Tuesday, August 3, 2021
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IT विभाग ने PFI का 80जी पंजीकरण किया रद्द, कहा- इस्लामी संगठन समुदायों के बीच ‘सद्भावना’ और ‘भाईचारे’ को कर रहा नष्ट

22 मार्च, 2021 के एक आदेश में कहा गया है कि आईटी विभाग ने आयकर नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का 80G पंजीकरण रद्द कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि पीएफआई ने आईटी अधिनियम की धारा 13(1)(बी) और धारा 12एए(4)(ए) का उल्लंघन किया है।

आयकर विभाग ने मंगलवार (15 जून 2021) को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का 80जी पंजीकरण रद्द कर दिया है। आयकर विभाग ने कहा कि इस्लामी संगठन समुदायों के बीच ‘सद्भावना’ और ‘भाईचारे’ को खत्म कर रहा है।

22 मार्च, 2021 के एक आदेश में कहा गया है कि आईटी विभाग ने आयकर नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का 80G पंजीकरण रद्द कर दिया है। आदेश में कहा गया है कि पीएफआई ने आईटी अधिनियम की धारा 13(1)(बी) और धारा 12एए(4)(ए) का उल्लंघन किया है। आयकर कानून का सेक्‍शन 80G कुछ निश्चित रिलीफ फंड्स और चैरिटेबल संस्थानों को डोनेशन या दान देकर टैक्स कटौती का लाभ पाने का विकल्प उपलब्ध कराता है।

पूर्व खंड कहता है कि धर्मार्थ संस्थानों को छूट धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए एक ट्रस्ट के मामले में या इस अधिनियम के शुरू होने के बाद स्थापित की गई धर्मार्थ संस्था के मामले में लागू नहीं होगी। यदि किसी विशेष धार्मिक समुदाय या जाति के लाभ के लिए ट्रस्ट या संस्था बनाई या स्थापित की जाती है तो उसे इसका लाभ नहीं मिलेगा।”

बाद वाले खंड में ऐसे धर्मार्थ संगठन के पंजीकरण को रद्द करने का प्रावधान है। आदेश में कहा गया है कि पीएफआई समुदायों के बीच सद्भाव और भाईचारे को नष्ट करने में लगा हुआ है। आयकर अधिनियम की धारा 80G लोगों को जनकल्याणकारी गतिविधियों में भाग लेने के लिए छूट प्रदान करती है। कुछ ट्रस्ट या चैरिटी को दान करने पर व्यक्ति कर में छूट का दावा कर सकते हैं।

पिछले साल जनवरी में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सीएए विरोधी दंगों के दौरान पीएफआई सदस्यों द्वारा की गई हिंसा के कारण पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की माँग की थी। पीएफआई के सदस्यों को अक्सर आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाया गया है, जिसमें सांप्रदायिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हत्या भी शामिल है।

फरवरी में, केरल के चेलारी में पीएफआई ने अपने स्थापना दिवस पर रैली निकाली थी। इस रैली का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था। वीडियो में परेड में आरएसएस की वेशभूषा पहने कुछ युवकों को जंजीर से जकड़ा हुआ दिखाया गया था। इसके अलावा अल्लाहु अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाह मुहम्मदुर रसूलुल्लाह और जुलूस के दौरान नारे लगाने वाले अन्य लोगों सहित कई इस्लामी नारे लगाने वालों की पुष्टि की गई थी।

कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पीएफआई का हिंसा फैलाने का इतिहास

पीएफआई का हिंसा करने का काफी पुराना इतिहास है। नागरिकता संशोधन अधिनियम के मद्देनजर हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों और देश भर में हिंसा की जाँच के दौरान, पीएफआई की भूमिका संदिग्ध रही है और पीएफआई के कई सदस्यों को दंगों में शामिल होने के लिए गिरफ्तार किया गया था। इसके अलावा पिछले साल नवंबर में कट्टरपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया ने देश के विभिन्न हिस्सों में दंगों और हिंसा के लिए उकसाने के आरोपित किसानों के विरोध को अपना समर्थन दिया और प्रदर्शनकारियों को संविधान के संरक्षण के लिए संघर्ष करने के लिए कहा था।

पीएफआई और SIMI जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठन विभिन्न राष्ट्र विरोधी गतिविधियों की फंडिंग के लिए कुख्यात हैं। दिसंबर 2019 में CAA के विरोध प्रदर्शनों के दौरान गृह मंत्रालय के साथ शेयर की गई एक खुफिया रिपोर्ट ने कुछ ‘राजनीतिक दलों’ की तरफ इशारा किया था और SIMI जैसे कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों पर प्रतिबंध लगा दिया था।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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