Friday, June 14, 2024
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महादेव ऐप: दुबई से ऑपरेशन, अधिकांश यूजर छत्तीसगढ़ के, लेनदेन के लिए बेनामी खाते, जीरो टैक्स… CM भूपेश बघेल से ऐसे जुड़ा नाम

सौरभ चंद्राकर छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला है। वह भिलाई में ही 'जूस फैक्ट्री’ नाम से जूस की एक दुकान चलाता था। उसके पिता का नाम रामेश्वर चंद्राकर है, नगर निगम में पानी के पंप के ऑपरेटर हैं। बीतते समय के साथ उसकी दोस्ती दोस्ती रवि उप्पल नाम के शख्स हो गई। रवि एक इंजीनियर था। दोनों ने दिमाग चलाया और साल 2017 में एक ऑनलाइन सट्टेबाजी के लिए वेबसाइट शुरू की।

लगभग 5,000 करोड़ रुपए के महादेव बेटिंग ऐप घोटाले में बॉलीवुड के कई सितारों एवं अपराधियों के बाद अब छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का नाम भी सामने आया है। केंद्रीय जाँच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कहा है कि महादेव ऐप के प्रमोटरों ने भूपेश बघेल को 508 करोड़ रुपए दिए हैं। इन पैसों का इस्तेमाल विधानसभा चुनावों के दौरान प्रचार में किया जाना था।

इस घोटाले से जुड़े कैश कूरियर असीम दास ने सीएम भूपेश बघेल का नाम लिया है। दास के पास के पास से 5.39 करोड़ रुपए बरामद हुए थे। बताते चलें कि इस मामले में ED ने 4 आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही 450 करोड़ रुपए भी जब्त कर चुकी है। इसके अलावा, 14 आरोपी के खिलाफ प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दर्ज की है। अब भूपेश बघेल का नाम सामने आया है।

ED ने कहा, “महादेव ऐप के कुछ बेनामी बैंक खातों का पता लगाया है, जिसमें 15.59 करोड़ रुपए की शेष राशि फ्रीज कर दी गई है। असीम दास को गिरफ्तार कर लिया है। उससे पूछताछ और उसके पास से बरामद फोन की फोरेंसिक जाँच से शुभम सोनी (महादेव नेटवर्क के उच्च पदस्थ आरोपितों में से एक) द्वारा भेजे गए एक ईमेल में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पूर्व में नियमित भुगतान किए गए हैं और अब तक महादेव ऐप द्वारा लगभग 508 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है।”

रिपब्लिक भारत के एक स्टिंग ऑपरेशन में महादेव बेटिंग ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर के राजनेताओं से जुड़ा एक बयान सामने आया है। स्टिंग ऑपरेशन के वीडियो में सामने आया है कि सौरभ चंद्राकर का प्रमुख सहयोगी सौरभ शुक्ला सौरभ कहता दिख रहा है कि चंद्राकर इस पूरी सरकार को खरीद सकते है। शुक्ला कहता है कि चंद्राकर ही इस छत्तीसगढ़ सरकार को चला रहा है।

पैसे को लेकर सौरभ शुक्ला कहता, “चुनावों के लिए पैसा निजी जेट या हेलीकॉप्टर के जरिए आएगा, क्योंकि पैसे के लेनदेन के लिए वे अब हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। पैसे के लेनदेन के लिए एयर एम्बुलेंस का भी उपयोग किया गया है। ये सब प्रवर्तन निदेशालय (ED) के छापे के चलते हुआ है।”

वहीं, महादेव ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर के चाचा दिलीप ने खुलासा किया, “अवैध काम चलाने के लिए अपने साथ पुलिस और राजनेताओं की जरूरत होती है। हर कोई इसमें शामिल है। सभी ने चुनाव और आगामी चुनावों के दौरान भी पैसे की माँग की है। गिरफ्तार किए गए सभी लोगों को चुनाव के समय तक छोड़ दिया जाएगा।” हालाँकि, बघेल ने इन सारे आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

बॉलीवुड हस्तियों से भी पूछताछ

फरवरी 2023 में UAE के रास अल खैमाह शहर में एक आलीशान शादी हुई थी। इसमें कई मेहमानों को चार्टर्ड प्लेन से लाया गया था। शादी में शामिल होने के लिए सनी लियोनी, नेहा कक्कड़, आतिफ असलम, टाइगर श्रॉफ जैसे दर्जनों सेलिब्रिटी बुलाए गए। शादी में करीब 200 करोड़ रुपए खर्च हुए और पूरा भुगतान नकद में या हवाला के जरिए किया गया। इसमें योगेश बापट की इवेंट मैनेजमेंट कंपनी आर-1 इवेंट्स प्राइवेट लिमिटेड को हायर किया गया था।

ये शादी छ्त्तीसगढ़ के भिलाई के रहने वाले 28 साल के सौरभ चंद्राकर की थी। शादी में बड़े पैमाने पर खर्च और बॉलीवुड के बड़े-बड़े स्टार्स के शामिल होने के बाद जाँच एजेंसियों के कान खड़े हो गए। एजेंसियों ने जाँच की पता चला कि यह महादेव बेटिंग ऐप संचालित करता है।

इसके बाद पुलिस ने कपिल शर्मा, रणबीर कपूर, सनी लियोनी सहित 14 बॉलीवुड स्टार्स को समन भेजा गया। बिग बॉस ओटीटी-2 की मनीषा रानी सहित लगभग 50 सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर भी पार्टी में शामिल हुए थे। ये भी अब एजेंसियों के निशाने पर हैं।

कौन है सौरभ चंद्राकर

सौरभ चंद्राकर छत्तीसगढ़ के भिलाई का रहने वाला है। वह भिलाई में ही ‘जूस फैक्ट्री’ नाम से जूस की एक दुकान चलाता था। उसके पिता का नाम रामेश्वर चंद्राकर है, नगर निगम में पानी के पंप के ऑपरेटर हैं। बीतते समय के साथ उसकी दोस्ती दोस्ती रवि उप्पल नाम के शख्स हो गई। रवि एक इंजीनियर था। दोनों ने दिमाग चलाया और साल 2017 में एक ऑनलाइन सट्टेबाजी के लिए वेबसाइट शुरू की।

शुरुआत में वेबसाइट पर यूजर बेहद कम थे। इसलिए कमाई के अवसर भी बेहद सीमित थे। सौरभ जूस की कमाई से अपना परिवार चलाता रहा और रवि प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता रहा। साल 2019 में सौरभ नौकरी के लिए दुबई चला गया। वहाँ उसने रवि को भी बुला लिया। वहाँ पहुँचकर दोनों ने इस सट्टेबाजी कंपनी पर फोकस करना शुरू कर दिया और पैसा कमाने पर पूरा ध्यान लगाना शुरू कर दिया।

कैसे खड़ा किया हजारों करोड़ रुपए का एम्पायर

सट्टेबाजी वाली बेसाइट के बाद दोनों ने महादेव बुक ऑनलाइन नाम से एक ऐप भी बनाया। इस ऐप को उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रमोट करना शुरू कर दिया। उसने इसे प्रमोट करने के लिए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के जरिए भी इसे प्रमोट करवाया। आमदनी बढ़ी तो दोनों ने दूसरी सट्टेबाजी ऐप को भी खरीद लिया। दोनों ने अपने सट्टेबाजी के कारोबार को बढ़ाना शुरू कर दिया।

कोरोना काल में लॉकडाउन के कारण इस बिजनेस में उछाल आया। साल 2020 में कोरोना के दौरान इस ऐप से भारी संख्या में यूजर्स जुड़े। सिर्फ तीन महीने में इस ऐप से 12 लाख लोग जुड़ गए। इस ऐप ने अपनी वेबसाइट पर दावा किया कि उसके पास लगभग एक करोड़ यूजर्स हैं। बॉलीवुड ऐक्टर रणबीर कपूर ने इसका विज्ञापन भी किया। इस तरह इस ऐप के प्रमोटर्स ने इसके जरिए 5,000 करोड़ रुपए से अधिक की कमाई की है।

ED के अनुसार, महादेव ऑनलाइन ऐप पोकर और अन्य कार्ड गेम, चांस गेम, क्रिकेट, बैडमिंटन, टेनिस, फुटबॉल, ‘तीन पत्ती’, पोकर, ‘ड्रैगन टाइगर’, वर्चुअल क्रिकेट गेम सहित विभिन्न प्रकार के लाइव गेम में अवैध सट्टेबाजी के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने लगा। यहाँ तक ​​कि भारत में होने वाले विभिन्न चुनावों पर भी उस ऐप के जरिए सट्टेबाजी होने लगी।

पुलिस का कहना है कि महादेव ऐप का हेडक्वाटर संयुक्त अरब अमीरात में स्थित है, लेकिन देश में 30 से ज्यादा केंद्रों से इसे ऑपरेट किया जा रहा था। इस बेटिंग ऐप को फ्रेंचाइजी के जरिए चलाया जाता था, जिसमें लाभ का अनुपात 70:30 रखा गया था। इसके बाद लाभ के हवाला के जरिए UAE भेज दिया जाता था।

कैसे काम करता था महादेव ऐप

महादेव ऐप भले ही दुबई से ऑपरेट होता था, लेकिन इसके अधिकांश यूजर छत्तीसगढ़ के थे। लोग ऐड के साथ-साथ एजेंटों के जरिए सट्टेबाजी के इस जाल में फँसते थे। इसके बाद वे दिए गए या बताए गए नंबर वे संपर्क करते थे। इस ऐप की खास बात यह थी कि यूजर दिए गए नंबर पर सिर्फ ह्वाट्सएप के जरिए ही संपर्क कर सकते थे। संपर्क करने के बाद उन्हें एक प्राइवेट ग्रुप में जोड़ा जाता था, जहाँ सट्टेबाजी का खेल शुरू होता था।

प्राइवेट ग्रुप में जोड़ने के बाद यूजर को कंपनी से संबंधित 5-6 वेबसाइटों पर अपना अकाउंट बनाना पड़ता था। इसके बाद यूजर को एक कॉन्टैक्ट नंबर दिया जाता था। इस नंबर के जरिए यूजर अपने अकाउंट में पैसे जमा करते थे। इससे उन्हें प्वॉइंट मिलते थे। इन प्वॉइंट के आधार पर ऐप पर विभिन्न खेलों में सट्टेबाजी की जाती थी।

शुरुआत में यूजर को खूब जिताया जाता था। इससे उसमें उत्साह जगता था और वह और अधिक पैसे जमा करके प्वॉइंट्स बटोर कर सट्टेबाजी करता था। हालाँकि, बाद में वह अपना सारा पैसा हार जाता था। इससे कंपनी को फायदा होता था। जो यूजर शुरुआत में जीतने के बाद अपने प्वॉइंट को एनकैश कराना चाहता था, उसे एक और नंबर दिया जाता था। उससे संपर्क करने पर उसे भुगतान हो जाता था। ये सारे लेनदेन बेनामी खाते से होते थे।

ED ने अपनी जाँच में पाया कि सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल सट्टेबाजी से होने वाली कमाई को अपने विदेशी खातों में भेजने के लिए हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल करते थे। महादेव ऐप के हवाला का सारा काम कोलकाता का रहने वाला विकास छपरिया देखता था। जब ED ने दबाव जारी रखा तो सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के परिवार के ज्यादातर लोग दुबई में शिफ्ट हो गए। हालाँकि,

इस तरह वे दुबई में बैठकर भारत से कमाई करते थे, लेकिन भारत सरकार को किसी तरह का टैक्स नहीं देते थे। भारत सरकार ही नहीं, बल्कि यूजर्स को भी हजारों करोड़ रुपए का चूना इस ऐप के जरिए लगाया गया और इससे कमाई को फिल्म इंडस्ट्री, होटल व्यापार, रियल एस्टेट सहित विभिन्न जगहों पर इन्वेस्ट करने के साथ-साथ हवाला के जरिए नौकरशाहों और सफेदपोशों को भी भुगतान की गई।

भारतीय एजेंसियों की कार्रवाई

फरवरी 2020 में आयकर विभाग ने छत्तीसगढ़ में कई नौकरशाहों और राजनेताओं के घर छापा मारा। उस दौरान पहली बार महादेव ऐप के बारे में आम लोगों को भी जानकारी हुई। इसके बाद दुबई में होने वाले सौरभ की हाई प्रोफाइल पार्टियों और बॉलीवुड हस्तियों से उसके रिश्तों ने एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू की।

अगस्त 2023 में ED ने छत्तीसगढ़ पुलिस के ASI चंद्रभूषण वर्मा, सतीश चंद्राकर को गिरफ्तार कर लिया। ये दोनों हवाला ऑपरेटर हैं। इन दोनों को व्यवसायी अनिल दम्मानी और सुनील दम्मानी ने हवाला के जरिए विदेश से पैसा भेजा था। बाद में दोनों व्यवसायियों के महादेव बुक से कनेक्शन सामने आने के बाद उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया है। अब असीम दास को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा, 100 से अधिक लोग ED के रडार पर हैं।

क्या भारत में प्रतिबंधित है सट्टेबाजी

अब सवाल उठता है कि भारत में सट्टेबाजी वैध है या अवैध। इसको समझने के लिए मार्च 2020 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए एक फैसले से देखा जा सकता है। सर्वोच्च न्यायालय ने ऑनलाइन सट्टेबाजी को दो भागों में बाँटा था। पहले पार्ट में उन खेलों को रखा था, जिन्हें कौशल के आधार पर खेला जाता है। इन्हें गेम ऑफ स्किल कहा गया। इनमें अपनी जानकारी एवं बुद्धिमता के हिसाब पैसे दाँव पर लगाए जाते हैं।

दूसरा है गेम ऑफ चांस। यानी जो ऑनलाइन गेम भाग्य के आधार पर जीते जाते हैं और इनमें किसी खास बुद्धिमता या जानकारी की जरूरत नहीं होती उन्हें इस कैटेगरी में रखा गया है। इनमें कौशल वाले ऑनलाइन गेम भारत में वैध हैं, जबकि चांस के आधार पर खेले जाने वाले गेम अवैध हैं। महादेव ऐप इसी दूसरी कैटेगरी में आता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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