मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर सुरक्षा से जुड़े सवालों के घेरे में आ गया है। इस बार मामला किसी आतंकी की गिरफ्तारी या हथियारों की बरामदगी का नहीं बल्कि देश की सबसे अहम पहचान व्यवस्था यानी आधार पंजीकरण से जुड़ा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, BSNL के आंतरिक दस्तावेजों में दावा किया गया था कि नवंबर 2023 में UIDAI ने मध्य प्रदेश में क्लोन आधार मशीनों के इस्तेमाल को लेकर चेतावनी जारी की थी। इन दस्तावेजों में कहा गया कि कुछ संदिग्ध मशीनों के जरिए आधार पंजीकरण की प्रक्रिया चलाई जा रही थी और इनके माध्यम से आतंकियों से जुड़े लोगों के आधार कार्ड बनवाने की कोशिश की जा रही थी।

इसके बाद 6 दिसंबर 2023 को BSNL मध्य प्रदेश सर्किल ने अपने सभी संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा। पत्र में M/s रॉयल कम्युनिकेशन नाम के वेंडर का जिक्र करते हुए 79 आधार पंजीकरण किट को तत्काल डी-रजिस्टर करने का निर्देश दिया गया।
इन मशीनों का संबंध भोपाल, महाराष्ट्र (मालेगाँव), उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, विदिशा, सागर, जबलपुर, ग्वालियर, बालाघाट, मंडला, सतना, शहडोल, छिंदवाड़ा, शिवपुरी समेत कई अन्य जिलों से बताया गया। हालाँकि दस्तावेजों में कहीं यह पुष्टि नहीं है कि इन मशीनों से वास्तव में कितने फर्जी आधार बने या किसी आतंकी ने उनका इस्तेमाल किया।
क्लोन आधार मशीन क्या होती है और इस मामले में क्या कार्रवाई हुई?
आधार पंजीकरण केवल UIDAI से अधिकृत मशीनों और ऑपरेटरों के जरिए किया जाता है। यदि किसी मशीन का अनधिकृत या पैरेलल तरीके से इस्तेमाल हो, तो उसे आम तौर पर क्लोन मशीन कहा जाता है। ऐसी स्थिति में पहचान संबंधी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
इसी आशंका को देखते हुए UIDAI ने BSNL को सतर्क किया था। इसके बाद BSNL ने संबंधित मशीनों को डी-रजिस्टर किया और बाद में सभी मशीनों को स्थैतिक IP के साथ दोबारा पंजीकृत करने की प्रक्रिया अपनाई, ताकि भविष्य में दुरुपयोग की संभावना कम हो सके।
BSNL मध्य प्रदेश के मुख्य महाप्रबंधक मिथिलेश कुमार ने NDTV से कहा कि निगम ने अपनी जिम्मेदारी के तहत सभी एहतियाती कदम उठाए हैं। मशीनों को निष्क्रिय किया गया और UIDAI के निर्देशों के अनुसार दोबारा पंजीकरण किया गया।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आपराधिक जाँच करना BSNL के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। वहीं, फरवरी 2026 के एक अन्य पत्र में यह चर्चा सामने आई कि संबंधित वेंडर को ब्लैकलिस्ट करने का अधिकार किस स्तर पर है। इससे यह संकेत मिलता है कि प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ती रही, जबकि जाँच से जुड़े कई सवाल अब भी खुले हैं।
भोपाल का सुरक्षा रिकॉर्ड क्यों चर्चा में है?
इस मामले की चर्चा इसलिए भी ज्यादा हो रही है क्योंकि पिछले कुछ सालों में भोपाल का नाम कई आतंकी मॉड्यूल की जाँच में सामने आया है। साल 2022 में ऐशबाग इलाके से जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) के संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई थी।
इसके बाद हिज्ब-उत-तहरीर, PFI, ISIS और अन्य कट्टरपंथी संगठनों से जुड़े मामलों में भी जाँच एजेंसियों ने कार्रवाई की। हाल ही में मोहम्मद फराज की गिरफ्तारी के बाद भी सुरक्षा एजेंसियाँ सक्रिय हुईं।
मोहम्मद फराज के मामले में जाँच एजेंसियाँ ऑनलाइन कट्टरपंथ और पाकिस्तान स्थित आकाओं से जुड़े एंगल की भी जाँच कर रही हैं। इसी वजह से भोपाल एक बार फिर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी चर्चाओं के केंद्र में आ गया।
आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, भोपाल केंद्रीय जेल में सिमी (SIMI), पीएफआई (PFI), हिज्ब-उत-तहरीर (HuT), आईएसआईएस (ISIS), जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (JMB) और सूफा (SUFA) जैसे संगठनों से जुड़े कुल 71 आतंकी संदिग्ध न्यायिक प्रक्रिया के तहत बंद हैं। इसी वजह से भोपाल का नाम लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी वाले शहरों में शामिल रहा है।
इसी पृष्ठभूमि में क्लोन आधार मशीनों से जुड़ी चेतावनी को गंभीर माना जा रहा है। हालाँकि मध्य प्रदेश ATS के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मीडिया से कहा कि उनके पास ऐसी कोई सूचना नहीं थी कि मध्य प्रदेश के BSNL आधार केंद्रों से आतंकियों के आधार कार्ड बनाए गए हों।
अधिकारी के अनुसार 2022 में पकड़े गए JMB मॉड्यूल के सदस्यों ने पश्चिम बंगाल या असम के दस्तावेजों के आधार पर पहचान पत्र बनवाए थे। यानी इस मामले में अभी तक किसी आतंकी के आधार कार्ड बनने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
किस-किस तरीके से फर्जी आधार कार्ड बनाए जाने के मामले आए सामने?
फर्जी आधार कार्ड बनने के मामले कई तरह के होते हैं। यह समझना जरूरी है कि आधार का पूरा केंद्रीय डेटाबेस (CIDR) हैक होने के प्रमाण नहीं हैं, लेकिन जाँच एजेंसियों ने अलग-अलग मामलों में आधार पंजीकरण प्रक्रिया, ऑपरेटर ID, बायोमेट्रिक और फर्जी दस्तावेजों के दुरुपयोग के तरीके सामने रखे हैं।
क्लोन आधार मशीनों का इस्तेमाल
इस मामले में सबसे बड़ा आरोप यही है। जाँच दस्तावेजों के अनुसार, अधिकृत आधार एनरोलमेंट किट की तरह काम करने वाली क्लोन मशीनों का इस्तेमाल समानांतर आधार पंजीकरण के लिए किया जा रहा था। ऐसी मशीनों के जरिए अधिकृत सिस्टम की तरह डेटा दर्ज करने की कोशिश की जाती है।
ऑपरेटर ID और पासवर्ड का गलत इस्तेमाल
कई मामलों में अधिकृत आधार ऑपरेटर की यूजर आईडी और पासवर्ड का गलत इस्तेमाल सामने आया है। जाँच एजेंसियों के अनुसार, किसी अधिकृत ऑपरेटर की लॉग-इन जानकारी का उपयोग कर अनधिकृत व्यक्ति आधार पंजीकरण या अपडेट का काम करता था।
फर्जी बायोमेट्रिक
कुछ मामलों में सिलिकॉन या अन्य तकनीक से उंगलियों के निशान की नकली कॉपी तैयार कर बायोमेट्रिक सत्यापन को धोखा देने की कोशिश की गई। इससे बिना असली ऑपरेटर की मौजूदगी के सिस्टम में लॉग-इन करने के आरोप सामने आए हैं।
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आधार बनवाना
जाँच एजेंसियों ने कई मामलों में पाया कि नकली राशन कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र, वोटर आईडी या अन्य पहचान पत्रों के आधार पर आधार पंजीकरण कराने की कोशिश की गई।
आधार अपडेट प्रक्रिया का दुरुपयोग
कुछ मामलों में पहले से बने आधार कार्ड में नाम, पता, मोबाइल नंबर या अन्य जानकारी बदलने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। इससे किसी व्यक्ति की पहचान बदलने का प्रयास किया गया।
अनधिकृत आधार सेवा केंद्र
देश के कई राज्यों में ऐसे केंद्र पकड़े गए, जहाँ बिना वैध अनुमति के आधार पंजीकरण या अपडेट का काम किया जा रहा था। इन केंद्रों पर अधिकृत मशीनों या ऑपरेटरों के क्रेडेंशियल का गलत इस्तेमाल किया गया।
दूसरे राज्यों की मशीनों का इस्तेमाल
कुछ जाँचों में सामने आया कि एक राज्य के लिए अधिकृत आधार पंजीकरण किट या ऑपरेटर आईडी का उपयोग दूसरे राज्य में किया जा रहा था। इससे निगरानी व्यवस्था को प्रभावित करने की आशंका जताई गई।
वेंडर नेटवर्क के जरिए गड़बड़ी
कुछ मामलों में जाँच एजेंसियों ने आधार पंजीकरण का काम करने वाले वेंडरों और उनसे जुड़े ऑपरेटरों की भूमिका की भी जाँच की। आरोप रहे हैं कि अधिकृत व्यवस्था के बाहर समानांतर तरीके से पंजीकरण कराने की कोशिश की गई।
फर्जी नाम और पहचान से पंजीकरण
कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति के लिए अलग-अलग पहचान या अलग दस्तावेजों के आधार पर आधार बनवाने की कोशिश की गई। ऐसे मामलों में दस्तावेजों की सत्यापन प्रक्रिया जाँच का विषय बनी।
पहचान बदलकर नए दस्तावेज तैयार करना
कुछ आतंकी और अपराध से जुड़े मामलों की जाँच में यह सामने आया कि पहले फर्जी पहचान से आधार या अन्य पहचान पत्र बनवाए गए, फिर उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाता, सिम कार्ड या पासपोर्ट जैसे अन्य दस्तावेज तैयार किए गए। हालाँकि हर मामले में यह तरीका अपनाया गया हो, ऐसा नहीं है, यह अलग-अलग जाँचों में सामने आए पैटर्न हैं।
इन मामलों में क्या समानता रही?
जाँच एजेंसियों के सामने आए अधिकांश मामलों में केंद्रीय आधार डेटाबेस को हैक करने की बात नहीं, बल्कि आधार पंजीकरण की प्रक्रिया का दुरुपयोग, फर्जी दस्तावेज, ऑपरेटर ID, बायोमेट्रिक और अनधिकृत मशीनों के इस्तेमाल जैसे तरीके सामने आए हैं। इसलिए ऐसे मामलों में तकनीकी सुरक्षा के साथ-साथ दस्तावेजों और ऑपरेटर स्तर पर निगरानी भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
पुराने फर्जी पासपोर्ट केस
भोपाल में पहचान संबंधी दस्तावेजों का यह पहला चर्चित मामला नहीं है। इससे पहले फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट जारी होने का मामला भी सामने आ चुका है। उस मामले में तत्कालीन पासपोर्ट अधिकारियों, एक क्लर्क और एजेंट को अदालत ने दोषी ठहराया था।
आरोप था कि फर्जी राशन कार्ड, अंकसूची और अन्य दस्तावेजों के आधार पर पासपोर्ट जारी किया गया। बाद में उस पासपोर्ट का इस्तेमाल कर आरोपित देश से बाहर गया और जाँच एजेंसियों के अनुसार पाकिस्तान पहुँचकर ISI के संपर्क में आया। इस मामले में अदालत फैसला भी सुना चुकी है।
क्लोन आधार मशीनों के मौजूदा मामले में भी कई सवालों के जवाब अभी सामने आने बाकी हैं। जैसे क्या इन मशीनों से किसी तरह का फर्जी आधार पंजीकरण हुआ? यदि हुआ तो उसकी संख्या कितनी थी? संबंधित ऑपरेटरों और वेंडर की जाँच किस स्तर तक पहुँची? क्या किसी जाँच एजेंसी को औपचारिक सूचना दी गई थी? फिलहाल उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं कि मशीनों को बंद किया गया और तकनीकी स्तर पर सुधारात्मक कदम उठाए गए।
मध्य प्रदेश जैसी गंभीर चूक अन्य राज्यों में भी?
उत्तर प्रदेश (रायबरेली), अक्टूबर 2025: रायबरेली में पुलिस ने फर्जी आधार रैकेट का भंडाफोड़ किया। जाँच के अनुसार, आरोपितों ने अधिकृत आधार ऑपरेटर की ID और पासवर्ड का गलत इस्तेमाल कर आधार कार्ड, जन्म प्रमाणपत्र और अन्य पहचान दस्तावेज तैयार किए। मौके से लैपटॉप, बायोमेट्रिक उपकरण और बड़ी संख्या में आधार पंजीकरण से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए।
मध्य प्रदेश (बालाघाट), नवंबर 2025: बालाघाट पुलिस ने एक ऐसे नेटवर्क का खुलासा किया था, जिसमें आरोपित पर फर्जी बायोमेट्रिक क्लोन बनाकर अधिकृत आधार ऑपरेटरों की पहचान का इस्तेमाल करने का आरोप लगा।
पुलिस के अनुसार, आरोपित ने कई आधार सेवा केंद्रों के टेंडर अपने परिचितों के नाम पर हासिल किए और बाद में उन्हीं मशीनों तथा ऑपरेटर लॉग-इन का उपयोग कर आधार अपडेट का काम करता रहा। जाँच में फिंगरप्रिंट की क्लोन कॉपी बनाकर सिस्टम में लॉग-इन करने की बात भी सामने आई।
उत्तर प्रदेश (बहराइच), नवंबर 2025: उत्तर प्रदेश STF ने एक ऐसे मास्टरमाइंड को गिरफ्तार किया, जिस पर फर्जी आधार कार्ड बनाने वाले नेटवर्क को चलाने का आरोप था। STF के अनुसार, आरोपित आधार एनरोलमेंट टूल और यूजर ID के जरिए हजारों फर्जी आधार कार्ड तैयार करने तथा दूसरे लोगों को भी ऐसी व्यवस्था उपलब्ध कराने के आरोप में जाँच के दायरे में आया।
महाराष्ट्र (मालेगाँव), नवंबर 2025: नासिक ग्रामीण पुलिस ने मालेगाँव में एक अनधिकृत आधार केंद्र पर छापा मारकर तीन लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, यह केंद्र दूसरे राज्य के अधिकृत ऑपरेटर के लॉग-इन क्रेडेंशियल का इस्तेमाल कर संचालित किया जा रहा था। मामले में आधार अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई।


