Friday, November 27, 2020
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राहत ब्रो, ‘काफ़िरों की शराब, शबाब और पैसा पसंद’ होना ठीक, लेकिन पैसों की स्मगलिंग ‘गल्त बात’ है

2011 में भी राहत के साथ 2 और लोगों विदेशी मुद्रा की स्मगलिंग के लिए हिरासत में लिया गया था। तब राहत को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया था। लेकिन इस बार ईडी राहत को बख्शने के मूड में नहीं दिखती।

ऐसे समय में जब गायक राहत फ़तेह अली ख़ान एक बार फिर फॉरेन करेंसी स्मगलिंग के मामले में चर्चा में आ गए हैं, हम लाए हैं एक किस्सा, जो भारतीय राजनयिकों के गलियारे में ख़ूब चर्चा में रहा है। ये किस्सा है 1990 का, जब पाकिस्तान के एक मशहूर ग़ज़ल गायक और उस दौरान इस्लामाबाद में पोस्टेड एक भारतीय राजनयिक साथ में हवाई सफ़र कर रहे थे।

भारतीय राजनयिक इस ग़ज़ल गायक के फ़ैन तो थे ही, आस-पास ही बैठे होने के कारण बातचीत का माहौल भी बना हुआ था। ग़ज़ल गायक को लगा कि शायद ये पाकिस्तान के ही राजनयिक हैं और भारत में होने वाले उनके दौरों पर बात करते हुए भारत के लिए आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया था। इसी माहौल में वो ‘काफ़िर’ भारतीय लोगों पर खूब बरस भी रहे थे, साथ ही उन्होंने कहा था कि एक ‘मोमिन’ होने के नाते वो भारत देश के काफ़िरों की सिर्फ शराब, शबाब और और पैसा पसंद करते हैं और इसमें उन्हें कोई परेशानी नहीं होती।

प्लेन से अपने हवाई सफ़र से उतरने के बाद जब राजनयिक ने उनसे बताया कि वो पाकिस्तानी नहीं बल्कि भारतीय राजनयिक हैं तो भारतीय शराब, शबाब और रूपए के शौक़ीन ग़ज़ल गायक ने फ़ौरन उनसे माफ़ी माँगी, गिड़गिड़ाए और इस नासमझी के लिए उनसे माफ़ी भी माँगी।

राजनयिक की सिफ़ारिश पर तत्कालीन भारत सरकार द्वारा इस ग़ज़ल गायक को कई वर्षों के लिए भारत में ‘ब्लैकलिस्ट’ कर दिया गया और ‘काफ़िरों’ के इस देश में परफॉर्म करने की अनुमति देने से मना कर दिया।

ऐसे में जब ग़ज़ल गायक के पास ‘काफ़िरों’ से पैसे आने बंद हो गए और ‘पाक़’ जमीं पर गाने-बजाने के लिए कोई ख़ास धन और अवसर थे नहीं, तो स्वाभाविक है कि रुपयों की तंगी गायक को सताने लगी।

हमारे देश में फिर एक समय आया, जब कविता, काव्य और ग़ज़लों के शौक़ीन प्रधानमन्त्री ने इस ग़ज़ल गायक को फिर से भारत आने का मौका दिया और काफ़िरों से आने वाले रूपए पर फिर से चाँदी लूटी जानी लगी।

बचपन में एक कहानी पड़ी थी, बिच्छू की प्रवृत्ति डंक मारने की ही होती है, लेकिन इंसान की प्रवृत्ति उस पर दया कर के उसे बचाने की होनी चाहिए।

पाकिस्तान के जाने-माने सिंगर और पाकिस्तानी गायक नुसरत फ़तेह अली ख़ान के भतीजे राहत फ़तेह अली खान पर सरकार ने फॉरेन करेंसी स्मगलिंग मामले में शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। ईडी (इंफोर्समेंट डायरेक्टरेट) ने FEMA (फ़ॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट) के तहत राहत फ़तेह अली ख़ान को ‘शो-कॉज’ नोटिस यानी कारण बताओ नोटिस जारी किया है और जाँच में शामिल होने को कहा है। आरोप हैं कि राहत फ़तेह अली ख़ान 3 सालों से फॉरेन करेंसी की स्मगलिंग के धंधे में लिप्त थे।

राहत फ़तेह अली ख़ान के साथ करेंसी स्मलिंग का ये दूसरा मामला है। इससे पहले 2011 में दिल्ली के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रेवेन्यू इंटैलीजेंस की टीम ने राहत फ़तेह अली ख़ान को फॉरेन करेंसी के साथ पकड़ा था, जिसकी कोई रसीद या सबूत राहत के पास नहीं था। राहत के साथ 2 और लोगों को हिरासत में लिया गया था। तब राहत को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया था। लेकिन इस बार ईडी राहत को बख्शने के मूड में नहीं दिखती।

हैरानी की बात है कि ऐसे समय में जब भारत देश में रह रहे कुछ कलाकारों को, जिनकी यहाँ पर बहुत बड़ी फ़ैन फ़ॉलोइंग भी है, को लगता है कि इस देश में लोगों के अंदर धार्मिक असहिष्णुता का माहौल है, पाकिस्तानी कलाकार यहाँ आकर अपने ‘टैलेंट’ को साबित करने के लिए मरे जाते हैं। संगीत और कला के प्रति भारत देश की आसक्ति हमेशा से ही दिलचस्म मुद्दा रही है।

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आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

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