवाले कर दिया। लड़की के मामा स्थानीय बाजार में सम्मानित व्यक्ति हैं। इसलिए काफी दिनों से जहर जैसा घूँट पी रहे हिन्दू समाज के लोग आंदोलित हो गए।

बाले खाँ है पुरोला के मुस्लिमों का लीडर

पुरोला निवासी अनिल असवाल ने बताया कि वहाँ के मुस्लिमों का लीडर बाले खाँ नाम का व्यक्ति है। उन्होंने बताया कि बाले ख़ाँ साल 1978 में कहीं बाहर से आकर पुरोला में बसा था। उस समय उसकी आटा चक्की हुआ करती थी। समय के साथ उसने कई कारोबार बदले।

अनिल का आरोप है कि बाले खाँ ने अपना कई कारोबार बदला और अब वह बाजार में कपड़े की बड़ी दुकान चलाता है। बाले खाँ समय के साथ अरब देशों से आने वाली फंडिंग के दम पर और अमीर होता चला गया। वहीं, उसके समय के कई हिन्दू व्यापारी घाटे की वजह से अपना दुकान बंद कर चुके हैं।

अनिल असवाल ने हमें आगे बताया कि बाले ख़ाँ जब शुरू में बाजार में बसा था, तब वह हिन्दुओं से काफी सलीके से पेश आता था लेकिन अब उसका चाल-ढाल बदल चुका है। हमें बताया गया कि स्थानीय हिन्दू समाज का गुस्सा सबसे ज्यादा बाले खाँ पर ही है।

बकौल अनिल बाले खाँ ही बाजर के सारे मुस्लिमों को अपने घर पर जमा करके नमाज़ आदि अपनी छत पर पढ़वाता है। अनिल ने बुजुर्ग हो चले बाले खाँ के बेटे अशरफ को भी अपने अब्बा के नक्शे कदम पर बताया। फ़िलहाल अशरफ अपने अब्बा के साथ कपड़े की दुकान चलाता है।

पुरोला कांड के बाद भी जारी है लव जिहाद

राकेश का यह भी दावा है कि मई के अंतिम सप्ताह में पुरोला में घटी लव जिहाद की जिस घटना से लोग नाराज हैं, उसके बाद भी आसपास में वैसी ही 2 अन्य घटनाएँ घटी हैं। ताजा घटना का जिक्र करते हुए राकेश ने बताया कि 8 जून 2023 (गुरुवार) की सुबह 3 बजे उन्होंने 2 नाबालिग हिन्दू लड़कियों को चकराता के पास से बरामद किया है।

राकेश के मुताबिक, पीड़िताएँ नेपाली मूल की हैं। इन दोनों लड़कियों को एक मुस्लिम युवक अपने साथ कहीं लेकर जा रहे थे। लड़कियों को ऑनलाइन गेम के माध्यम से फँसाया गया था। एक आरोपित का नाम नवाब उर्फ़ गुड्डू बताया जा रहा है और वह यूपी के मुजफ्फरनगर का रहने वाला है।

बच्चियों की माँ द्वारा दी गई तहरीर में नवाब पर पीड़िताओं से सेक्स चैट करने और उसे वायरल करने की धमकी देने का आरोप है। राकेश उत्तराखंडी ने इस मामले में उत्तराखंड पुलिस पर कार्रवाई में हीला-हवाली करने का आरोप लगाया है। वहीं, दूसरे मामले में आरोपित का नाम शाहरुख़ है, जो सहारनपुर का रहने वाला है।

देवबंद और बरेलवी मौलवियों की फंडिंग से हिन्दुओं के कारोबार तबाह

राकेश उत्तराखंडी ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि पुरोला और आसपास के मुस्लिम कारोबारियों को देवबंद और बरेलवी मौलवी फंडिंग कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पुरोला बाजार ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में जिन दुकानों को कोई हिन्दू व्यापारी 5 हजार रुपए के भाड़े पर उठाता है, उसे मुस्लिम दुकानदार 10 हजार रुपए के भाड़े पर लेते हैं।

बाहर से आ रही फंडिंग को राकेश ने हिन्दू कारोबारियों की बर्बादी की वजह बताया। राकेश ने इसे व्यापार जिहाद बताया। राकेश का दावा है कि उत्तराखंड के सैलून, सब्ज़ी, मैकेनिक आदि के काम करने वाले व्यवसायों में इसी वजह से हिन्दू घटते चले जा रहे हैं। राकेश ने दुकानों को किराए पर देने वाले लोगों को हिन्दू बताया। उन्होंने कहा कि सबको समझा पाना संभव नहीं है।

प्रेग्नेंट गाय को काटकर बच्चा कर दिया था बाहर

गोकशी की एक घटना का जिक्र करते हुए राकेश ने बताया कि मार्च 2021 में देहरादून जिले में एक गाय को काट दिया गया था। गाय गर्भवती थी, जिसके पेट में बच्चा था। गाय को काटकर उसके बच्चे को बाहर निकाल दिया गया था। वसंत विहार थाना क्षेत्र की इस घटना में पुलिस ने 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया था।

हो रहा है विरोध का असर

राकेश ने कहा कि उत्तराखंड में पीड़ित हिन्दुओं के आक्रोश को देखते हुए कुछ मुस्लिमों को मकान मालिकों ने दुकानें खाली करने के लिए कहा है। हालाँकि, उन्होंने यह भी दावा किया कि शुरुआती कुछ मामलों को छोड़कर अब किसी भी तरह का गैरकानूनी काम हिन्दुओं द्वारा नहीं किया जा रहा है।

पुलिस के साथ कानून व्यवस्था सही रखने में खुद को साझीदार बताते हुए उन्होंने बताया कि संवैधानिक तौर पर उत्तराखंड की आबोहवा को खराब करने वालों के खिलाफ अभियान जारी रहेगा। हालाँकि, मुस्लिम समुदाय के कई कारोबारी लोग अभी भी वहाँ हैं, जिनमें नाई और कबाड़ी आदि शामिल हैं।

उत्तरकाशी के रहने वाले पत्रकार दिनेश ने भी हमें बताया कि वहाँ के हिन्दू व्यापारी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उत्तरकाशी के कारोबार में मुस्लिमों की अच्छी दखल बताते हुए दिनेश ने कहा कि अधिकतर दुकान किराए पर लिए गए हैं, जिन्हें हिन्दुओं ने भाड़े पर दिया हुआ है।

पुरोला के रहने वाले अनिल असवाल ने बताया कि बाजार के कुछ दलाल किस्म के लोग पुलिस के साथ मिलकर बंद बाजार को खुलवाना चाह रहे। अनिल का दावा है कि अभी के हालात को देखते हुए बाजार खुलने से हालात और बिगड़ सकते हैं। अनिल ने भी कुछ एक मामलों के अलावा हिन्दुओं के विरोध को अहिंसात्मक बताया है।

मुस्लिमों का पलायन नहीं, बल्कि घर वापसी कहिए

अनिल असवाल ने दुकान मालिकों द्वारा भविष्य में मुस्लिम दुकानदारों को अपनी दुकानें किराए पर ना देने की बात को सही बताया। उनका दावा है कि लगभग आधे दर्जन मुस्लिमों को दुकान खाली करना पड़ सकता है। हालाँकि, अनिल ने मीडिया से इस कार्रवाई को पलायन के बजाय घर वापसी कहने की अपील की।

उन्होंने बताया कि मुस्लिमों ने अपने मूल घर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, मेरठ आदि से पलायन किया था और उत्तरकाशी में अस्थाई रूप से काम कर रहे थे। अनिल का कहना है कि अब UP के अलग-अलग हिस्सों से पलायन किए मुस्लिम वापस अपने-अपने घरों को जा रहे हैं।

तेजी से बढ़ रहा जनसंख्या असंतुलन

राकेश ने कहा कि पुरोला की जनसंख्या में बड़े पैमाने पर असंतुलन बढ़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से वहाँ आने वाले मजदूरों का सत्यापन कराए जाने की माँग की। उन्होंने कहा कि कमजोर कानून और निगरानी की कमी की वजह से कई मुस्लिमों ने न सिर्फ फर्जी कागजात बनवा लिए हैं, बल्कि उनके द्वारा वहाँ जमीनें भी खरीद ली गईं हैं।

उन्होंने कहा कि एक मुस्लिम रहने आता है तो बाद में वो धीरे-धीरे पूरी भीड़ जमा कर लेता है। इस साजिश को राकेश ने देवभूमि को जिहाद भूमि बनाने जैसा बताया। राकेश ने उत्तराखंड आने वाले मुस्लिमों को लेकर नियमों को कड़ा करने की माँग की है।

पुरोला के अनिल असवाल का दावा है कि साल 1978 में वहाँ महज 3 परिवार मुस्लिमों के थे। अब उसी पुरोला में मुस्लिमों की 40 से अधिक दुकानें हैं। दावा है कि इन दुकानों में कई तो स्थाई तौर पर बस गए हैं। बकौल अनिल इन 40 दुकानों और उससे जुड़े परिवारों ने ही आसपास के तमाम हिन्दुओं की नाक में दम कर रखा है।

विरोध में कोई राजनीति नहीं

राकेश ने कहा कि लव जिहाद विरोधी प्रदर्शन सिर्फ पुरोला में ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड के कई हिस्सों में फैला हुआ है। उन्होंने कहा कि इस विरोध प्रदर्शन को कोई भी हिन्दू पार्टी नहीं देख रहा, बल्कि बेटियों की सुरक्षा के लिए सभी एकजुट हैं।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हालाँकि कुछ अपवाद हर कहीं होते हैं और पुरोला में भी हैं। पुरोला के अनिल असवाल ने बताया कि 8 जून 2023 (गुरुवार) को पुलिस की मौजूदगी में शांति कमिटी की मीटिंग हुई है, लेकिन आशा कम ही है कि उनकी अपील का कोई बहुत असर पड़ेगा।

उत्तराखंड आंदोलन में सिर्फ हिन्दू बलिदान

राकेश उत्तराखंडी ने सवाल किया कि जो भी मुस्लिम ताव से उत्तराखंड को अपना बताते हैं, वो बताएँ कि प्रदेश के निर्माण में उन्होंने कितनी कुर्बानियाँ दी हैं। उन्होंने कहा कि हिन्दुओं ने अपनी संस्कृति को बचाने के लिए अपनी जान को जोखिम में डाला था, न कि आज का ये दिन देखने के लिए।

बंद दुकानों को न बताया जाए पलायन

ऑपइंडिया से बात करते हुए SHO पुरोला ने बताया कि कोई भी शिकायत मिलने पर पुलिस सख्ती से कार्रवाई करती है। उन्होंने किसी भी मुस्लिम द्वारा पलायन की खबरों से इनकार करते हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान बाजार बंद होने की जानकारी दी। थाना प्रभारी का कहना है कि सभी पक्षों से सकारात्मक बातचीत चल रही है और जल्द ही तमाम समस्याओं को सुलझा लिया जाएगा।

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राहुल पाण्डेय
राहुल पाण्डेयhttp://www.opindia.com
धर्म और राष्ट्र की रक्षा को जीवन की प्राथमिकता मानते हुए पत्रकारिता के पथ पर अग्रसर एक प्रशिक्षु। सैनिक व किसान परिवार से संबंधित।

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