Homeदेश-समाजकेरल में बिल्ली का कच्चा मांस खाते युवक को देख सहमे लोग, कई सालों...

केरल में बिल्ली का कच्चा मांस खाते युवक को देख सहमे लोग, कई सालों से था लापता: असम निवासी युवक को मानसिक अस्पताल में कराया गया भर्ती

केरल के मलप्पुरम से चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहाँ के कुट्टीपुरम बस स्टैंड पर एक युवक बिल्ली का कच्चा मांस खाते हुए मिला। असम के धुबरी जिले के रहने वाले इस व्यक्ति को तालुक अस्पताल में शुरुआती जाँच के बाद कोझिकोड के सरकारी मानसिक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहाँ उसके मानसिक समस्याओं का संकेत मिला है।

केरल के मलप्पुरम से चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहाँ के कुट्टीपुरम बस स्टैंड पर एक युवक बिल्ली का कच्चा मांस खाते हुए मिला। असम के धुबरी जिले के रहने वाले इस व्यक्ति को तालुक अस्पताल में शुरुआती जाँच के बाद कोझिकोड के सरकारी मानसिक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहाँ उसके मानसिक समस्याओं का संकेत मिला है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, कुट्टीपुरम बस स्टैंड पर खड़े लोगों ने जब युवक को बिल्ली का कच्चा मांस खाते हुए देखा तो वे डर गए। इसके बाद लोगों ने इसकी सूचना तुरंत मलप्पुरम पुलिस को दी। मौके पर पहुँचकर पुलिस ने युवक को ऐसा करने से रोका तो उसने बताया कि वो पिछले 4-5 दिनों से भूखा है। उसने कुछ खाया नहीं है।

इसके बाद पुलिस वालों ने युवक को खाना खिलाया। युवक की पहचान देबोजीत रॉय के रूप में हुई है। कुट्टीपुरम के पुलिस निरीक्षक पीके पद्मराजन ने बताया कि युवक शनिवार (03 फरवरी 2024) की शाम को घटनास्थल से लापता हो गया था, लेकिन रविवार (04 फरवरी 2024) की सुबह वो कुट्टीपुरम रेलवे स्टेशन के पास पाया गया।

पूछताछ के दौरान पता चला कि देबोजीत रॉय तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से केरल के कोझिकोड आया था। चेन्नई में उसका भाई रहता है। उसके भाई ने पुलिस को बताया कि देबोजीत रॉय चेन्नई से लापता हो गया था। एक वरिष्ठ पुलिसकर्मी ने कहा कि वह व्यक्ति कुछ साल पहले अपना गृह राज्य छोड़कर केरल पहुँच गया था।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि युवक काफी समय से लापता था। उसके भाई ने बताया कि देबोजीत रॉय उसका ही भाई है, जो कुछ साल से लापता था। उसके भाई ने उसे मानसिक रूप से बीमार भी बताया। इस पूरे घटनाक्रम के बाद उसके भाई को पुलिस ने मलप्पुरम बुलाया है और युवक को आगे की जाँच के लिए कोझिकोड मानसिक अस्पताल में भर्ती कराया है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

अखिलेश सरकार में हुए 62+ हत्याओं को याद करा रहा ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ पोस्टर: मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर...

मुजफ्फरनगर दंगों की बरसी पर उत्तर प्रदेश के कई शहरों में ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’ लिखे पोस्टर लगा गए हैं। इन पोस्टर्स ने 2013 की उस भयावह हिंसा की याद फिर ताजा कर दी है।

हैशटैग लगाओ, दुनिया बदलो… कितना आसान है न? क्या सोशल मीडिया लोकतंत्र को बर्बाद कर रहा है?

लोकतंत्र इंसान की कमियों को स्वीकार कर समझौतों से चलता है। लेकिन सोशल मीडिया का अनियंत्रित दौर हर छोटी कमी को भ्रष्टाचार बताकर लोकतंत्र की बुनियाद पर चोट कर रहा है। कैसे आज का सोशल मीडिया और डिजिटल यूटोपियनवाद हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।
- विज्ञापन -