Homeदेश-समाजदिल्ली में लॉकडाउन के बाद भुखमरी के डर से पैदल ही पलायन को मजबूर...

दिल्ली में लॉकडाउन के बाद भुखमरी के डर से पैदल ही पलायन को मजबूर लोग, देखें वीडियो

लॉकडाउन ही कोरोना संक्रमण से लड़ने का सबसे प्रभावी उपाय है। लेकिन इस लॉकडाउन के दौरान भी बड़ी संख्या में लोगों का पैदल ही दिल्ली से अपने अपने जिलों के लिए चल देने का यह दृश्य न सिर्फ विचलित कर देने वाला है बल्कि कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के हमारे संकल्प को नुकसान पहुँचाने वाला हो सकता है।

कोरोना संक्रमण के चलते लागू देशव्यापी लॉकडाउन के बाद भी लोगों का आवागमन पूरी तरह बाधित नहीं हो सका है। आज समाचार एजेंसी एएनआई ने एक वीडियो ट्वीट किया है जिसमें भारी संख्या में लोग दिल्ली-यूपी सीमा को गाजीपुर के पास क्रॉस करके, उत्तर प्रदेश में दाखिल होते देखे जा सकते हैं। जहाँ हैं वहीं बने रहने की, प्रधानमंत्री की अपील भी लोगों को रोक पाने में असफल हुई है।

ये पलायन कर रहे लोग भूखों मरने के डर से सैंकड़ों हजारों किलोमीटर पैदल चल कर भी अपने गाँव पहुँच जाना चाहते हैं। याद रहे कि महामारी से निपटने के लिए 24 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे देश में अगले 21 दिनों के लिए लॉकडाउन लगाने की घोषणा की थी। इसके साथ उन्होंने सभी को अपने-अपने घरों में बने रहने और घरों की सीमाओं को ही लक्ष्मण रेखा मानने का निर्देश दिया था। इसके अलावा दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने भी कहा है कि जो दिल्ली में हैं उन्हें कहीं भी जाने की जरूरत नहीं है, हमने आज 2 लाख लोगों तक खाने के पैकेट्स पहुँचाए हैं, और कल के लिए हमने 4 लाख फूड पैकेट्स का लक्ष्य रखा है।

केजरीवाल ने उन लोगों से भी वापस आने की अपील जो दिल्ली से अपने अपने गाँवों की तरफ पलायन कर रहे हैं। जानकारों के अनुसार लॉकडाउन ही कोरोना संक्रमण से लड़ने का सबसे प्रभावी उपाय है। लेकिन इस लॉकडाउन के दौरान भी बड़ी संख्या में लोगों का पैदल ही दिल्ली से अपने अपने जिलों के लिए चल देने का यह दृश्य न सिर्फ विचलित कर देने वाला है बल्कि कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के हमारे संकल्प को नुकसान पहुँचाने वाला हो सकता है।

याद रहे कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले से ही सभी प्रदेश के बाहर रह रहे सभी प्रदेश वासियों से वहीं बने रहने की अपील आकर चुके हैं। साथ ही योगी ने विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात कर प्रदेश के लोगों के लिए समुचित व्यवस्था करने का भी निवेदन किया है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -