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सावन के महीने में ज्ञानवापी में मिले ‘शिवलिंग’ की पूजा का मिले अधिकार: सुप्रीम कोर्ट में हिन्दू पक्ष ने दाखिल की याचिका

याचिका में त्रिपाठी ने कहा है कि सावन का पवित्र महीना शुरू हो रहा है और हिन्दुओं को पूजा करने और अपने अधिकार का प्रयोग करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

ज्ञानवापी विवादित ढाँचे के अंदर वजूखाने में मिले शिवलिंग की पूजा-अर्चना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। इसमें कोर्ट से शिवलिंग की पूजा करने की अनुमति माँगी गई है। हिन्दुओं की ओर से ये याचिका श्री कृष्ण जन्म भूमि मुक्ति स्थल के अध्यक्ष राजेश मणि त्रिपाठी ने दायर की थी।

याचिका में त्रिपाठी ने कहा है कि सावन का पवित्र महीना शुरू हो रहा है और हिन्दुओं को पूजा करने और अपने अधिकार का प्रयोग करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

याचिका में कहा गया है, “याचिकाकर्ता को भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्रदान किए गए हिन्दू रीति-रिवाजों के अनुसार अपनी धार्मिक प्रथाओं और अनुष्ठानों का प्रचार करने का अधिकार है और यह एक तथ्य है कि श्रावण का महीना शुरू हो रहा है, जिसमें भगवान शिव की पूजा की जाती है। इसलिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत गारंटी के रूप में श्रावण के महीने में पूजा करने, ‘अंतरात्मा की स्वतंत्रता और स्वतंत्र पेशे, धर्म के अभ्यास और प्रचार’ के अधिकारों का प्रयोग करने की अनुमति माँगी है।”

याचिका में राजेश मणि त्रिपाठी ने कहा है कि 16 मई को सर्वे का काम पूरा हुआ और 19 मई को कोर्ट में रिपोर्ट पेश की गई। सर्वे में सामने आया था कि ज्ञानवापी के अंदर शिवलिंग मिला है। अब हम उसकी पूजा-अर्चना करना चाहते हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट अपने शिष्यों समेत शिवलिंग की पूजा करने की इजाजत माँगी है।

गौरतलब है कि काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी परिसर में स्थित माँ श्रृंगार गौरी और अन्य देव विग्रहों की पूजा अर्चना के मामले में मंगलवार (26 अप्रैल, 2022) को सीनियर डिवीजन के सिविल जज रवि कुमार ने फैसला सुनाया था। उन्होंने कहा था कि इस बार ईद के बाद 10 मई से पहले एडवोकेट कमिश्नर से मौके का मुआयना करा वहाँ की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। इसके बाद 6 और 7 मई को विवादित ढाँचे की वीडियोग्राफी कराई गई।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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