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किसान आंदोलन के वीडियो ‘इंदिरा ठोक दी’ मोदी को भी… का विरोध पड़ा भारी: नौकरी से निकाले गए वाइस प्रिंसिपल

इस वीडियो पर टिप्पणी करते हुए विजयपाल ने चेतावनी दी कि इस तरह हत्या की सार्वजनिक धमकी देना सही नहीं है। लेकिन उनकी इस टिप्पणी की बिलकुल विपरीत प्रतिक्रिया आई। तमाम उपद्रवी और स्थानीय तत्व उन्हें प्रताड़ित करने लगे और उन्हें धमकी भरे कॉल्स आने लगे।

उत्तर प्रदेश में एक व्यक्ति को अपने फेसबुक कमेंट (टिप्पणी) की वजह से नौकरी से हाथ धोना पड़ा। विजयपाल सिंह कजरी निरंजनपुर स्थित निजी स्कूल अकाल एकेडमी में बतौर उपप्रधानाचार्य (वाईस प्रिंसिपल) कार्यरत थे। किसान आंदोलन से संबंधित एक वायरल वीडियो पर टिप्पणी करने के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। 

समाचार समूह ‘यूपी तक’ से बात करते हुए विजयपाल सिंह ने पूरी घटना की विस्तार से जानकारी दी। उनके द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक़ 30 नवंबर को उन्होंने एक वीडियो देखा जिसमें ऐसा कहा गया था कि जो हाल इंदिरा गाँधी का हुआ था वही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भी होगा। इस वीडियो पर टिप्पणी करते हुए विजयपाल ने चेतावनी दी कि इस तरह हत्या की सार्वजनिक धमकी देना सही नहीं है। लेकिन उनकी इस टिप्पणी की बिलकुल विपरीत प्रतिक्रिया आई। तमाम उपद्रवी और स्थानीय तत्व उन्हें प्रताड़ित करने लगे और उन्हें धमकी भरे कॉल्स आने लगे। 

विजयपाल पूरणपुर के रहने वाले हैं और इस स्कूल के विभिन्न पदों पर काम कर चुके हैं। उनका कहना है कि समुदाय विशेष के लोग इस स्कूल को संचालित करते हैं। उनका आरोप है कि हिन्दू होने की वजह से उन्हें इस तरह प्रताड़ित किया गया। समुदाय विशेष के लोग उन्हें स्कूल लेकर गए और वहाँ उनसे जबरन माफ़ी मँगवाई। वहाँ मौजूद कई लोगों ने इस घटना का वीडियो भी बनाया और इसे सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। इसके बाद उन्होंने विजयपाल सिंह का फोन छीन कर माफ़ी वाला पोस्ट लिखा और विजयपाल के एकाउंट से ही साझा कर दिया। 

कई घंटों तक बनाए रखा बंधक और बनाया इस्तीफ़ा देने का दबाव 

मामला माफ़ी माँगने पर ही नहीं रुका, उन्हें घंटों तक बंधक बना कर रखा गया और उन पर अत्याचार भी किया गया। इसके बाद उनसे इस्तीफ़ा भी लिखवाया गया। विजयपाल ने बताया कि इसके बाद उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय नंबर से धमकी भरे कॉल आने शुरू हो गए। उन्होंने पूरी बात का ज़िक्र करते हुए कहा, “मैं बहुत ज्यादा डरा हुआ हूँ, कहीं मुझे अपना घर न छोड़ना पड़ जाए। मैंने पिछले 18 सालों में पूरी मेहनत और ईमानदारी के साथ काम किया है। मैं खुद को इस समुदाय (सिख) का हिस्सा मानता हूँ।” उन्होंने स्कूल में तब भी काम किया था जब महामारी के दौरान वेतन तक नहीं मिल रहा था। यह नौकरी छूट जाने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती रोज़ी रोटी की है। 

मेरी जान को ख़तरा है: विजयपाल सिंह 

उन्होंने कहा, “मैं इस बात से डरा हुआ हूँ कि कहीं मेरे साथ कोई अप्रिय घटना न हो जाए। मैंने उनके धर्म को अपने धर्म से कभी अलग नहीं समझा। मैं उनके धर्म के लिए समर्पित रहा और बदले में मुझे यह मिला। मुझे अपनी ज़िंदगी को लेकर भय सता रहा है अगर मुझे कुछ हो गया तो मेरे बच्चों का गुज़ारा कैसे होगा? मेरी एक बेटी है जो अपनी किशोरावस्था में है और मेरी माँ को डायबटीज़ की परेशानी है।

जब से मुझे धमकी भरे कॉल आना शुरू हुए हैं तब से न तो मैं कुछ खा पा रहा हूँ और न ही मेरी माँ। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि मैं कैसे जियूँ? क्या हिन्दू होना अपराध है? वह अक्सर इस बात की ओर इशारा करते हैं कि मैं अलग समुदाय से आता हूँ।” 

इस घटना की जानकारी देते हुए विजयपाल फूट-फूट कर रो रहे थे। उनका कहना है कि यह सिलसिला जारी रहा तो उनके पास आत्महत्या के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचेगा। विजयपाल के मुताबिक़ उन्हें दोषी ठहराया जा रहा है जबकि इंदिरा गाँधी की हत्या की बात कोई और कर रहा है। इसके लिए अधिक से अधिक उन्हें निकाले जाने की जगह पर निलंबित भी किया जा सकता था।

फ़िलहाल पुलिस ने इस मामले में जाँच शुरू कर दी है। पूरणपुर के सीओ प्रदीप कुमार का कहना है कि पीड़ित की शिकायत के आधार पर इस घटना के संबंध में मामला दर्ज किया जा चुका है। पर्याप्त सबूत इकट्ठा होने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।       

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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