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नूहं हिंसा का विरोध कर रहे 3 हिंदुओं को मारी गोली: ‘अल्लाह-हू-अकबर’ चिल्लाते हाकम-अकरम ने 20-25 लोगों संग किया हमला

पीड़ितों के पड़ोसी ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया, "हमारे सोहना शहर के कुछ व्यापारी और बुजुर्ग लोग प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान वहाँ छतों से पत्थर फेंके जाने लगे, गोलियाँ चलने लगीं। इसके बाद वहाँ भगदड़ मच गई।" उन्होंने कहा कि यह सब जावेद अहमद, मम्मन खां और आफताब ने कराया है।

ब्रिजमंडल जलाभिषेक यात्रा के दौरान 31 जुलाई 2023 को नूहं में कट्टरपंथी मुस्लिमों द्वारा हिंदुओं पर हर तरफ से हमले कर दिए गए थे। सड़क से लेकर अस्पताल तक और यहाँ तक कि शिव मंदिर में जुटे लोगों पर गोलियाँ बरसाई गई थीं। इन हमलों के लिए लोगों को उकसाने में जावेद अहमद, मम्मन खाँ और आफताब जैसे AAP और कॉन्ग्रेस के नेताओं का नाम सामने आ रहा है।

इस बीच ये भी जानकारी मिली है कि गुरुग्राम से सटे सोहना में जब हिंदू समुदाय के कुछ लोग नूहं हिंसा का विरोध कर रहे थे, तब उन पर फायरिंग की गई थी। फायरिंग में तीन हिंदू युवकों को गोली लगी है, जिनका इलाज किया जा रहा है।

नूहं हिंसा के खिलाफ प्रदर्शन करने पर जिन लोगों को गोली मारी गई है, उनके नाम है- वीरेंदर गुज्जर, मुनेश गुज्जर और एक उसका साथी है। जिन लोगों ने गोली चलाई है उनके नाम हैं- हाकम, वसीम, अकरम, यासीन और इनके साथी।

पीड़ितों के पड़ोसी ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया, “हमारे सोहना शहर के कुछ व्यापारी और बुजुर्ग लोग प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान वहाँ छतों से पत्थर फेंके जाने लगे, गोलियाँ चलने लगीं। इसके बाद वहाँ भगदड़ मच गई।” उन्होंने कहा कि यह सब जावेद अहमद, मम्मन खां और आफताब ने कराया है।

स्थानीय गुंडे हाकम का नाम लेते हुए पड़ोसी ने बताया, “सबसे पहले पत्थर हाकम के घर से आया है। हाकम, वसीम, अकरम आदि के साथ-साथ 20-25 अन्य लोग पत्थर मार रहे थे और अल्लाह-हू-अकबर चिल्ला रहे थे। हाकिम नेतागिरी और दादागिरी करता है। इस पर पहले से ही केस चल रहे हैं।”

पीड़ितों के पड़ोसी ने कहा, “जहाँ पर हम प्रदर्शन कर रहे थे वह बॉर्डर इलाका है। वहाँ से एक तरफ मेवात का मुस्लिम बहुल इलाका है और दूसरी तरफ हिंदू हैं। यह सोहना का अंबेडकर चौक का इलाका है। यहीं पर हाकम के घर से गोलियाँ चलाई गई, जो हमारे बच्चों के पैरों में लगी हैं।”

पड़ोसी ने बताया कि पीड़ितों को आर्ट्मिज अस्पताल में भर्ती कराया गया है और वहाँ उनका इलाज कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने लड़कों को खतरे से बाहर बताया है। पीड़ितों की आर्थिक हालत के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि इनके घरवाले बेहद गरीब हैं और इनके पिता खेती-मजदूरी करते हैं।

पीड़ित हिंदू का कहना है कि इतना सब कुछ होने के बाद पुलिस हिंदुओं के लड़कों को ही उठा कर ले गई। पुलिस ने आरोपितों में से किसी पर भी कार्रवाई नहीं की। हालाँकि, उन्होंने कहा कि पूछताछ के बाद पुलिस ने इन लड़कों को छोड़ दिया है।

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राहुल पाण्डेय
राहुल पाण्डेयhttp://www.opindia.com
धर्म और राष्ट्र की रक्षा को जीवन की प्राथमिकता मानते हुए पत्रकारिता के पथ पर अग्रसर एक प्रशिक्षु। सैनिक व किसान परिवार से संबंधित।

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