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हर घंटे करीब 80 kg सोना खरीदता है भारत, जानिए PM मोदी ने क्यों की 1 साल गोल्ड नहीं खरीदने की अपील: इससे व्यापार घाटा, विदेशी मुद्रा भंडार पर क्या पड़ेगा असर

प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की है। दरअसल मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर, कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और विदेशी मुद्रा में सोने की खरीद से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आई है। सोने के सबसे बडे आयातक देशों में भारत शामिल है। सोने का सबसे ज्यादा आयात स्विटरलैंड से होता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की है। दरअसल मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध का असर भारत पर भी पड़ा है। भारत पर विदेशी मुद्रा का दबाव बढ़ रहा है। इसलिए विदेशी मुद्रा बचाने के लिए पीएम मोदी ने जनता से एक साल तक सोना नहीं खरीदने और खाने में तेल कम इस्तेमाल करने की अपील की।

क्या कहा पीएम मोदी ने

तेलंगाना के सिकंदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए पीएम मोदी ने लोगों से विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की। इसके लिए उन्होंने कई रास्ते भी बताए।

पीएम मोदी ने सप्लाई चेन का हवाला देते हुए कहा कि सप्लाई चेन पर लगातार संकट बना हुआ है। इसलिए देश को सर्वोपरि रखते हुए हमें एकजुट होना होगा । देश के लिए जीना और देश के लिए अपने कर्तव्यों का पालन करना भी देशभक्ति है।

उन्होंने कहा कि सोने की खरीद में विदेशी मुद्रा काफी खर्च होता है। एक समय था जब देश पर संकट आता था, तो लोग सोना दान कर देते थे। आज दान की जरूरत नहीं है, लेकिन देशहित में इसकी खरीद को सालभर रोक सकते हैं। उन्होंने कहा कि सालभर में अगर घर में कोई कार्यक्रम हो, तो सोने के गहने नहीं खरीदें। सोना नहीं खरीदने का फैसला देशहित में है, क्योंकि हमें विदेशी मुद्रा बचानी है। यह भी एक तरह से देशभक्ति है।

दरअसल पीएम मोदी का आह्वान सिर्फ एक भावनात्मक अपील नहीं है, बल्कि आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा है। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयात करने वाले देशों में एक है। भारत अपनी सोने की जरूरत के लिए पूरी तरह विदेश पर निर्भर है। देश का करोड़ों डॉलर विदेशों से सोना खरीदने में जाता है।

जितना ज्यादा सोना आयात होगा, उतना ज्यादा डॉलर बाहर जाएगा और इससे रुपए पर दबाव बढ़ेगा।

अभी पश्चिम एशिया में तनाव की स्थिति, महँगे कच्चे तेल और वैश्विक अनिश्चितता के कारण आयात किए जाने वाले सामानों की कीमत काफी बढ़ गई है। इससे विदेशी मुद्रा काफी तेजी से खर्च हो रहा है।

कच्चे तेल की कीमत आसमान छू रही हैं। यह 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई हैं। इससे भारत को तेल खरीदने में करीब 30 फीसदी ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च करना पड़ रहा है। ऐसे में सोने के भारी आयात से देश को अर्थव्यवस्था पर ‘दोहरी मार’ पड़ रही है।

पीएम मोदी ने इसे ही कंट्रोल करने के लिए देशवासियों से पेट्रोल-डीजल कम इस्तेमाल करने, जहाँ तक हो सके वर्क फ्रॉम होम करने, विदेश यात्रा टालने और सोना खरीदने से बचने की अपील की है।

भारत में कितना है विदेशी मुद्रा भंडार

प्रधानमंत्री की अपील का असर देश में पहले भी दिखा है। कोरोना काल में थाली बजाने से लेकर कोरोना वॉरियर्स के सम्मान में तालियाँ बजाने की बात देश ने मानी है। अब भावनात्मक रूप से खासकर महिलाओं से जुड़ा ‘सोना’ की खरीद को एक साल के लिए रोकने की अपील पीएम मोदी ने की है।

अगर लोग बड़े पैमाने पर सोना खरीदना कम कर दें, तो भारत को कई आर्थिक फायदे हो सकते हैं। सबसे पहले तो विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा। भारत को हर साल सोने के लिए अरबों डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। अगर लोग कम खरीदेंगे तो डॉलर की बचत होगी।

विदेशी मुद्रा भंडार में मजबूती से देश का रुपया भी मजबूत होगा, क्योंकि कम डॉलर खर्च होने से रुपए पर दबाव कम होगा। इससे रुपया तेजी से गिरने से बच सकता है। इससे व्यापार घाटा कम हो सकता है। भारत तेल और सोना दोनों भारी मात्रा में आयात करता है यानी ये दो चीजें भारत सबसे ज्यादा विदेशों से मँगाता है।

सोने की खपत में कमी से सरकार को संकट से निपटने में मदद मिलेगी। पश्चिम एशिया में जारी संकट थमने का नाम नहीं ले रहा है। कई जानकार वैश्विक मंदी की आशंका जता चुके हैं। ऐसे में अगर वैश्विक संकट और बढ़ता है, तो सरकार के पास ज्यादा फोरेक्स बफर रहेगा। इससे संकट से निपटने में आसानी होगी।

भारत में आरबीआई के आँकड़े के मुताबिक फरवरी में फॉरेक्स रिजर्व 728 बिलियन डॉलर है, वहीं ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के आँकड़ों के मुताबिक, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 691 बिलियन डॉलर के आसपास है। दूसरी ओर आईएमएफ के मुताबिक, 2026 में भारत का चालू खाता घाटा (करंट अकाउंट डेफिसिट) बढ़कर 84.5 बिलियन डॉलर हो सकता है। यह पूरे जीडीपी का करीब 2 फीसदी है। करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ने का मतलब है ज्यादा डॉलर का देश से बाहर जाना।

भारत के घरों में हजारों टन सोना है

भारत दुनिया के सबसे बड़े ‘गोल्ड होल्डिंग’ देशों में माना जाता है। अनुमान के मुताबिक, भारतीय परिवारों, मंदिरों और संस्थानों के पास कुल मिला कर लगभग 25000 से 30 000 टन सोना मौजूद है। यह दुनिया के कई देशों के रिजर्व से भी ज्यादा है। दरअसल भारतीय घरों में सोना सिर्फ निवेश नहीं है, बल्कि शादी-ब्याह का अहम हिस्सा है। भारतीय परंपरा से सोना जुड़ा हुआ है और सामाजिक सुरक्षा के साथ-साथ इमरजेंसी में इस्तेमाल की जाने वाली संपत्ति है।

सोने को बाहर निकाल कर ‘काम’ पर लगाने के लिए सरकार ने कई गोल्ड प्लान भी लॉन्च किए। इनमें सेवेरॉन गोल्ड बॉन्ड, गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम से लेकर कई डिजिटल स्कीम शामिल हैं।

दरअसल सोने को आमतौर पर एक ‘सुरक्षित संपत्ति’ माना जाता है। इसलिए अनिश्चितता की स्थिति में निवेशक इसे खरीदने के लिए उमड़ पड़ते हैं। हालाँकि, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें दुनिया भर में लंबे समय तक चलने वाली महँगाई और आसमान छूती ब्याज दरों को लेकर भी चिंताएँ बढ़ा रही हैं। इसलिए यह मामला और भी ज्यादा मुश्किल हो गया है।

पश्चिम एशिया में युद्ध पूरी तरह नहीं रुका है। ईरान और अमेरिका के बीच गतिरोध बना हुआ है। ईरान ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के शांति प्रस्तावों को ठुकरा दिया है। होर्मुज स्ट्रेट में रुकावटों की चिंताएँ बढ़ने से तेल की कीमतें फिर से बढ़ गई हैं। तेल की बढ़ती कीमतों की वजह से वैश्विक महँगाई का जोखिम भी बढ़ गया है। US फेडरल रिजर्व जैसे केंद्रीय बैंकों ने लंबे समय से ब्याज दरें ऊँची बनाए रखी है। इसका सोने की कीमत पर बुरा असर पड़ा है, क्योंकि इससे कोई यील्ड या ब्याज नहीं मिलता।

भारत को एक साल में कितनी बचत होगी?

हाल के वर्षों में भारत हर साल करीब 700 से 900 टन सोने की खपत है। इसमें से करीब 90 फीसदी आयात किया जाता है। हर दिन के लिहाज से सोचें तो यह करीब 1920 किलो बैठता है यानी हर घंटे भारत में 80 किलो सोना खरीदा जाता है। इस पर देश का खर्च 50 से 70 अरब डॉलर होता है यानी 4.76 से 6.66 लाख करोड़ रुपए खर्च होता है। कच्चे तेल के बाद सोना मँगवाने में भारत सबसे ज्यादा डॉलर खर्च करता है। हर दिन भारत में

अगर देश ने पीएम मोदी की अपील को मानते हुए सोना खरीदने में कमी कर दी तो करोड़ो डॉलर का बचत होगा। पीएम मोदी की अपील पर अगर देशवासी पूरी तरह एक साल तक सोना खरीदने पर रोक लगा दे, तो 70 अरब डॉलर यानी करीब 6.84 लाख करोड़ रुपए का विदेशी मुद्रा हम बचा पाएँगे।

अगर 50 फीसदी सोने की खरीद में कमी हो जाए, और देश को 35 अरब डॉलर यानी 3.42 लाख करोड़ रुपए की बचत होगी।

पीएम मोदी की अपील पर अगर देशवासियों ने 25 फीसदी सोना खरीद में कमी कर दी, तो देश को 1.71 लाख करोड़ रुपए की बचत हो जाएगी।

पीएम मोदी की अपील में देशहित के साथ-साथ ‘आर्थिक देशभक्ति’ का संदेश भी छिपा है। उन्होंने अपनी बात पर जोर देने के लिए इसलिए कहा कि पहले युद्ध के समय लोग देश के लिए सोना दान करते थे, लेकिन अभी जरूरत सिर्फ सोने की खरीद को टालने की है अर्थात जनता विदेशी खर्च को कम करने के लिए संयम बरते। इससे घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

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रुपम
रुपम
रुपम के पास 20 साल से ज्यादा का पत्रकारिता का अनुभव है। जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा। जी न्यूज से टेलीविज़न न्यूज चैनल में कामकाज की शुरुआत। सहारा न्यूज नेटवर्क के प्रादेशिक और नेशनल चैनल में टेलीविज़न की बारीकियाँ सीखीं। सहारा प्रोग्रामिंग टीम का हिस्सा बनकर सोशल मुद्दों पर कई पुरस्कार प्राप्त डॉक्यूमेंट्री का निर्माण किया। एडिटरजी डिजिटल हिन्दी चैनल में न्यूज एडिटर के तौर पर काम किया।

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