Saturday, July 31, 2021
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केरल नन रेप केस: बिशप फ्रैंको मुलक्कल की जमानत को SC ने भी किया रद्द, पादरी को मुकदमे का सामना करने का दिया निर्देश

प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने बिशप के वकील से कहा कि न्यायालय इस मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है लेकिन आरोप मुक्त करने के मुद्दे पर ही याचिका खारिज की जा रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (5 अगस्त, 2020) को नन से बलात्कार मामले में आरोपित केरल के बिशप फ्रैंको मुलक्कल (Bishop Franco Mulakkal) की आरोप मुक्त करने की याचिका बुधवार को खारिज कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें मुकदमे का सामना करने का निर्देश दिया।

प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने बिशप के वकील से कहा कि न्यायालय इस मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहा है लेकिन आरोप मुक्त करने के मुद्दे पर ही याचिका खारिज की जा रही है।

मुलक्कल ने इस याचिका में केरल उच्च न्यायालय के सात जुलाई के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें नन द्वारा दायर बलात्कार याचिका के मामले में आरोप मुक्त करने की उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।

उच्च न्यायालय ने जालंधर डायोसिस के अपदस्थ बिशप को बलात्कार के मामले में मुकदमे का सामना करने के लिए कहा था। बिशप के खिलाफ केरल में डायोसिस की नन ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। नन की इसी शिकायत के अधार पर बिशप के खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज किया गया था।

इससे पहले केरल उच्च न्यायालय ने बलात्कार के आरोपी बिशप फ्रैंको मुलक्कल को बरी करने की याचिका को खारिज कर दिया था। जिसमें उसने नन द्वारा दायर यौन शोषण के मामले में बरी करने की अपील की थी।

न्यायमूर्ति वी शिरसी ने जालंधर क्षेत्र के बिशप को निर्देश दिया कि बलात्कार मामले में वह ट्रायल का सामना करे। केरल में उसी क्षेत्र की एक नन ने उसके खिलाफ बलात्कार का मामला दर्ज कराया था। अदालत ने बिशप की याचिका खारिज करते हुए अभियोजन के इस तर्क को स्वीकार किया कि बलात्कार मामले में मुलक्कल के खिलाफ प्रथम दृष्ट्या साक्ष्य मौजूद हैं।

इस वर्ष मार्च में निचली अदालत द्वारा बरी किए जाने की याचिका खारिज करने के बाद रोमन कैथोलिक गिरजाघर के वरिष्ठ पादरी ने समीक्षा याचिका दायर की। बिशप के खिलाफ कोट्टायम जिले में पुलिस ने बलात्कार का मामला दर्ज किया था।

गौरतलब है कि बिशप के खिलाफ कोट्टायम जिले में पुलिस ने रेप का मामला दर्ज किया था। हाई कोर्ट में दायर याचिका में पादरी ने कहा कि जब उन्होंने पीड़िता नन से वित्तीय लेन-देन को लेकर सवाल किया तो उसने उन्हें फँसा दिया।

उल्लेखनीय है कि इस मामले की प्रमुख गवाहों में से एक सिस्टर लिसी ने पिछले दिनों आरोप लगाया था कि उनके वरिष्ठ लोग लगातार उन पर फ्रैंको मुलक्कल के खिलाफ दिए गए बयान को बदलने के लिए दबाव डाल रहे हैं। वहीं आरोपित बिशप को नोटिस जारी करने के बाद केरल पुलिस के एक अधिकारी का तत्काल तबादला कर दिया गया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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