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‘सबसे शिक्षित राज्य’ के 2282 शिक्षकों ने नहीं लगवाया कोरोना का टीका, आड़े आ गया मजहब: केरल के मंत्री ने ही बताया

देश ने 106 करोड़ से अधिक कोरोना वायरस वैक्सीनेशन का रिकॉर्ड बनाया है। लेकिन, सबसे शिक्षित राज्यों में शुमार केरल राज्य के कई शिक्षकों ने अभी तक वैक्सीन नहीं लगवाई है।

कोरोना वायरस के संकट से देश को बाहर निकालने के लिए भारत सरकार टीकाकरण अभियान चला रही है और इसके तहत देश में 106 करोड़ से अधिक कोरोना वायरस वैक्सीनेशन कर रिकॉर्ड भी बनाया गया है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि देश के सबसे अधिक शिक्षित राज्यों में शुमार केरल राज्य के कई शिक्षकों ने अभी तक वैक्सीन नहीं लगवाई है। उनकी हिचकिचाहट है कि जाने का नाम ही नहीं ले रही है।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, केरल के शिक्षा मंत्री वी शिवनकुट्टी ने शनिवार (30 अक्टूबर 2021) को जानकारी दी कि राज्य में करीब 2282 शिक्षकों को वुहान कोरोना वायरस का टीका नहीं लगाया गया है। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षकों ने अपनी ‘धार्मिक आस्था’ को टीका नहीं लगवाने का कारण बताया है। शिवनकुट्टी ने जोर देकर कहा कि जिन शिक्षकों ने वैक्सीन की डोज नहीं ली, उन्हें 1 नवंबर को स्कूल खुलने के बाद शारीरिक कक्षाएँ (कक्षा में उपस्थित रहकर) लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

उन्होंने बताया, “वैक्सीन लगवाने वालों में से एक समूह ने एलर्जी जैसे स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया है, जबकि अन्य विश्वास के नाम पर कोविड -19 वैक्सीन से नहीं लगवा रहे हैं। सरकार चाहती है कि सभी शिक्षक छात्रों के भविष्य को देखते हुए वैक्सीन शॉट लें। लेकिन हम कोई आदेश जारी नहीं करने जा रहे हैं। बेहतर होगा कि ऐसे शिक्षक स्कूल परिसर से दूर रहें। वे ऑनलाइन क्लास ले सकते हैं।”

केरल में 20,000 से अधिक गैर-शिक्षण कर्मचारी और 1.60 लाख शिक्षक हैं। राज्य सरकार ने सभी टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ के लिए टीकाकरण अनिवार्य कर दिया था। उनका मानना ​​है कि इस तरह के सरकारी निर्देश से कोरोनावायरस के प्रकोप को रोका जा सकेगा और यह बायो-बबल के रूप में काम करेगा। रविवार (31 अक्टूबर) तक केरल ने कुल 3.89 करोड़ टीके के डोज लिए हैं, जिसमें 1.36 करोड़ लोगों ने कोरोना वैक्सीन के सभी डोज ले लिए हैं।

हाल ही में हुए सर्वेक्षणों से पता चला है कि मुस्लिम आबादी का बड़ा हिस्सा कोरोना वैक्सीन पर भरोसा ही नहीं करता है। मुस्लिमों के टीकाकरण की हिंदुओं से तुलना करें तो यह काफी कम है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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