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अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस: PM मोदी के जिस ड्रीम प्रोजेक्ट ‘CHEETAH’ को बनाया गया निशाना, उसने ही कराई विलुप्त हो गए ‘सबसे तेज धावक’ की भारत में दमदार वापसी

1950 के दशक में भारत में चीते को विलुप्त घोषित कर दिया गया था और देश में एक भी चीता नहीं बचा था। दशकों तक इस बात की कोशिशें चलीं कि 'सबसे तेज धावक' को फिर भारत लाया जाए। जनवरी 2022 में 'Action Plan for Introduction of Cheetah in India' बनाया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुुरुवार (4 दिसंबर 2025) को अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस के मौके पर वन्यजीव प्रेमियों को शुभकामनाएँ दी हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान अपने कार्यकाल में शुरू किए गए ‘प्रोजेक्ट चीता’ की उपलब्धियों की जिक्र किया है। जब देश में इस प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई थी तो कॉन्ग्रेस जैसे विपक्षी दलों ने इसका खूब मजाक उड़ाया था लेकिन इसकी सफलता ने विरोधियों को शांत कर दिया है।

पीएम मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री मोदी ने X पर तीन पोस्ट कर वन्यजीव प्रेमियों को शुभकामनाएँ दी हैं। PM मोदी ने X पर लिखा, “हमारे ग्रह के सबसे अद्भुत जीवों में से एक चीते की रक्षा के लिए समर्पित सभी वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षणवादियों को ‘अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस’ पर मेरी शुभकामनाएँ। हमारी सरकार ने 3 साल पहले इस शानदार जानवर की सुरक्षा और उस पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्स्थापित करने के उद्देश्य से ‘प्रोजेक्ट चीता’ शुरू किया था जिसमें यह वास्तव में फल-फूल सके। यह खोई हुई पारिस्थितिक विरासत को पुनर्जीवित करने और हमारी जैव विविधता को मजबूत करने का भी एक प्रयास था।”

PM मोदी ने लिखा, “भारत को कई चीतों का घर होने पर गर्व है और उनमें से एक बड़ी संख्या भारतीय धरती पर पैदा हुई है। उनमें से कई अब कुनो राष्ट्रीय उद्यान और गांधी सागर अभयारण्य में पनप रहे हैं। चीता पर्यटन की लोकप्रियता में भी वृद्धि देखकर खुशी होती है। मैं दुनिया भर के और अधिक वन्यजीव प्रेमियों को भारत आने और चीते को में देखने के लिए प्रोत्साहित करता हूँ।”

उन्होंने आगे लिखा, “चीता संरक्षण में हमारी प्रगति हमारे लोगों खासतौर पर हमारे समर्पित चीता मित्रों के सामूहिक सहयोग से ही संभव हुई है। वन्यजीवों की रक्षा करना और प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर रहना भारत के लोकाचार का अभिन्न अंग है और हम आज इन प्रयासों में उस भावना को जीवित देखते हैं।”

जब ‘प्रोजेक्ट चीता’ का हुआ विरोध

प्रधानमंत्री मोदी ने 17 सितंबर 2022 को अपने जन्मदिन के मौके पर मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीते छोड़कर इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। उस समय नामीबिया से 8 चीतों को कूनो लाया गया था।

हालाँकि, तभी से इस प्रोजेक्ट को लेकर BJP और प्रधानमंत्री मोदी पर सवाल उठने शुरू हो गए थे। जिस दिन यह प्रोजेक्ट शुरू हुआ उसी दिन कॉन्ग्रेस नेता जयराम रमेश ने पीएम मोदी पर हमला करते हुए इसे एक नौटंकी करार दिया था। यह कोई पहला या इकलौता हमला नहीं था बल्कि इसके बाद कॉन्ग्रेस और विपक्ष के नेताओं ने पर इस पर लगातार सवाल उठाए।

इतना ही नहीं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी ने भी इस प्रोजेक्ट पर तंज कसे थे। महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष नाना पटोले ने यह दावा किया था कि इन चीतों को भारत में इसलिए लाया जा रह है ताकि यहाँ भी लम्पी वायरस फैलाया जा सके। उन्होंने यह भी दावा किया कि इससे किसानों को नुकसान होगा।

श्योपुर के कॉन्ग्रेस के एक नेता ने तो यहाँ तक दावा कर दिया था कि वो चीते हैं ही नहीं बल्कि बिल्लियाँ हैं। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को पैसे की बर्बादी बताया और कहा कि पूरा श्योपुर इससे परेशान है। भारत आए चीतों की जब प्राकृतिक कारणों सो मौत भी हुई तो भी इसे बहस का मुद्दा बना दिया गया। कॉन्ग्रेस ने सत्ता पक्ष से खूब सवाल पूछे।

प्रोजेक्ट चीता की सफलता ने विरोधियों को कराया चुप

1950 के दशक में भारत में चीते को विलुप्त घोषित कर दिया गया था और देश में एक भी चीता नहीं बचा था। दशकों तक इस बात की कोशिशें चलीं कि ‘सबसे तेज धावक’ को फिर भारत लाया जाए। इस बीच जनवरी 2022 में ‘Action Plan for Introduction of Cheetah in India’ बनाया गया और तय हुआ कि 5 वर्षों में 50 चीतों को भारत में बसाया जाएगा। इसके लिए जगह चुनी गई मध्य प्रदेश का कूनो राष्ट्रीय उद्यान।

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में कुल 20 चीतों को छोड़ा गया था। इनमें 8 चीते सितंबर 2022 में नामीबिया से और 12 चीते फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से लाए गए थे। उस समय कई विशेषज्ञों और आम लोगों ने इस परियोजना पर सवाल उठाए थे लेकिन समय ने यह साबित कर दिया कि ये आशंकाएँ गलत थीं।

भारत में चीते को उसके प्राकृतिक आवास में वापस बसाने की कोशिशें अब एक नए और सफल चरण में प्रवेश कर चुकी हैं। जनसंख्या बढ़ोतरी, बेहतर आवास और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी इन सभी मोर्चों पर देश ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है।

कूनो उद्यान में चीतों की मूवमेंट को दिखाता मैप (फोटो: NTCA)

दिसंबर 2025 तक भारत में 32 चीते सुरक्षित रूप से मौजूद हैं। इनमें से 21 चीते भारत में ही जन्मे शावक हैं। किसी भी देश में इतनी तेज और स्थिर वृद्धि को वन्यजीव क्षेत्र में की बड़ी उपलब्धि माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह विश्व स्तर पर किसी भी बड़े मांसाहारी प्रजाति के पुनर्वास कार्यक्रम के लिए सबसे शानदार कार्यक्रम में से एक है।

भारत में जन्मों ने चीतों की संख्या बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। हाल ही में भारत में जन्मी मादा चीता मुखी ने नवंबर 2025 में 5 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया। यह उपलब्धि इस प्रोजेक्ट के भविष्य को और मजबूत करती है और बताती है कि देश का वातावरण और इनके संरक्षण की व्यवस्था चीतों के लिए मददगार साबित हो रही है।

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शिव
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7 वर्षों से खबरों की तलाश में भटकता पत्रकार...

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