Homeदेश-समाजजेल में ही मनेगी मनीष सिसोदिया की होली: अदालत ने 2 दिनों के लिए...

जेल में ही मनेगी मनीष सिसोदिया की होली: अदालत ने 2 दिनों के लिए बढ़ाई पूर्व डिप्टी CM की रिमांड, CBI ने बताया – ‘खास दवा’ खोजने में ही बर्बाद हो गया एक दिन

27 फरवरी, 2023 को 5 दिनों के रिमांड पर भेजे गए मनीष सिसोदिया की रिमांड खत्म हो रही थी। ऐसे में उन्हें सीबीआई की विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया।

दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की सीबीआई रिमांड 2 दिनों के लिए बढ़ा दी गई है। सीबीआई की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि सिसोदिया जाँच में सहयोग नहीं कर रहे। सीबीआई ने कोर्ट से तीन दिनों की अतिरिक्त रिमांड माँगी थी। वहीं मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका पर कोर्ट 10 मार्च को फैसला सुनाएगा।

27 फरवरी, 2023 को 5 दिनों के रिमांड पर भेजे गए मनीष सिसोदिया की रिमांड खत्म हो रही थी। ऐसे में उन्हें सीबीआई की विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया। इस दौरान सीबीआई ने मनीष सिसोदिया की कस्टडी तीन दिन बढ़ाने की माँग की। सीबीआई का कहना है कि सिसोदिया जाँच में सहयोग नहीं कर रहे। सीबीआई के मुताबिक, सिसोदिया ने खास दवा की माँग की और इसमें एक दिन खराब हो गया।

सीबीआई ने कोर्ट में दलील दी कि अब दूसरे गवाहों के सामने सिसोदिया से पूछताछ करनी है। कुछ डिजिटल सबूत मिले हैं इस बारे में उनसे जानकारी प्राप्त करनी है। जजों ने सीबीआई से केस की डायरी माँगी। वहीं सिसोदिया के वकील दयान कृष्णन ने कहा कि सिसोदिया जाँच में सहयोग नहीं कर रहे इस आधार पर रिमाँड बढ़ाना उचित नहीं होगा। दोनों पक्षों के बीच बहस पूरा होने के बाद अदालत ने सिसोदिया की रिमाँड 2 दिन और बढ़ा दी।

शुक्रवार (03 मार्च, 2023) को पूर्व जिप्टी सीएम सिसोदिया ने निचली अदालत में जमानत याचिका दायर की थी। याचिका में सिसोदिया ने CBI की पूछताछ में सहयोग का हवाला देकर जमानत माँगी। सिसोदिया की तरफ से कहा गया कि पूछताछ के लिए जब भी उन्हें बुलाया जाएगा वे हाजिर हो जाएँगे। उन्होंने कहा कि उन्हें कस्टडी में रखने की कोई वजह नहीं है। इस जमानत याचिका पर कोर्ट 10 मार्च, 2023 को फैसला सुनाएगा।

बता दें कि शराब नीति घोटाला मामले में CBI ने 26 फरवरी को 8 घंटे की पूछताछ के बाद मनीष सिसोदिया को गिरफ्तार किया था। 28 फरवरी, 2023 की सुबह कॉन्ग्रेस नेता और वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने फौरन सुनवाई की माँग करते हुए सिसोदिया की गिरफ्तारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

कोर्ट ने सिंघवी की याचिका को स्वीकार कर लिया था। 28 फरवरी को सुनवाई के दौरान CJI जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने सिसोदिया को फटकार लगाते हुए पहले हाईकोर्ट जाने की सलाह दी थी।

delhi-manish-sisodia-custody-extended-for-2-days-cbi-court-decision-on-bail-on-march-10

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -