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तीन तलाक दे बना हिंदू, दूसरी शादी की; अब मोदी सरकार के कानून के तहत पहली बीवी माँग रही इंसाफ

मुस्लिम महिला के वकील ने मामले की जानकारी देते हुए कहा कि महिला को अपने रिश्तेदारों से ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून के बारे में पता चला। साथ ही, बताया कि इसके तहत तीन तलाक एक साथ कहने पर वह मान्य नहीं होता और यह एक अपराध है। इसलिए, महिला ने कानून के तहत भरण पोषण भत्ते की माँग की है।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में तीन तलाक का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। जहाँ एक तलाकशुदा मुस्लिम महिला अपने पूर्व पति के खिलाफ न्याय माँग रही है, जिसने अब हिन्दू धर्म अपना लिया है।

अमर उजाला की रिपोर्ट अनुसार, भारतीय रेलवे में काम करने वाले एक मुस्लिम व्यक्ति ने 2017 में तीन तलाक बोलकर अपनी पत्नी से रिश्ता तोड़ लिया था। 2004 में उसकी मुस्लिम महिला से शादी हुई थी, जिसके बाद उनके दो बेटे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, मुस्लिम पत्नी को तीन तलाक देने के बाद व्यक्ति ने हिंदू धर्म अपना कर एक हिंदू महिला से शादी कर ली और अब दोनों साथ रह रहे हैं।

हालाँकि, अब पूर्व पत्नी ने उसके खिलाफ ट्रिपल तलाक कानून (मुस्लिम महिला विवाह पर अधिकार संरक्षण विधेयक, 2019) के तहत अदालत से न्याय की गुहार लगाई है और उससे भरण पोषण भत्ते की माँग की है। भोपाल फैमिली कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश आरएन चंद के समक्ष सुनवाई के लिए यह मामला सामने आया है।

मुस्लिम महिला के वकील ने मामले की जानकारी देते हुए कहा कि महिला को अपने रिश्तेदारों से ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून के बारे में पता चला। साथ ही, बताया कि इसके तहत तीन तलाक एक साथ कहने पर वह मान्य नहीं होता और यह एक अपराध है। इसलिए, महिला ने कानून के तहत भरण पोषण भत्ते की माँग की है।

मुस्लिम से हिन्दू धर्म में परिवर्तित व्यक्ति की हिंदू पत्नी ने कथित तौर पर दावा किया है कि उसके पति के साथ उसकी शादी वैधानिक है। उसने कहा कि उसके पति ने पहली पत्नी को तलाक देकर हिन्दू धर्म में परिवर्तित होने के बाद उससे शादी की। उसने कहा कि ऐसे में उसकी पूर्व पत्नी का कोई हक नहीं बनता कि वह उसके पति के साथ रहे।

तीन तलाक कानून

सुप्रीम कोर्ट ने 2017 में तीन तलाक की प्रथा को गैर-कानूनी करार दिया था। जिसके बाद केंद्र सरकार ने 2019 में ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून बनाया। इस कानून के अनुसार तीन तलाक की प्रथा एक अपराध है और ऐसा करने वालों के खिलाफ 3 साल तक की सजा का प्रावधान है। महिला कानून के तहत अपने आश्रित बच्चों के लिए रखरखाव की हकदार है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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