Wednesday, July 28, 2021
Homeदेश-समाजसचिन वाजे ने NIA की पूछताछ में लिए शिवसेना नेताओं के नाम, खुद को...

सचिन वाजे ने NIA की पूछताछ में लिए शिवसेना नेताओं के नाम, खुद को बताया बड़े षड्यंत्र का छोटा सा हिस्सा: रिपोर्ट

सचिन वाजे ने कबूल कर लिया है कि वो मुकेश अंबानी को दी गई बम वाली धमकी षड्यंत्र का हिस्सा थे। लेकिन बताया कि वो सिर्फ इस पूरे प्रकरण का छोटा हिस्सा हैं। बड़े खिलाड़ी शिवसेना के वो नेता हैं, जिनका नाम...

भारत के सबसे अमीर उद्योगपति मुकेश अंबानी की दक्षिणी मुंबई के ताड़देव में स्थित बहुमंजिला आवास एंटीलिया के बाहर एक संदिग्ध स्कॉर्पियो खड़ी मिली थी और उसमें से बम बनाने के समान मिले थे। कार के मालिक मनसुख हिरेन कुछ ही दिनों बाद संदिग्ध अवस्था में मृत पाए गए।

NIA ने इस मामले में मुंबई पुलिस के अधिकारी व पूर्ण शिवसेना नेता सचिन वाजे को गिरफ्तार किया, जिसका शिवसेना नेताओं ने विरोध किया है। खबर आ रही है कि वाजे ने अपने जुर्म कबूल कर लिया है।

NIA ने जानकारी दी है कि सचिन वाजे को ‘कारमाइकल रोड में बम रखी हुई गाड़ी पार्क करने में भागीदारी’ वाले मामले में गिरफ्तार किया गया है। वाजे की SUV को जब्त कर लिया गया है और सबूत के लिए कार की तलाशी ली जा रही है।

‘ABP News’ की खबर के अनुसार, ताज़ा अपडेट ये है कि सचिन वाजे ने कबूल कर लिया है कि वो मुकेश अंबानी को दी गई बम वाली धमकी षड्यंत्र का हिस्सा थे। इसी खबर में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि वो इस पूरे षड्यंत्र का एक बहुत छोटा सा हिस्सा थे और बड़े खिलाड़ी शिवसेना के वो नेता हैं, जिनका उन्होंने नाम लिया है।

सचिन वाजे ने पूछताछ में कहा है कि वो तो सिर्फ इस पूरे प्रकरण का छोटा सा ऊपरी हिस्सा हैं। अब जब इस मामले में शिवसेना नेताओं के नाम सामने आए हैं तो पार्टी के प्रवक्ता संजय राउत ने सवाल उठाते हुए कहा है कि एक उद्योगपति के मामले की जाँच एक केंद्रीय एजेंसी क्यों कर रही है?

NIA हर एंगल से इस मामले की जाँच कर रही है, जो अभी भी जारी है। राउत ने कहा कि मुंबई पुलिस ने कई बड़े केस हल किए हैं और इस केस की भी जाँच हो रही थी, लेकिन अचानक NIA घुस आती है और ताबड़तोड़ कार्रवाई करती है।

संजय राउत ने दावा किया कि इससे मुंबई पुलिस का मनोबल गिरा है। सचिन वाजे की जो इनोवा गाड़ी तलाशी के लिए लाई गई है, कहा जा रहा है कि वो उस दिन उक्त स्कॉर्पियो से कुछ ही दूरी पर खड़ी थी।

भाजपा नेता राम कदम ने सच्चाई सामने लाने के लिए सचिन वाजे के नार्को टेस्ट की माँग की है। हाल ही में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी कहा था कि पुलिस अधिकारी के साथ ऐसा बर्ताव किया जा रहा है, मानो वह ओसामा बिन लादेन हो। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस ने चुटकी लेते हुए कहा कि वाजे को वकील की कोई आवश्यकता ही नहीं है क्योंकि उनकी वकालत खुद राज्य के सीएम ही कर रहे हैं।

सचीन वाजे के बारे में बता दें कि उन्हें एनकाउंटर स्पेशलिस्ट कहा जाता रहा है। कोल्हापुर के रहने वाले वाजे 1990 बैच के IPS अधिकारी हैं, जिन्होंने 1992-2004 के बीच 63 अपराधियों का एनकाउंटर किया।

बई के घाटकोपर ब्लास्ट से जुड़े मामले में ख्वाजा यूनुस की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी, जिसके बाद CID जाँच हुई और वाजे गिरफ्तार हुए। निलंबन के बाद वो शिवसेना में चले गए लेकिन 2020 में उन्हें शिवसेना की सरकार में फिर वर्दी मिल गई।

टेक्नोलॉजी पर अच्छी पकड़ के चलते उन्होंने साल 2010 में लाल बिहारी नाम की नेटवर्किंग साइट भी शुरू की थी। कहा जाता है कि तकनीक की अच्छी जानकारी रखने वाले वाजे ने कथित तौर पर सॉफ्टवेयर भी डेवलप किया है।

निलंबन के समय वो मीडिया में बतौर ‘विशेषज्ञ’ आते थे। कहा जाता है कि उस दौरान भी कुछ जाँच एजेंसियों ने उनका सहयोग लिया था। वाजे ने शीना बोरा हत्या मामले में और डेविड हेडली पर किताब भी लिखी है।

ख़बरों में यह भी बताया गया है कि एंटीलिया के बाहर खड़ी स्कॉर्पियो वही थी, जिसका इस्तेमाल अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी के दौरान सचिन वाजे ने किया था। ‘रिपब्लिक टीवी’ के संस्थापक को गिरफ्तार करने के लिए अलीबाग पुलिस गई थी। सचिन वाजे ने उन्हें गिरफ्तार किया था। ATS को अब वो CCTV फुटेज भी मिल गया है, जिसमें अर्णब गोस्वामी की गिरफ़्तारी से उसका कनेक्शन सामने आ रहा है। ये भी पता चला है कि उस गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर फेक है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘मोदी सिर्फ हिंदुओं की सुनते हैं, पाकिस्तान से लड़ते हैं’: दिल्ली HC में हर्ष मंदर के बाल गृह को लेकर NCPCR ने किए चौंकाने...

एनसीपीसीआर ने यह भी पाया कि बड़े लड़कों को भी विरोध स्थलों पर भेजा गया था। बच्चों को विरोध के लिए भेजना किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 83(2) का उल्लंघन है।

उत्तर-पूर्वी राज्यों में संघर्ष पुराना, आंतरिक सीमा विवाद सुलझाने में यहाँ अड़ी हैं पेंच: हिंसा रोकने के हों ठोस उपाय  

असम के मुख्यमंत्री नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस के सबसे महत्वपूर्ण नेता हैं। उनके और साथ ही अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों के लिए यह अवसर है कि दशकों से चल रहे आंतरिक सीमा विवाद का हल निकालने की दिशा में तेज़ी से कदम उठाएँ।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
111,660FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe