Homeदेश-समाज'जुबान काटने' की धमकी देने वाला राजस्थान का मुफ्ती नदीम 24 घंटों में जेल...

‘जुबान काटने’ की धमकी देने वाला राजस्थान का मुफ्ती नदीम 24 घंटों में जेल से छूटा, हिंदू बोले- ये तो उम्मीद थी

मुफ्ती नदीम अख्तर सकाफी के साथ मौलाना मोहम्मद आलम गौरी को भी बेल पर रिहा किया गया है। दोनों मौलानाओं को कोर्ट ने 2-2 लाख के निजी मुचलके और 1-1 लाख की जमानत पर रिहा करने का फैसला सुनाया।

उदयपुर में कन्हैया लाल की हत्या से पहले जिस मौलाना नदीम ने राजस्थान में भड़काऊ बयानबाजी की थी, उसे गिरफ्तारी के बाद सिर्फ 24 घंटों में जमानत मिलने की खबर है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि मुफ्ती नदीम अख्तर सकाफी के साथ मौलाना मोहम्मद आलम गौरी को भी बेल पर रिहा किया गया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, CJM कोर्ट ने दोनों मौलानाओं को 2-2 लाख के निजी मुचलके और 1-1 लाख की जमानत पर रिहा करने का फैसला सुनाया। इस फैसले के आते ही उन समर्थकों ने जश्न भी मनाया जो मुफ्ती के गिरफ्तार होने का विरोध कर रहे थे जबकि हिंदुओं ने इस खबर को साझा करते हुए कहा कि ये तो अनुमानित था कि मुफ्ती को बेल मिल जाएगी।

24 घंटे में मुफ्ती नदीम को मिली बेल

बता दें कि मुफ्ती नदीम की गिरफ्तारी 1 जुलाई को शुक्रवार के दिन हुई थी। नदीम के ऊपर आरोप था कि उसने नुपूर शर्मा केस में भड़काऊ बयानबाजी की। उसके वीडियो कन्हैया लाल की हत्या के बाद सोशल मीडिया पर खूब शेयर हुए थे। इसी के बाद राजस्थान पुलिस ने भड़काऊ बयान देने के 28 दिन बाद उसे गिरफ्तार किया था। लेकिन अब इस केस में पता चला है कि कोर्ट से उसे जमानत मिल गई है, जिसे सुन हिंदू पूछ रहे हैं कि क्या गहलोत सरकार ने इसका विरोध तक नहीं किया

मुफ्ती नदीम के जहरीले बोल

उल्लेखनीय है कि मुफ्ती नदीम ने पुलिस थाने के सामने राजस्थान पुलिस के सामने कहा था,

“अगर तुमने एक्शन नहीं लिया तो मुसलमान रिएक्शन देगा। ये कोई गुजारिश नहीं बल्कि चेतावनी है। पूरी दुनिया का मुसलमान उठेगा। ये न सिर्फ यहाँ का प्रशासन बल्कि पूरे देश की हुकूमत सुन ले। अगर उन्होंने (नूपुर शर्मा) ने जो बोला है, वो कानूनी तौर पर सही है तो हम ऐसे कानून के भी खिलाफ जाएँगे। इतिहास उठा कर देख लो कि जिस भी कौम के खिलाफ मुसलमानों ने रिएक्शन दिया है, उनके लिए जमीन छोटी पड़ गई है। वो जगह-जगह भागते फिरे और उनको जमीन का टुकड़ा भी नसीब नहीं हुआ।”

मुफ़्ती ने आगे कहा,

“हम अपने आका की शान में की गई गुस्ताखी का बदला लेना जानते हैं। मेरे नबी की शान में एक लफ्ज भी बोला तो याद रखो कि जुबान काट ली जाएगी। हाथ उठाओगे तो हाथ काट लिए जाएँगे। ऊँगली उठाओगे तो ऊँगली काट ली जाएगी। अगर निगाहें भी उठीं तो निकाल कर बाहर फेंक देंगे। उसके बाद चाहे हम पर लाठी बरसाना या हमें जेल भेज देना।”

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘यहाँ मस्जिद थी, है और रहेगी’: संभल दंगे की न्यायिक जाँच आयोग रिपोर्ट में सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का जिक्र 100+ बार, 199 साक्षियों...

संभल दंगों की न्यायिक जाँच आयोग की रिपोर्ट में सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का 100 बार से भी अधिक बार जिक्र। वो भी सबूतों के साथ।

100 नाराज़ ≠ 100 वोट: भारतीय राजनीति में सिर्फ़ ‘नाराज़गी’ का फ़ैक्टर कभी निर्णायक क्यों नहीं रहा

SC/ST Act, आरक्षण, Caste census, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की राजनीति जैसे मुद्दे निश्चित रूप से सवर्णों में असंतोष पैदा कर सकते हैं। इन प्रश्नों को खारिज करना भी राजनीतिक मूर्खता होगी।
- विज्ञापन -