Monday, June 17, 2024
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पूरी दुनिया में सनातन धर्म की ज्योति फैलाना ‘आर्ष विद्या समाजम’ का लक्ष्य, ‘लव जिहाद’ पीड़िताओं की मदद: ‘The Kerala Story’ वाली पीड़िता का भी बना सहारा

KR मनोज आत्रेय, क्रिया योग और तंत्र - इन तीन परंपराओं में भी दक्ष हैं। मात्र 4 वर्ष की उम्र से उन्होंने इनकी प्रैक्टिस शुरू कर दी थी। 'आर्ष विद्या समाजम' से जुड़ी 5 अन्य संस्थाओं की भी उन्होंने स्थापना की है - शिवशक्ति योगविद्या केन्द्रम, मनीषा सांस्कारिक वेदी, विज्ञानभारती विद्या केन्द्रम, बौद्धिकम बुक्स और साधना शक्ति केन्द्रम।

फिल्म ‘The Kerala Story’ देश भर में सुर्खियाँ बटोर रही है। वास्तविक घटनाओं पर आधारित इस फिल्म में 3 ऐसी लड़कियों की कहानी है, ‘लव जिहाद’ में फँस कर जिनका जीवन तबाह हो जाता है। इन लड़कियों का इस्लामी धर्मांतरण करा कर उनकी तस्करी की जाती है, फिर ISIS स्लेव बना दिया जाता है। हालाँकि, कुछ ऐसी भी संस्थाएँ हैं जो ऐसी पीड़ित लड़कियों की मदद करती हैं। उन्हीं में से एक ‘आर्ष विद्या समाजम’ भी है।

यहाँ हम इसी संस्था के बारे में जानेंगे, जो ‘लव जिहाद’ से पीड़ित लड़कियों को उनकी जड़ों तक लौटाने, समाज में उन्हें सम्मान दिलाने और मानसिक रूप से उन्हें मजबूत करने की दिशा में कई वर्षों से काम कर रहा है। ये एक शैक्षणिक संस्थान है, जो पंच-कर्तव्य (अध्ययन, अनुष्ठान, प्रचारण, अध्यापन और सनातन धर्म का संरक्षण) का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इस संस्थान का जन्म ही ऋग्वेद के मंत्र ‘कृण्वन्तो विश्‍वमार्यम्’ की प्रेरणा से हुआ था, जिसका अर्थ है – संसार के सभी मनुष्यों को श्रेष्ठ कर्मों वाला बनाइए।

‘आर्ष विद्या समाजम’ की स्थापना का उद्देश्य और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में योगदान

संस्था का मानना है कि एक ईश्वरीय प्रेरणा से उसका जन्म हुआ और पूरे विश्व को सनातन धर्म की शिक्षा देकर उन्हें अच्छा बनाने का आदेश मिला। संस्था गुरु परंपरा पर विश्वास रखती है। ‘आर्ष विद्या समाजम’ का मानना है कि दुनिया में आजकल जितनी भी बुराइयाँ फ़ैल रही हैं, उसका मुख्य कारण है युवाओं में धर्म के प्रति जागरूकता का अभाव। संस्था का लक्ष्य है कि दुनिया में एक व्यक्ति भी ऐसा न हो, जिसने ‘सनातन धर्म’ का नाम न सुना हो।

‘आर्ष विद्या समाजम’ मुख्य रूप से 4 मुख्य कोर्स की शिक्षा देती है – आध्यात्मिक शास्त्रम, आर्ष योग विद्या, भारतीय संस्कृति और विद्यार्थी नैपुण्य वर्ग। साथ ही ये विभिन्न धर्मों की तुलना करते हुए उनके बीच का अंतर भी लोगों को बताता है। अब जानते हैं कि इस संस्था की स्थापना किसने की थी। योगाचार्य KR मनोज ने सन् 1999 में इसकी नींव रखी थी। सद्गुरु शंकर गुरुदेव से उन्हें इसकी प्रेरणा मिली थी। वो सनातन धर्म, योग विद्या और तंत्र विद्या में दक्ष हैं।

KR मनोज आत्रेय, क्रिया योग और तंत्र – इन तीन परंपराओं में भी दक्ष हैं। मात्र 4 वर्ष की उम्र से उन्होंने इनकी प्रैक्टिस शुरू कर दी थी। ‘आर्ष विद्या समाजम’ से जुड़ी 5 अन्य संस्थाओं की भी उन्होंने स्थापना की है – शिवशक्ति योगविद्या केन्द्रम, मनीषा सांस्कारिक वेदी, विज्ञानभारती विद्या केन्द्रम, बौद्धिकम बुक्स और साधना शक्ति केन्द्रम। महावतार बाबाजी के क्रिया योग को भी उन्होंने सीखा है। महावतार बाबाजी की ही गुरु परंपरा में ‘योगदा आश्रम’ भी चलता है, जो कि एक अलग संस्था है।

केआर मनोज इन सबके अलावा नीलकेश्वरानंद परमहंस के भी भक्त हैं। परमहंस योगानंद द्वारा स्थापित राँची स्थित योगदा आश्रम से भी उन्होंने शिक्षा प्राप्त की है। इसके अलावा भी कई आध्यात्मिक केंद्रों से उन्होंने अपने जीवन के शुरुआती दिनों में शिक्षा प्राप्त की। उनकी संस्था ‘शिवशक्ति योगविद्या केन्द्रम’ वैज्ञानिक आधार पर योग की शिक्षा देती है, जो ‘नाथ संप्रदाय’ पर आधारित है। वहीं ‘मनीषा सांसारिक वेदी’ ने भारत के इतिहास और संस्कृति के अलावा विरासत के बारे में शिक्षा देती है, आक्रमणों के बारे में और स्वतंत्रता संग्राम के बारे में भी बताती है।

संस्कृत, वास्तु शास्त्र, ज्योतिष इत्यादि के बारे में भी यहाँ पढ़ाया जाता है। वहीं ‘बौद्धिकम बुक्स एन्ड पब्लिकेशंस’ के जरिए ‘अध्ययन से क्रांति’ का लक्ष रखा गया है। इसके द्वारा सनातन धर्म से जुड़ी पुस्तकों का प्रकाशन किया जाता है। ये किताबें डिजिटल फॉर्मेट में भी उपलब्ध हैं। पॉडकास्ट्स, वीडियो ब्लॉग्स और पत्रिकाएँ भी प्रकाशित की जाती हैं। वहीं ‘साधना शक्ति केन्द्रम’ के जरिए मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए विभिन्न प्रकार की साधनाओं को सिखाया जाता है।

‘आर्ष विद्या समाजम’ की वेबसाइट पर बताया गया है कि संस्था किन चीजों में विश्वास रखती है और क्या करती है। इसके मुख्य कंटेंट्स अंग्रेजी और मलयालम भाषा में होते हैं। इसमें सनातन धर्म के बारे में भी अच्छे से समझाया गया है, इससे जुड़े शब्दों को परिभाषित किया गया है। आप वेबसाइट पर जाकर उन 30 सवालों और उनके जवाबों को पढ़ सकते हैं, जिससे आपको सनातन धर्म के बारे में विस्तृत रूप से जानने को मिलेगा।

‘लव जिहाद’ पीड़िता ने श्रुति ने बताया कैसे ‘आर्ष विद्या समाजम’ ने की उसकी मदद

पीड़ित लड़कियों ने ‘PGurus’ के वीडियो में बताया था कि कैसे ‘आर्ष विद्या समाजम’ ने उसकी मदद की। वैशाली, अनघ और श्रुति ने इस दौरान अपने साथ हुई क्रूरता के बारे में भी बताया था। श्रुति ने बताया कि जब उन्होंने इस्लाम अपनाया, तब उनके परिवार वालों के लिए ये हैरानी भरा फैसला था और वो इसे बर्दाश्त नहीं कर पा रहे थी, उनकी स्थिति दयनीय हो गई थी। हालाँकि, अब उन्होंने घर-वापसी कर ली है, लेकिन उनके पिता को फिर भी भरोसा नहीं हो रहा था कि उन्होंने इस्लाम को मानना छोड़ा है या नहीं।

इस दौरान योगाचार्य मनोज ने उनके पिता और परिवार के अन्य सदस्यों को ये भरोसा दिलाया कि श्रुति हिन्दू धर्म में वापस आ चुकी हैं। गुरु ने परिवार को बताया कि श्रुति को उसके किए का पछतावा है और वो अपनी तरह की अन्य पीड़ित लड़कियों की भी मदद कर रही है, उन्हें अँधेरे से निकालने में, उन्हें हिन्दू धर्म में वापस लाने में। योगाचार्य मनोज ने परिवार को आश्वस्त किया कि वो अब चिंता न करें, वो सिर उठा कर चलें क्योंकि उनकी बेटी अच्छा कार्य कर रही है।

इसके बाद उनके परिवार का श्रुति में भरोसा कायम हुआ। उन्होंने अपने अनुभव को लेकर पुस्तक लिखा, जूनियर लड़कियों को इस बारे में जागरूक किया और वीडियो के जरिए भी अपने अनुभव साझा किया। उनके इन प्रयासों में ‘आर्ष विद्या समाजम’ ने उनकी मदद की। इसके बाद उनके पिता को लोगों के फोन कॉल आने लगे, श्रुति की प्रशंसा में। योगाचार्य मनोज से मिलने से पहले तो श्रुति ने सनातन धर्म का नाम तक नहीं सुना था।

श्रुति का कहना है कि इसीलिए योगाचार्य KR मनोज ने सनातन धर्म को लेकर एक कोर्स बनाया, जिसमें बेसिक से लेकर इसके बारे में बताया जाता है। श्रुति का कहना है कि धर्मांतरण का एक बड़ा कारण है कि हमें अपने धर्म और संस्कृति के बारे में नहीं पता है, इसी दिशा में ‘आर्ष विद्या समाजम’ प्रयास कर रहा है। उन्होंने बताया कि ‘आर्ष विद्या समाजम’ में कई ‘लव जिहाद’ पीड़िताएँ रह रही हैं। श्रुति के बारे में बता दें कि उनका ब्रेनवॉश भी उनकी मुस्लिम साथियों ने ही किया था।

वह कॉलेज पढ़ने के लिए गई थी। लेकिन वहाँ मुस्लिम साथियों ने उसका ब्रेन वॉश कर धर्म परिवर्तन करवा दिया। फिर वह रहमत के नाम से जानी जाने लगी। केरल के कासरगोड की रहने वाली श्रुति का कहना है कि फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ के ट्रेलर में जो कुछ दिखाया गया है, वह सही है। उनके साथी हिन्दू धर्म को लेकर उनके अल्पज्ञान का फायदा उठा कर इस्लाम के बारे में अच्छी-अच्छी बातें करते थे और हिन्दू धर्म को लेकर निशाना साधने वाली बातें करते थे।

आप ‘आर्ष विद्या समाजम’ के यूट्यूब चैनल पर भी जाकर उनके वीडियोज देख सकते हैं, जिसमें इस्लाम की धारणाओं को तथ्यों के साथ काटा गया है। फिल्मों से होने वाले प्रोपेगंडा का भी इसमें जवाब दिया गया है। हिजाब को लेकर भी संस्था ने तथ्यों के साथ अपनी बात रखी थी। संस्था ने हलाल मांस पर भी प्रतिबंध की माँग की थी। केरल में ‘मुस्लिम लीग’ के नेता किस तरह घृणा फैलाते हैं और कुरान से प्रेरित होकर ऐसी बातें करते हैं, इस बारे में भी संस्था ने बताया था।

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अनुपम कुमार सिंह
अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
भारत की सनातन परंपरा के पुनर्जागरण के अभियान में 'गिलहरी योगदान' दे रहा एक छोटा सा सिपाही, जिसे भारतीय इतिहास, संस्कृति, राजनीति और सिनेमा की समझ है। पढ़ाई कम्प्यूटर साइंस से हुई, लेकिन यात्रा मीडिया की चल रही है। अपने लेखों के जरिए समसामयिक विषयों के विश्लेषण के साथ-साथ वो चीजें आपके समक्ष लाने का प्रयास करता हूँ, जिन पर मुख्यधारा की मीडिया का एक बड़ा वर्ग पर्दा डालने की कोशिश में लगा रहता है।

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