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कहानी उस बेटी की जो NEET पेपर लीक की भोग रही ‘सजा’, बता रही खुद उसकी माँ

पेपर लीक ने दो साल पहले हुई NEET 2024 लीक की याद दिला दी। उस वक्त रिजल्ट और पेपर लीक की खबरों के बीच स्टूडेंट्स सड़कों पर उतरे थे। पेपर लीक का असर रिजल्ट पर दिख रहा था। परीक्षार्थियों में शामिल मेरी बेटी का सपना भी 'पेपर लीक' ने तोड़ दिया।

बचपन का सपना और दो साल की मेहनत के बाद वक्त आया NEET की परीक्षा देने का, एक बच्ची पूरी तैयारी के साथ परीक्षा देती है और सकारात्मक सोच के साथ इंतजार करती है रिजल्ट का। रिजल्ट आता है और साथ ही आता है ‘पेपर लीक’ होने की खबर। दरअसल पेपर लीक ने उसकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया था। 720 में 600 नंबर लाने वालों को भी सरकारी मेडिकल कॉलेज मिलने की उम्मीद नहीं दिख रही थी। उसे तो 550 मार्क्स आए थे। वह घोर निराशा में चली गई। उसे एमबीबीएस से कम मंजूर नहीं था इसलिए उसने काउंसलिंग में जाना भी स्वीकार नहीं किया।

यह कहानी किसी और की नहीं, बल्कि मेरी बेटी की है। दो साल पहले NEET 2024 में भी पेपर लीक हुआ था। उसके तार देश के कोने-कोने से जुड़े मिले। आश्चर्य तो इस बात पर हुआ कि एक साथ 27 बच्चे टॉप कर गए थे, जिनका परीक्षा सेंटर एक था। लगभग एक जैसे रोल नंबर थे। इसे देख कर बेटी का रोना रुक नहीं रहा था। रियल कटऑफ मार्क्स यानी जिस नंबर में सरकारी कॉलेज मिल सकता है, वह नंबर ऐतिहासिक रूप से हाई था। पेरेंट्स के तौर पर बेटी को संभालना हमारी पहली जिम्मेदारी थी।

हमने उसके दोस्तों से बात की। सिर्फ एक दोस्त का नंबर 670 था, जिसकी उम्मीद थी कि उसे कोई सरकारी कॉलेज मिल जाएगा। बाकी सारे दोस्त काफी निराश और दुखी थे। बेटी के दर्द को मैंने महसूस किया। अपने मार्क्स पर उसे कोई शिकायत नहीं थी। शिकायत थी तो उस पेपर लीक से, जिसकी वजह से उसे सरकारी मेडिकल कॉलेज नहीं मिल सकते थे।

मैंने उसे विदेश में पढ़ने के लिए कहा, क्योंकि विदेश का खर्च भारत के प्राइवेट कॉलेज से कम पड़ता है, लेकिन उसने इनकार कर दिया और सीयूईटी के जरिए बायोटेक में एडमिशन ले लिया। यह उसका ‘प्लान बी’ नहीं था, लेकिन पेपर लीक की खबरों से वह इतना परेशान हो चुकी थी कि उसने फिर से NEET की परीक्षा नहीं देने का फैसला किया। उसके अंदर निराशा, गुस्सा और सिस्टम के प्रति अविश्वास भर गई थी। वह आज भी प्रतियोगी परीक्षाओं को ‘शक’ की नजर से देखती है।

मेडिकल में जाना उसका सपना था। उसने दो साल तक एलेन में कोचिंग ली और स्कूल में भी पढ़ाई की। दो साल बाद ये रिजल्ट होगा। अगर इसका अनुमान उसे होता तो शायद वह प्लानिंग पहले ही बदल लेती। NEET और मेडिकल का नाम भी अब वह नहीं सुनना चाहती।

मैंने उसका मनोबल टूटते हुए देखा। उसे संभालना काफी मुश्किल था। उसने कई दिनों तक खुद को चारदिवारी में बंद रखा। खाने-पीने से दूरी बना ली। मुझे लगा कि कई डिप्रेशन न चली जाए। मैंने चुपके से एक साइक्राटिस्ट से संपर्क किया। सारी बातें बताई तो उन्होंने कहा कि कोई बात नहीं दो चार दिनों में अगर नॉर्मल नहीं होती है, तो आप मेरे पास ले आना। भगवान का शुक्र है कि वह कुछ दिनों में सामान्य हो गई और जीवन में आगे बढ़ गई।

आज NEET 2026 पेपर लीक ने हमें दो साल पहले की बेबसी और लाचारी की याद दिला गई। हालाँकि इस बार NTA ने पेपर रद्द करने की घोषणा कर जल्द ही पेपर कराने की बात कह दी है। कई शिक्षण संस्थान रडार पर हैं। केरल से गुरुग्राम तक लोगों की गिरफ्तारी हो रही है। एक बार फिर NTA को रद्द करने की माँग उठ रही है। विपक्ष इस मुद्दे पर देश के Gen Z से सड़कों पर उतरने की अपील कर रहा है।

NTA सवालों के घेरे में है। देश की शिक्षा व्यवस्था पर एक और काला दाग लग गया है। दरअसल ‘पेपर लीक’ देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। छात्र-छात्राएँ खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहते हैं।

NEET 2024 में पेपर लीक की खबरों के बीच रिजल्ट आ गया था। बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स सड़कों पर उतरे। सबका बस एक ही सवाल था कि सरकारी कॉलेज का कटऑफ इतना कैसे हो सकता है। जिस नंबर पर आराम से नामी-गिरानी सरकारी मेडिकल कॉलेज आसानी से मिल जाते थे, अब दूर-दराज के मेडिकल कॉलेज भी पहुँच से दूर हो गए थे। प्राइवेट कॉलेज में करोड़ों रुपए देकर मेडिकल की पढ़ाई करवाना ज्यादातर लोगों के बूते के बाहर था।

मामला सुप्रीम कोर्ट में गया। कोर्ट ने NTA को लताड़ा। सीबीआई जाँच हुई और कई खुलासे हुए। कोर्ट ने फैसला दिया कि सिर्फ उन जगहों पर फिर से परीक्षा होगी, जहाँ लीक के सबूत मिले। इसके बाद रिजल्ट रद्द कर फिर से रिजल्ट घोषित किया गया। इसका बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ा। ‘रियल कट ऑफ’ ऐतिहासिक था। छात्रों की बड़ी संख्या नाखुश थी। उनका कहना था कि आखिर नेट पर जब पेपर आ चुका है, तो ‘लीक क्षेत्रीय’ कैसे रह गई।

छात्रों को उम्मीद थी कि कोर्ट रिएग्जाम की बात करेगा, ताकि स्टूडेंट्स को फिर से एग्जाम देने का मौका मिले। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। रिएग्जाम की उम्मीद में कई कोचिंग संस्थानों ने छात्रों की पढ़ाई जारी रखी। छात्रों को भी उम्मीद थी कि उनके साथ ‘न्याय’ होगा और रिएग्जाम होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कई छात्रों ने दूसरे कोर्स में एडमिशन ले लिया तो कई छात्र-छात्राओं ने फिर से एक साल तैयारी करने की बात कही। लेकिन मन में वही डर था कि क्या अगले साल पेपर लीक नहीं होगा?

ये सिर्फ NEET का मामला नहीं है। देश में दूसरी परीक्षाओं के पेपर भी लीक हुए हैं। यूजीसी-नेट परीक्षा 2024 को सरकार ने परीक्षा के अगले ही दिन रद्द कर दिया था। आरोप था कि प्रश्नपत्र डार्क वेब और मैसेजिंग नेटवर्क पर लीक हुआ।

उत्तर प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी। इससे लगभग 48 लाख अभ्यर्थी प्रभावित हुए। मध्य प्रदेश का व्यापम घोटाला भारत के सबसे बड़े परीक्षा और भर्ती घोटालों में माना जाता है। इसमें मेडिकल एडमिशन, सरकारी नौकरियों और कई भर्ती परीक्षाओं में फर्जी उम्मीदवार, रिश्वत और पेपर लीक का नेटवर्क सामने आया।

राजस्थान शिक्षक भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद राज्यभर में विरोध प्रदर्शन हुए और कई गिरफ्तारियां हुईं। परीक्षा दोबारा आयोजित करनी पड़ी। CBSE के 10वीं गणित और 12वीं अर्थशास्त्र के पेपर लीक होने के बाद दोबारा परीक्षा लेनी पड़ी थी। इससे लाखों छात्र प्रभावित हुए। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) का पेपर व्हाट्सऐप पर वायरल होने के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई थी।

बिहार टीईटी परीक्षा में पेपर लीक के आरोपों के बाद कई गिरफ्तारियां हुईं और परीक्षा प्रक्रिया सवालों में आई। राजस्थान पुलिस भर्ती परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद राज्य सरकार को परीक्षा रद्द करनी पड़ी।

इन परीक्षाओं के पेपर लीक होने से यह पता चलता है कि पेपर लीक के नेक्सेस पूरे देश में फैले हुए हैं। हर परीक्षा पर उनकी नजर है। जरूरी है ऐसा सिस्टम विकसित करने की ताकि परीक्षा देते वक्त अभ्यर्थी ये मान कर दे कि उसके साथ अन्याय नहीं होगा। इसमें सबसे ज्यादा गरीब और ग्रामीण छात्र फँसते हैं। पूरा परिवार इस उम्मीद में होता है कि अभ्यर्थी इस बार पास कर नौकरी पा लेगा और उनकी माली हालत सुधर जाएगी। लेकिन परीक्षा का पेपर लीक होते ही उनकी उम्मीद टूट जाती है।

न सिर्फ अभ्यर्थी बल्कि पूरा परिवार घोर निराशा में चला जाता है। पार्टियाँ कुछ दिनों तक पेपर लीक का विरोध करती हैं और कोर्ट में भी मामला जाता है। लेकिन इस समस्या का हल नहीं निकलता। धीरे धीरे सब शांत हो जाते हैं। कुछ दिनों बाद फिर किसी दूसरे परीक्षा का पेपर लीक होता है। भारत की शिक्षा व्यवस्था की यह त्रासदी है।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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