देशभर में तेल और गैस का पर्याप्त भंडार है और किसी को परेशान होने की जरूरत नहीं है। केन्द्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय के बार-बार आश्वासन के बावजूद कई जगहों पर कालाबाजारी की वजह से लोगों को मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए कई राज्यों में छापेमारी की गई है।
खुदरा दुकानों पर भी तेल- गैस की कोई कमी नहीं है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मुताबिक, घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति सामान्य तरीके से हो रही है। गैस सिलेंडर मिलने के 25 दिन बाद आप बुक कर सकते हैं और फिर 3-5 दिनों के भीतर आपूर्ति की जा रही है। इसके बावजूद लोग घबराहट में बुक कर रहे हैं, हालाँकि ऐसी पैनिक बुकिंग में कमी आई है।
राज्यों को दिया जाने वाला कॉमर्शियल सिलेंडर भी सरकार ने बढ़ा दिया है। ऐसे सिलेंडर शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों सहित प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता में दी जा रही है। इतना ही नहीं, पीएनजी कनेक्शन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने राज्यों को नए एलपीजी कनेक्शन को बढ़ावा देने के लिए कहा है।
गुजरात में फैली पेट्रोल- एलपीजी को लेकर अफवाह
होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को आ रही परेशानी के बीच भारत की अब तक 5 जहाजें सुरक्षित आ चुकी हैं। अभी 20 और जहाजें फँसी हुई हैं, जिन्हें लाने की कोशिशें जारी हैं।
केन्द्र सरकार ने इंडस्ट्रियल डीजल की कीमत 22 रुपए प्रति लीटर बढ़ाए थे, जिसके बाद गुजरात के सूरत, राजकोट समेत कई शहरों के लोग थोड़े परेशान हुए , लेकिन स्थिति जल्द ही ठीक हो गई। सोमवार (23 मार्च 2026) को गुजरात में पेट्रोल और डीजल की कमी की अफवाह फैलने के बाद कई शहरों में लोग एक साथ फ्यूल खरीदने निकल पड़े और इस वजह से पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइन लग गई। चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई।
हालात को देखते हुए डिप्टी चीफ मिनिस्टर हर्ष सांघवी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके साफ किया कि राज्य में पेट्रोल और डीजल की काफी सप्लाई है और कहीं कोई दिक्कत नहीं होगी। लोगों को पैनिक होकर इधर-उधर जाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने लोगों को सोशल मीडिया पर अधूरी जानकारी फैलाने से बाज आने और अफवाहों से दूर रहने की सलाह दी।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और मंत्री ऋषिकेश पटेल ने भी सरकार की तरफ से स्थिति साफ किया। पेट्रोल पंप ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष से लेकर कई दूसरे एसोसिएशन ने भी साफ किया है कि राज्य में फ्यूल की कमी नहीं है। हालात सामान्य करने के लिए पुलिस को भी उतरना पड़ा और लोगों को समझा कर घर वापस भेजना पड़ा।
फेडरेशन ऑफ गुजरात पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (FGPDA) के अध्यक्ष, अरविंद ठक्कर ने स्पष्ट किया है कि देशभर में ईंधन की उपलब्धता पूरी तरह सामान्य है और आपूर्ति लगातार स्थिर बनी हुई है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की कमी की कोई स्थिति नहीं है। https://t.co/O2Yz8Cd29c
— Bharat Petroleum (@BPCLimited) March 23, 2026
एसोसिएशन और सरकार एक सुर में कह रहे हैं कि अभी राज्य में फ्यूल की कोई कमी नहीं है और सप्लाई काफी मात्रा में उपलब्ध है। असल में, दिक्कत सप्लाई की नहीं थी, बल्कि फ्यूल सप्लाई चेन और पेमेंट सिस्टम में कुछ बदलाव और कुछ लॉजिस्टिक दिक्कतों की वजह से कुछ जगहों पर फ्यूल पहुँचने में देरी हुई।
अभी तक नॉर्मल हालात में पेट्रोल पंप ऑपरेटर क्रेडिट सिस्टम पर फ्यूल लेते थे। यानी वे पहले फ्यूल खरीदते थे और शाम तक या कुछ तय समय में पेमेंट कर देते थे। युद्ध के हालात और दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई में रुकावट की वजह से तेल कंपनियों ने हाल ही में एहतियात के तौर पर एडवांस्ड पेमेंट सिस्टम शुरू किया है। यानी पहले पैसा, बाद में फ्यूल।
हाल ही में, शुक्रवार (20 मार्च) को, स्टॉक हमेशा की तरह हर जगह पहुँच गया था। फिर शनिवार और रविवार वीकेंड थे और शनिवार को खास तौर पर ईद थी। इसलिए, भीड़ हमेशा से थोड़ी ज़्यादा थी। इन दिनों में, यह भी छिटपुट बातें चल रही थीं कि LPG के बाद पेट्रोल और डीज़ल में दिक्कत हो सकती है। हालात वैसे नहीं बने, सरकार बार-बार चीज़ें साफ़ कर रही थी, लेकिन फिर भी ऐसी अफ़वाहें फैलने लगीं, तो लोगों ने पहले से पेट्रोल खरीदना शुरू कर दिया। नतीजतन, इस शनिवार और रविवार को, वह एक फ़ैक्टर भी थोड़ा काम आया और फ़्यूल की बिक्री हमेशा से थोड़ी ज़्यादा हो गई।
दूसरी ओर, कंपनियों ने शुक्रवार शाम को बताया कि डीलरों को स्टॉक लेने के लिए एडवांस पेमेंट करना होगा। इसलिए, जो क्वांटिटी एडवांस में (क्रेडिट सिस्टम के दौरान) भेजी गई थी, वह नहीं भेजी गई। जिन पंप ऑपरेटरों का शनिवार और रविवार को एडवांस पेमेंट नहीं हो पाया, उन्हें सोमवार सुबह (23 मार्च) स्टॉक नहीं मिल पाया। इसलिए कई जगहों पर फ्यूल नहीं पहुँच सका।
एक तरफ लोगों का जमावड़ा रोज से ज्यादा था, इसलिए एक ही दिन में फ्यूल बिक गया। पंप जितना फ्यूल डेढ़ से दो दिन में बेचते थे, उतना एक ही दिन में बिक गया। दूसरी तरफ, पेमेंट सिस्टम की वजह से जो सप्लाई पहले मिलती थी, वह नहीं मिली और पेमेंट सिस्टम पहले लागू कर दिया गया। इन सबके कारण पंपों पर कुछ घंटों के लिए अफरा-तफरी मच गई।
टाइम्स ऑफ़ इंडिया से बात करते हुए, गुजरात पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट मेहुल पटेल ने भी यही बातें कही। उनका कहना है कि पहले डीलर फ्यूल लेते थे और बाद में पेमेंट करते थे। अब पहले पेमेंट करना पड़ता है। इस बदलाव की वजह से सप्लाई में देरी हुई, लेकिन अब हालात नॉर्मल हैं और घबराने की जरूरत नहीं है।
माना जा रहा है कि सोमवार सुबह कुछ पेट्रोल पंप कुछ घंटों के लिए बंद होने की वजह फ्यूल की कमी नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक कारणों से पेमेंट सिस्टम में बदलाव था। इस वजह से सप्लाई में कुछ घंटों की देरी हुई। बाद में जैसे-जैसे सप्लाई आई, हालात धीरे-धीरे नॉर्मल होने लगे।
यह भी एक आम बात है कि अगर सच में कई पंपों पर पेट्रोल और डीज़ल की कमी थी, तो कल से गुजरात के लोगों ने एक ही दिन में इतना पेट्रोल पी लिया और जगह-जगह लाइन में लग गए, फ्यूल आया कहाँ से?
अफवाहें फैलाने में मीडिया का रोल रहा?
मीडिया का काम है हालात को वैसे ही दिखाना जैसे हैं, लेकिन जब ऐसे हालात बनें, तो सिर्फ कैमरा लेकर पंप पर दौड़ना और उसकी फोटो सर्कुलेट करना नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे अफ़वाहें फैलने, अधूरी जानकारी फैलने का खतरा रहता है। (और आखिर में यही हुआ!) लेकिन यह भी पता होना चाहिए कि इन डेवलपमेंट्स के पीछे, हालात के पीछे असली वजह क्या है। ज़्यादातर ने ये कोशिशें नहीं कीं और चैनलों ने सिर्फ़ यह स्टोरी चलाई कि ‘हर जगह पेट्रोल की कमी है’।
Listing some other Instagram pages and screenshots of their posts that fueled the rumor about a petrol and diesel shortage.
— Bhavesh Lodha (@bhav2406) March 24, 2026
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यह जानकारी सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से फैल गई, जिसके चलते लोग पहले से इंतजाम करने के लिए पेट्रोल पंप पर इकट्ठा होने लगे, लंबी लाइनें लगने लगीं और अफरा-तफरी मच गई।
लोगों ने इंस्टाग्राम पर पेट्रोल पंप के पास जाकर वीडियो बना अपलोड करना शुरू कर दिया, जिससे अफवाह ज्यादा तेजी से फैली। हालात और खराब हो गए। लेकिन जब डिप्टी सीएम ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हालात के सामान्य होने की जानकारी दी तो धीरे धीरे सोशल मीडिया और मीडिया पर अफवाह न फैलाने की बात की जाने लगी।
राजस्थान में पेट्रोल खत्म होने की अफवाह
राजस्थान में भी 23 मार्च को पेट्रोल खत्म होने की अफवाह फैली। इसके बाद बीकानेर, जालोर, उदयपुर, आबू रोड़ और सलूम्बर जैसे जिलों में पेट्रोल पंपों पर गाड़ियों की कतारें लग गई। कई जगहों पर लड़ाई झगड़े हुए और पुलिस को बीच बचाव करना पड़ा।
जानकारों के मुताबिक ये सिर्फ अफवाह थी। राजस्थान में पेट्रोल डीजल की कोई कमी नहीं है और अगले कुछ दिनों तक तो किसी तरह की परेशानी नहीं आनी चाहिए। कारों, मोटरसाइकिलों और दूसरे वाहनों को आराम से पेट्रोल-डीजल मिल रहे हैं। किसी को पैनिक होने की जरूरत नहीं है। लोगों को अफवाहों से बचना होगा । बेवजह लंबी कतारों में खड़े होने की कोई जरूरत नहीं है।
सरकार ने इंडस्ट्रीयल डीजल और पेट्रोल महँगा किया है। सामान्य पेट्रोल-डीजल नहीं। चूँकि अब उधार डीजल और पेट्रोल की सप्लाई रोकी गई है। इसलिए डीलर्स के लिए अतिरिक्त जमा करना मुश्किल होगा साथ ही कैश फ्लो भी ठीक रहेगा।
दिल्ली में भी अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील
दिल्ली सरकार ने भी साफ किया है कि राज्य में एलपीजी, पेट्रोल, डीजल और पीएनजी की पर्याप्त आपूर्ति है। इसलिए अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक न हों और जमाखोरी से बचें।
इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) ने भी पुष्टि की है कि दिल्ली में घरेलू पीएनजी की आपूर्ति स्थिर है। प्राकृतिक गैस के आवंटन में घरेलू पीएनजी और परिवहन क्षेत्र (सीएनजी) के उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है। पेट्रोल डीजल भी आम दिनों की तरह ही मिल रहे हैं।
राज्यों में कालाबाजारी को रोकने के लिए कदम उठाए हैं। अफवाहों को फैलाने के पीछे कालाबाजारी करने वालों का हाथ बताया जाता है। सोशल मीडिया इसमें बड़ा रोल अदा कर रहा है। केन्द्र सरकार लगातार तेल-गैस की सप्लाई को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए कई देशों के साथ डील कर चुकी है।
होर्मुज संकट से पहले जहाँ भारत के 27 देशों के साथ डील हो रही थी, वहीं अब 40 देशों के साथ तेल- गैस की आपूर्ति को लेकर डील हुई है। ऐसे में संयम के साथ जमाखोरों के चंगुल से बचने की जरूरत है और 25 दिनों बाद गैस की ऑनलाइन बुकिंग में कोताही नहीं बरतने की सलाह सरकार दे रही है।


