Saturday, November 28, 2020
Home देश-समाज 'राम की पूजा के कारण रेप': हिंदू घृणा से सनी महिला के आयुष मंत्रालय...

‘राम की पूजा के कारण रेप’: हिंदू घृणा से सनी महिला के आयुष मंत्रालय से जुड़े होने के दावे को मंत्री ने नकारा

निहारिका सिंह के फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पोस्टों से यह स्पष्ट हो जाता है कि वह एक कट्टरपंथी हिन्दूफोबिक है, जो उमर खालिद जैसे इस्लामवादियों की सहानुभूति रखती है। वहीं दूसरी ओर प्रेस स्वतंत्रता को दरकिनार करते हुए अर्णब की गिरफ्तारी पर जश्न मनाती है।

हिंदू घृणा से पोस्ट लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अक्सर ऐसे पोस्ट को लोग नजरअंदाज करना ज्यादा पसंद करते हैं। यदि कोई इनके खिलाफ आवाज उठाता है तो उसे चुप करा दिया जाता है।

निहारिका सिंह उर्फ मिशा ठाकुर का भी मामला हिन्दूफोबिया से जुड़ा है। निहारिका की फेसबुक प्रोफाइल के अनुसार, वह भारत सरकार के आयुष मंत्रालय में पब्लिक स्पीकर और मीडिया सलाहकार है। दीवाली के मौके पर निहारिका ने ट्विटर पर एक पोस्ट साझा कर दावा किया कि भगवान राम ‘कायर’, ‘पितृसत्तावादी’ और ‘स्त्री द्वेषी’ थे।

उसने लिखा, “दीवाली एक ऐसा त्योहार है जब महिलाओं को यह याद दिलाना चाहिए कि सीता को राम से तलाक लेना चाहिए था, जब उन्होंने ‘अग्नि परीक्षा’ करके उन्हें पवित्रता साबित करने के लिए कहा। यह ठीक नहीं है कि कोई पुरुष किसी भी महिला से खुद को शुद्ध साबित करने के लिए जलने के लिए कहे।”

फेसबुक से लिया गया स्क्रीनशॉट

अग्निपरीक्षा या उस युग की सांस्कृतिक बारीकियों के पीछे के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को ठीक से समझे बिना मनगढंत कहानी को जारी रखते हुए उसने कहा, “यह सेक्स और नैतिकता संबंधित नहीं हैं और यदि यह है तो दोनों पक्षों को यह साबित करने की आवश्यकता है कि वे दूसरे से क्या पूछ रहे हैं। राम एक डरपोक व्यक्ति था, एक पितृसत्तावादी और स्त्रियों से घृणा करने वाला। सीता ने अपने हक की लड़ाई नहीं लड़ी और उनकी शर्तें मानती चली गईं। इसका लेखक एक पुरुष था। ऐसे देवी और देवता, इनकी अवहेलना करनी चाहिए, न की पूजा। दीवाली पीरियड की शुभकामनाएँ।”

आयुष मंत्रालय की इस मीडिया सलाहकार को आपत्तिजनक पोस्ट को लेकर सोशल मीडिया पर जमकर लताड़ लगी है। इसके बाद भी उसने खुशी जताते हुए फेसबुक पोस्ट की रीच बढ़ाने के लिए ‘बेरोजगार भक्तों’ का धन्यवाद दिया। निहारिका ने लिखा, “Woohoo, लगता है कि आप लोग मेरी आज्ञा का पालन कर रहे हैं, यहाँ मैं दोहराना चाहती हूँ: ओवरटाइम काम करो भक्तों, वैसे भी तुम बेरोजगार हो… मेरी पोस्ट पर सभी लोग टिप्पणी कर रहे हैं, इसकी पहुँच बढ़ाने के लिए अग्रिम धन्यवाद। मैं वास्तव में इस संदेश को अधिकतम लोगों तक पहुँचाना चाहती हूँ। ”

आलोचनाओं का जवाब देते हुए निहारिका सिंह ने लिखा, “भारत में 89 महिलाओं के साथ रोज बलात्कार और उत्पीड़न होता है, क्योंकि हम स्त्री से घृणा करने वाले जैसे कि राम की पूजा करते हैं। भौंकते रहो। मुझे राइट विंग को नीचा दिखाने के लिए राइट विंग से ही अग्रीमेंट मिला है।”

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के साथ काम करने वाली निहारिका सिंह का हिन्दू घृणा से भरा यह कोई पहला पोस्ट नहीं है। सिंह ने 23 अक्टूबर को एक पोस्ट शेयर किया था। जिसमें उसने ‘मार्क्सवादी’ ने बीआर अंबेडकर और हिंदू-विरोधी पेरियार के उदाहरणों का हवाला देते हुए, मनुस्मृति को फिर से जलाने की माँग की थी।

ट्विटर स्क्रीनशॉट

हाथरस मामले में भी उसने एक फर्जी खबर को हवा दी थी। जहाँ पीड़िता को कथित तौर पर संदीप नाम के युवक ने गला घोंट कर मार दिया था और बलात्कार किया था। उसने ट्वीट किया था, “हिन्दू राष्ट्र बलात्कारी है।” जबकि वह इसके बजाय आरोपित का नाम ले सकती थी, निहारिका ने जान-बूझकर हिन्दू घृणा से भरे संदेश को प्रचारित करने के लिए हिन्दू राष्ट्र शब्द का भी इस्तेमाल किया।

ट्विटर स्क्रीनशॉट

इसके अलावा सिंह ने भारत में वाम-उदारवादी इकोसिस्टम में फासीवाद और हिंदू आबादी के खिलाफ मुस्लिमों द्वारा किए अपराधों पर पर्दा डालने का काम भी किया है।

इंस्टाग्राम पर 17 अक्टूबर को किए गए एक पोस्ट में उसने अमेरिकी उपन्यासकार फिलिप रोथ को कोट करते हुए हिंदुओं पर जमकर हमला किया। एक तरफ उसने हिंदुत्ववादियों की आलोचना की वहीं देश के प्रति प्रेम का ढोंग भी रचा। उसने पोस्ट में दिल्ली दंगा साजिशकर्ता और कट्टरपंथी इस्लामी उमर खालिद की रिहाई की माँग करते हुए गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम को निरस्त करने की माँग की।

इंस्टाग्राम स्क्रीनशॉट

आयुष मंत्रालय की मीडिया सलाहकार भाजपा की मुखर आलोचक रही हैं। भाजपा सरकार को फासीवादी बताने के लिए वह अक्सर फर्जी समाचारों और वामपंथी प्रोपेगेंडा का सहारा लेती है। 22 अक्टूबर को साझा किए गए एक ट्विटर पोस्ट में उसने ’पत्रकार’ और फर्जी खबरों का प्रचार-प्रसार करने वाली रोहिणी सिंह का हवाला दिया कि मोदी सरकार वोट के लिए घातक कोरोनावायरस के वैक्सीन का इस्तेमाल कर रही हैं। उसने कहा, “वोट के बदले वैक्सीन? और कितना गिरोगे?”

ट्विटर स्क्रीनशॉट

निहारिका सिंह ने 19 जून को एक फेसबुक पोस्ट में भारत सरकार का विरोध करते हुए नजर आई थी। उन्होंने लिखा, ”मोदी मेरी समझ से बाहर हैं। 20 सैनिकों की मौत के बाद गलवान घाटी क्षेत्र में चीन की तरफ से कोई घुसपैठ न होने की बात कितनी बेशर्मी से कही गई है? चीन ने इस भाषण के बाद आधिकारिक रूप से गलवान घाटी में घुसने का दावा किया। कायर, बेदिमाग, बिका हुआ।” उसने आगे दावा किया,”भाजपा और उसका अस्तित्व इस देश और उसके भविष्य के लिए एक झूठ है।”

वहीं उसके फेसबुक पोस्ट से यह भी स्पष्ट हो जाता है कि वह ’इतिहासकार’ रामचंद्र गुहा की कट्टर प्रशंसक हैं। गुहा के एक बयान का जिसमें कहा गया था कि मोदी सरकार द्वारा अर्थव्यवस्था, नैतिक ताने-बाने, सामाजिक जीवन और संस्थानों को होने वाले नुकसान से उबरने के लिए भारत एक अपरिभाषित समय लेगा, सिंह ने इसे कोट करते हुए लिखा, “रिप डेमोक्रेसी।” इस पोस्ट ने असल में नेटिज़न्स को आश्चर्यचकित कर दिया है कि क्यों वह अभी भी अपनी कल्पना में अत्याचारी और फासीवादी सरकार के साथ काम करती है, क्योंकि नहीं वह इसे छोड़ देती है।

इन सब के अलावा निहारिका अर्णब की गिरफ्तारी पर भी बेहद खुश नजर आई थी, जब उन्हें 2 साल पुराने एक बंद मामले में गिरफ्तार किया गया था।

उल्लेखनीय है कि निहारिका सिंह के फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पोस्टों से यह स्पष्ट हो जाता है कि वह एक कट्टरपंथी हिन्दूफोबिक है, जो उमर खालिद जैसे इस्लामवादियों की सहानुभूति रखती है। वहीं दूसरी ओर प्रेस स्वतंत्रता को दरकिनार करते हुए अर्णब की गिरफ्तारी पर जश्न मनाती है।

सोशल मीडिया यूज़र्स अब केंद्र सरकार के हाई-प्रोफाइल मंत्रालयों में काम करने वाले व्यक्तियों की ’पृष्ठभूमि जाँच’ में लापरवाही पर सवाल उठा रहे हैं।निहारिका कोई अकेली ऐसी शख्स नहीं हैं। इससे पहले दूरदर्शन से जुड़ी ईरा त्रिवेदी नामक एक योग विशेषज्ञ ने हिंदू भावनाओं को ठोस पहुँचाते हुए गौमाँस को खाने की बात कहीं थी। सोशल मीडिया पर मामले के तूल पकड़ते उसे चैनल ने निकाल दिया था।

अपडेट: बता दें कि इस लेख के प्रकाशित होने के बाद केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री श्रीपद नाइक ने ट्वीट कर निहारिका के मंत्रालय का मीडिया सलाहकार होने के दावे को खारिज कर दिया है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “इस तरह की कोई कंसल्टेंट आयुष मंत्रालय में नहीं है।”

हालाँकि मंत्री ने यह नहीं बताया है कि फेसबुक प्रोफाइल में खुद के आयुष मंत्रालय से जुड़े होने का दावा करने को लेकर कोई कार्रवाई की गई है या नहीं।

गौरतलब है कि निहारिका सिंह के एक फेसबुक पोस्ट के अनुसार, उन्हें आयुष मंत्रालय द्वारा 2019 में आयोजित योग महोत्सव में बोलने की अनुमति दी गई थी। इतना ही नहीं उसने कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए एक तस्वीर भी पोस्ट की थी।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

कोरोना संक्रमण पर लगातार चेताते रहे, लेकिन दिल्ली सरकार ने कदम नहीं उठाए: सुप्रीम कोर्ट से केंद्र

दिल्ली में कोरोना क्यों बना काल? सुप्रीम कोर्ट को केंद्र सरकार ने बताया है कि रोकथाम के लिए केजरीवाल सरकार ने प्रभावी कदम नहीं उठाए।

क्या घुसपैठ करने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को RAW में बहाल करने जा रही है भारत सरकार?

एक वायरल मैसेज में दावा किया जा रहा है कि सरकार रोहिंग्या मुसलमानों को रॉ में बहाल करने जा रही है। जानिए, क्या है इस दावे की सच्चाई?

‘नॉटी, दो टके के लोग’: कंगना पर फट पड़ीं मुंबई की मेयर, ऑफिस तोड़ने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगाई थी फटकार

मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर ने कंगना रनौत के लिए 'नॉटी' का इस्तेमाल किया है। शिवसेना सांसद संजय राउत के लिए इस शब्द का अर्थ 'हरामखोर' है।

जहाँ ममता बनर्जी ने खोदी थी वामपंथ की कब्र, वहीं उनकी सियासत को दफनाने की तैयारी में शुभेंदु अधिकारी

सिंगूर और नंदीग्राम के आंदोलन से ममता बनर्जी को सत्ता मिली। अब नंदीग्राम के शुभेंदु अधिकारी के बागी तेवरों ने उन्हें मुश्किल में डाल दिया है।

कॉन्ग्रेस का कोढ़ है धर्मांतरण, रोकने को देर से बने कानून कितने दुरुस्त?

जिस विषय में संविधान निर्माताओं को 1949 से पता था, उस पर कानून बनाने में इतनी देर आखिर क्यों? नियम बनने शुरू भी हुए हैं तो क्या ये काफी हैं, या हमें बहुत देर से और बहुत थोड़ा देकर बहलाया जा रहा है?

FIR में अर्णब पर लगाए आरोप साबित नहीं कर पाई मुंबई पुलिस: SC ने बॉम्बे हाई कोर्ट को भी लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए यह भी कहा कि आपराधिक कानून, उत्पीड़न का औजार नहीं बनना चाहिए, जमानत मानवता की अभिव्यक्ति है।

प्रचलित ख़बरें

‘उसे मत मारो, वही तो सबूत है’: हिंदुओं संजय गोविलकर का एहसान मानो वरना 26/11 तुम्हारे सिर डाला जाता

जब कसाब ने तुकाराम को गोलियों से छलनी कर दिया तो साथी पुलिसकर्मी आवेश में आ गए। वे कसाब को मार गिराना चाहते थे। लेकिन, इंस्पेक्टर गोविलकर ने ऐसा नहीं करने की सलाह दी। यदि गोविलकर ने उस दिन ऐसा नहीं किया होता तो दुनिया कसाब को समीर चौधरी के नाम से जानती।

फैक्टचेक: क्या आरफा खानम घंटे भर में फोटो वाली बकरी मार कर खा गई?

आरफा के पाँच बज कर दस मिनट वाले ट्वीट के साथ एक ट्वीट छः बज कर दस मिनट का था, जिसके स्क्रीनशॉट को कई लोगों ने एक दूसरे को व्हाट्सएप्प पर भेजना शुरु किया। किसी ने यह लिखा कि देखो जिस बकरी को सीने से चिपका कर फोटो खिंचा रही थी, घंटे भर में उसे मार कर खा गई।

हाथ में कलावा, समीर चौधरी नाम की ID: ‘हिंदू आतंकी’ की तरह मरना था कसाब को – पूर्व कमिश्नर ने खोला राज

"सभी 10 हमलावरों के पास फर्जी हिंदू नाम वाले आईकार्ड थे। कसाब को जिंदा रखना पहली प्राथमिकता थी। क्योंकि वो 26/11 मुंबई हमले का सबसे बड़ा और एकलौता सबूत था। उसे मारने के लिए ISI, लश्कर-ए-तैयबा और दाऊद इब्राहिम गैंग ने..."

‘कबीर असली अल्लाह, रामपाल अंतिम पैगंबर और मुस्लिम असल इस्लाम से अनजान’: फॉलोवरों के अजीब दावों से पटा सोशल मीडिया

साल 2006 में रामपाल के भक्तों और पुलिसकर्मियों के बीच हिंसक झड़प हुई थी जिसमें 5 महिलाओं और 1 बच्चे की मृत्यु हुई थी और लगभग 200 लोग घायल हुए थे। इसके बाद नवंबर 2014 में उसे गिरफ्तार किया गया था।

जहाँ बहाया था खून, वहीं की मिट्टी पर सर रगड़ बोला भारत माता की जय: मुर्दों को देख कसाब को आई थी उल्टी

पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया सुबह साढ़े चार बजे कसाब से कहते हैं कि वो अपना माथा ज़मीन से लगाए... और उसने ऐसा ही किया। इसके बाद जब कसाब खड़ा हुआ तो मारिया ने कहा, “भारत माता की जय बोल” कसाब ने फिर ऐसा ही किया। मारिया दोबारा भारत माता की जय बोलने के लिए कहते हैं तो...

मैं नपुंसक नहीं.. हिंदुत्व का मतलब पूजा-पाठ या मंदिर का घंटा बजाना नहीं, फ़ोर्स किया तो हाथ धोकर पीछे पड़ जाऊँगा: उद्धव ठाकरे

साक्षत्कार में उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्हें विरोधियों के पीछे पड़ने को मजबूर ना किया जाए। इसके साथ ही ठाकरे ने कहा कि हिंदुत्व का मतलब मंदिर का घंटा बजाना नहीं है।

कोरोना संक्रमण पर लगातार चेताते रहे, लेकिन दिल्ली सरकार ने कदम नहीं उठाए: सुप्रीम कोर्ट से केंद्र

दिल्ली में कोरोना क्यों बना काल? सुप्रीम कोर्ट को केंद्र सरकार ने बताया है कि रोकथाम के लिए केजरीवाल सरकार ने प्रभावी कदम नहीं उठाए।

क्या घुसपैठ करने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को RAW में बहाल करने जा रही है भारत सरकार?

एक वायरल मैसेज में दावा किया जा रहा है कि सरकार रोहिंग्या मुसलमानों को रॉ में बहाल करने जा रही है। जानिए, क्या है इस दावे की सच्चाई?

‘नॉटी, दो टके के लोग’: कंगना पर फट पड़ीं मुंबई की मेयर, ऑफिस तोड़ने पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने लगाई थी फटकार

मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर ने कंगना रनौत के लिए 'नॉटी' का इस्तेमाल किया है। शिवसेना सांसद संजय राउत के लिए इस शब्द का अर्थ 'हरामखोर' है।

गाजीपुर में सड़क पर पड़े मिले गायों के कटे सिर: लोगों का आरोप- पहले डेयरी फार्म से गायब होती हैं गायें, फिर काट कर...

गाजीपुर की सड़कों पर गायों के कटे हुए सिर मिलने के बाद स्थानीय लोग काफी गुस्से में हैं। उन्होंने पुलिस पर मिलीभगत का आरोप लगाया है।

बंगाल: ममता के MLA मिहिर गोस्वामी बीजेपी में शामिल, शनिवार को शुभेंदु अधिकारी के आने की अटकलें

TMC के असंतुष्ट विधायक मिहिर गोस्वामी बीजेपी में शामिल हो गए हैं। शुभेंदु अधिकारी के भी शनिवार को बीजेपी में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही है।

जहाँ ममता बनर्जी ने खोदी थी वामपंथ की कब्र, वहीं उनकी सियासत को दफनाने की तैयारी में शुभेंदु अधिकारी

सिंगूर और नंदीग्राम के आंदोलन से ममता बनर्जी को सत्ता मिली। अब नंदीग्राम के शुभेंदु अधिकारी के बागी तेवरों ने उन्हें मुश्किल में डाल दिया है।

गरीब कल्याण रोजगार अभियान: प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने में UP की योगी सरकार सबसे आगे

प्रवासी श्रमिकों को काम मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार ने गरीब कल्याण रोजगार अभियान शुरू किया था। उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है।

12वीं शताब्दी में विष्णुवर्धन के शासनकाल में बनी महाकाली की मूर्ति को मिला पुन: आकार, पिछले हफ्ते की गई थी खंडित

मंदिर में जब प्रतिमा को तोड़ा गया तब हालात देखकर ये अंदाजा लगाया गया था कि उपद्रवी मंदिर में छिपे खजाने की तलाश में आए थे और उन्होंने कम सुरक्षा व्यवस्था देखते हुए मूर्ति तोड़ डाली।

कॉन्ग्रेस का कोढ़ है धर्मांतरण, रोकने को देर से बने कानून कितने दुरुस्त?

जिस विषय में संविधान निर्माताओं को 1949 से पता था, उस पर कानून बनाने में इतनी देर आखिर क्यों? नियम बनने शुरू भी हुए हैं तो क्या ये काफी हैं, या हमें बहुत देर से और बहुत थोड़ा देकर बहलाया जा रहा है?

FIR में अर्णब पर लगाए आरोप साबित नहीं कर पाई मुंबई पुलिस: SC ने बॉम्बे हाई कोर्ट को भी लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए यह भी कहा कि आपराधिक कानून, उत्पीड़न का औजार नहीं बनना चाहिए, जमानत मानवता की अभिव्यक्ति है।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,440FollowersFollow
358,000SubscribersSubscribe