Saturday, July 2, 2022
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वाराणसी में ब्लास्ट करने वाले वलीउल्लाह को कानूनी मदद देगा जमीयत, मिली है फाँसी की सज़ा: अखिलेश यादव वापस लेना चाहते थे मुकदमा

उन्होंने कहा कि इसका एक बड़ा उदाहरण अक्षरधाम मंदिर हमले का है, जिसमें निचली अदालत ने मुफ्ती अब्दुल कय्यूम समेत तीन लोगों को फाँसी और चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा दी थी।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी आतंकी वलीउल्लाह की फाँसी की सजा के खिलाफ हाई कोर्ट जाएँगे। मदनी ने कहा कि उन्हें देश की उच्च अदालतों पर पूरा यकीन है। इसलिए वह निचली अदालत के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देंगे। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे कई मामले हैं, जिनमें निचली अदालतों ने सजाएँ दीं, मगर जब वे मामले उच्च न्यायालय में गए तो पूरा इंसाफ हुआ।

उन्होंने कहा कि इसका एक बड़ा उदाहरण अक्षरधाम मंदिर हमले का है, जिसमें निचली अदालत ने मुफ्ती अब्दुल कय्यूम समेत तीन लोगों को फाँसी और चार लोगों को आजीवन कारावास की सजा दी थी। लेकिन जमीयत की कानूनी सहायता से जब यह मुकदमा सुप्रीम कोर्ट में पहुँचा तो ये सारे लोग न केवल सम्मानपूर्वक बरी हुए, बल्कि निर्दोषों को आतंकवाद के आरोप में फँसाने पर अदालत ने गुजरात पुलिस को कड़ी फटकार भी लगाई थी।

मालूम हो कि गाजियाबाद की विशेष सेशन कोर्ट के जज जितेंद्र कुमार सिन्हा ने सोमवार (6 जून, 2022) को 2006 में वाराणसी के संकट मोचन मंदिर में हुए सीरियल बम विस्फोट के दोषी वलीउल्लाह को फाँसी की सजा सुनाई थी। वलीउल्लाह यूपी के फूलपुर का रहने वाला है। जमीयत उलमा-ए-हिंद पिछले 10 सालों से उसे कानूनी सहायता मुहैया करा रहा है।

अखिलेश ने वलीउल्लाह का मुकदमा वापस लेने का फैसला लिया था

गौरतलब है कि वाराणसी में 7 मार्च, 2006 को बम ब्लास्ट हुआ था। 2012 में बनी समाजवादी पार्टी की सरकार ने इस मामले के आरोपित ‘मुस्लिमों’ पर से केस हटाने के लिए कदम उठाए थे। इसके खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। कई जिलों की अदालतों में आरोपितों के खिलाफ मामले चल रहे थे। याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार के कदम से बम ब्लास्ट की साजिश रचने वालों को और प्रोत्साहन मिलेगा। इस मामले में बम स्टोर करके रखने वाले वहीदुल्लाह और शमीम को उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव रिहा करने की योजना बना रहे थे।

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सपा सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि सरकार कैसे ये निर्णय ले सकती है कि कौन आतंकवादी है और कौन नहीं। हाई कोर्ट ने कहा था कि ये निर्णय अदालत का है। उच्च-न्यायालय ने पूछा था कि क्या सरकार ऐसे कदम उठा कर आतंकवाद को बढ़ावा देना चाहती है। आज मामले वापस लिए जा रहे और कल उन्हें पद्मा भूषण दे दिया जाएगा!

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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