Saturday, April 20, 2024
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हिंदू लड़कियों को भोजन में मांस, जबरन क्रॉस बाँध बाइबल पढ़ने को मजबूर: ‘कोलकाता की पिशाच’ वाली संस्था पर FIR

बाल कल्याण समिति की शिकायत के अनुसार, बाल गृह में रहने वाली लड़कियों को हिंदू होने के बावजूद मांसाहारी भोजन परोसा जाता था। एक हिंदू लड़की को ईसाई परिवार में शादी करने के लिए मजबूर किया गया था।

गुजरात में मदर टरेसा द्वारा स्थापित की गई एक ईसाई संस्था ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ के बाल गृह पर धर्म परिवर्तन का आरोप लगा है। गुजरात धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2003 की धारा 295 (ए) के तहत वडोदरा शहर स्थित इस बाल गृह पर हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने और लड़कियों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रलोभन देने का मामला दर्ज किया गया है। हालाँकि, संस्था ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिला सामाजिक सुरक्षा अधिकारी मयंक त्रिवेदी की शिकायत पर रविवार (12 दिसंबर 2021) को मकरपुरा थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। पिछले दिनों (9 दिसंबर) मयंक त्रिवेदी ने जिले की बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष के साथ मकरपुरा क्षेत्र में ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ द्वारा संचालित लड़कियों के बाल गृह का दौरा किया था।

शिकायत में कहा गया है कि अपने दौरे के दौरान त्रिवेदी ने पाया कि बाल गृह में लड़कियों को ईसाई धार्मिक पुस्तकों को पढ़ने और ईसाई धर्म की प्रार्थनाओं में भाग लेने के लिए मजबूर किया जा रहा था। शिकायत में बताया गया:

“10 फरवरी 2021 से 9 दिसंबर 2021 के बीच संस्था हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए धर्म परिवर्तन जैसी गतिविधियों में शामिल रही है। गले में क्रॉस बाँधकर लड़कियों को ईसाई धर्म अपनाने का लालच दिया जा रहा है। लड़कियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले स्टोररूम की टेबल पर जबरन बाइबल रखकर उन्हें पढ़ने के लिए मजबूर किया जा रहा है।”

वहीं ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी‘ के मैनेजमेंट ने जबरन धर्मांतरण के आरोपों को गलत बताया है। ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ के एक प्रवक्ता ने कहा, “हम किसी भी प्रकार से धर्म परिवर्तन गतिविधि में शामिल नहीं हैं। हमारे बाल गृह में 24 लड़कियाँ हैं। ये लड़कियाँ हमारे साथ रहती हैं और वे हमारी ही तरह हर नियम का पालन करती हैं। हमने किसी का धर्म परिवर्तन नहीं किया है और न ही किसी को ईसाई धर्म में शादी करने के लिए मजबूर किया है।”

पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि बाल कल्याण समिति की शिकायत के अनुसार, संगठन ने एक हिंदू लड़की को ईसाई परिवार में शादी करने के लिए मजबूर किया था। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि बाल गृह में रहने वाली लड़कियों को हिंदू होने के बावजूद मांसाहारी भोजन परोसा जाता था।

सहायक पुलिस आयुक्त एसबी कुमावत ने कहा कि त्रिवेदी द्वारा लगाए गए आरोपों की एक समिति द्वारा जाँच करने के बाद जिला कलेक्टर ने संगठन के खिलाफ मामला दर्ज करने का निर्देश जारी किया था।

बता दें कि जिला कलेक्टर ने बाल कल्याण समिति की शिकायत के बाद एक समिति का गठन किया था। कुमावत के अनुसार, कई विभागों के सदस्यों की एक टीम ने इन आरोपों की जाँच की थी, जिसके बाद इस मामले में शिकायत दर्ज की गई थी। पुलिस आरोपों की जाँच करेगी और इससे जुड़े सबूत जुटाएगी, ताकि वह मामले की तह तक पहुँच सके।

कौन थी मदर टेरेसा

मदर टेरेसा वो थीं जिन्होंने नॉबेल पुरस्कार लेते वक्त 1979 में कहा था कि शांति के लिए सबसे बड़ा ख़तरा गर्भपात है। मदर टेरेसा वो थीं जिन्होंने 984 की भोपाल गैस त्रासदी के बाद यूनियन कार्बाइड का समर्थन किया था। मदर टेरेसा वो थीं, जिसके लिए लेखक क्रिस्टोफर हित्चेंस ने ‘मिशनरी पोजीशन’ नाम की किताब में उन्हें ‘घोउल ऑफ़ कोलकाता (कलकत्ता की पिशाच)’ लिखा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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