Wednesday, September 23, 2020
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राँची की राफिया नाज: योग सिखाती हैं, और मुस्लिम कट्टरपंथियों की गाली, धमकी, जानलेवा हमले झेलती हैं

"मेरे ऊपर ना सिर्फ कमेंट किए जाते हैं बल्कि मुझे मारा भी गया है। मेरे ऊपर शारीरिक हमला किया गया। उस समय भी रोजा चल रहा था और मुझे बहुत बुरी तरह से मारा गया। मैं सड़क पर चलकर आ रही होती थी, तो मेरे ऊपर गमला फेंक दिया जाता था, कभी दुपट्टा खींचकर कोई चला जाता। एक बार रॉड से मेरे कमर पर मारा गया। बहुत कुछ हुआ है मेरे साथ।"

योग की शिक्षा देकर देश का नाम रौशन वाली झारखंड की राजधानी राँची की राफिया नाज (Rafia Naz) पिछले कई सालों से मजहबी कट्टरपंथियों के निशाने पर हैं। राफिया नाज आज योग के क्षेत्र में एक जाना पहचाना नाम हैं। योग को धर्म से परे मानने वाली राफिया को आज योग के कारण ही निशाना भी बनाया जा रहा है। राफिया का योग प्रेम कट्टरपंथियों को रास नहीं आता है। इस वजह से उन्हें लगातार धमकियाँ मिल रही हैं। उनके खिलाफ फतवा भी जारी किया जा चुका है।

योग की वजह से ऑनलाइन फतवा

हमने इस बाबत राफिया नाज से बात की। हमने उनसे पूछा कि ये सब कब से हो रहा है और क्यों हो रहा है? तो वो कहती हैं कि अब तो ये सब उनके लिए सामान्य दिनचर्या का हिस्सा बन गया है। वो सालों से इन कट्टरपंथियों के गाली-धमकी और हमले को झेल रही हैं। वो कहती हैं कि 8 नवंबर 2017 को तो जी न्यूज पर ऑनएयर कहा गया था कि राफिया नाज के जनाजे में मुस्लिम नमाज नहीं पढ़ेंगे। इसके एक दिन बाद ही, यानी कि 9 नवंबर 2017 को उसके घर पर पत्थरबाजी की गई।

वो कहती हैं कि योगा सिखाने की वजह से उन्हें भद्दी-भद्दी गंदी गालियाँ दी गई, उन्हें जान से मारने की कोशिश की गई। ये पूछने पर वो लोग ऐसा क्यों कर रहे तो वो कहती हैं कि उनका कहना है कि मैं एक मुस्लिम होकर योग कैसे सिखा सकती हूँ। राफिया कहती हैं, “मेरे ऊपर ना सिर्फ कमेंट किए जाते हैं बल्कि मुझे मारा भी गया है। 20 जून 2016 को मेरे ऊपर शारीरिक हमला किया गया। उस समय भी रोजा चल रहा था और मुझे बहुत बुरी तरह से मारा गया। मैं सड़क पर चलकर आ रही होती थी, तो मेरे ऊपर गमला फेंक दिया जाता था, कभी दुपट्टा खींचकर कोई चला जाता। एक बार रॉड से मेरे कमर पर मारा गया। बहुत कुछ हुआ है मेरे साथ।”

राफिया कहती हैं कि जितना कुछ उन्होंने सहा है, उनकी जगह पर कोई और होती तो कब का सुसाइड कर चुकी होती। वो अभी इस तरह से हमसे हँसकर बात नहीं कर रही होती। वो बताती हैं कि उनकी न्यूड फोटो बनाई गई। वो कहती हैं, “दूसरी लड़की की बॉडी में मेरा चेहरा लगाकर सर्कुलेट किया गया। वो कहती हैं कि उन्होंने उसकी आईडी, यूआरएल, लिंक वगैरह सब दिए, लेकिन आईडी ब्लॉक नहीं हुआ।”

19 साल की उम्र में जान से मारने के लिए किया गया अगवा

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19 साल की उम्र में राफिया को जान से मारने के लिए उठवाया भी गया था। रात भर घर से बाहर रही थी। वो कहती हैं कि जब उन्हें स्कूटी से अगवा किया जा रहा था, तो रास्ते में गिर गई थी और फिर भाग कर रात भर बाहर ही छुपी रही। इधर ये गुंडें उनको ढूँढने के लिए उनके घर आए थे। इसी तरह एक बार धमकी दी गई कि उन्हें 48 घंटे के अंदर मार दिया जाएगा। एक बार उनके ऊपर इस तरह से रॉड से हमला किया गया कि वो एक साल तक जमीन पर सोईं। स्थिति ऐसी थी कि वो बेड पर बैठ भी नहीं पाती थी।

जब हमने राँची की राफिया नाज से ये जानने की कोशिश की कि उनके साथ ये सब कुछ इतने सालों से होता चला रहा है तो क्या उन्हें राज्य सरकार की तरफ से किसी तरह की सुरक्षा नहीं मिली? इसके जवाब में वो कहती हैं, “2017 में झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास ने मेरी सुरक्षा का संज्ञान लिया था और मुझे 24 घंटे सुरक्षा मुहैया करवाया गया था, जो कि अभी हटा लिया गया है। मुझे नहीं पता कि किस वजह से हटा लिया गया है। उस समय मेरे घर के बाहर रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और सीआरपीएफ के जवान तैनात रहते थे। आप सोचिए, घर के बाहर RAF और CRPF के जवान मौजूद होंगे तो सिचुएशन कितना गंदा रहा होगा, क्योंकि कोरोना जैसी महामारी से निपटने के लिए भी अबी तक CRPF को नहीं उतारा गया और उस टाइम उतारा गया तो आप सोच सकते हैं कि मेरे साथ कितना गंदा हुआ होगा।”

अपने ही समाज के कट्टरपंथियों के विरोध का सामना

यह पूछने पर कि इस तरह के माहौल में परिवार की तरफ से किस तरह का समर्थन है तो वो कहती हैं कि परिवार ही उनकी असली ताकत है। वो उन्हें हौसला देते रहते हैं।

राफिया कहती हैं, “परिवार का मेरा सपोर्ट करने की वजह से उन्हें गंदी गालियाँ दी जाती है। उनसे कहा जाता है कि बेटी को कितने में बेचा है। मैं रास्ते पर चलती हूँ तो मुझसे कहा जाता है कि ये तो RSS की रखैल है। दोस्त के साथ जाती हूँ तो कहा जात है कि देखो रं** की बहन जा रही है। इनकी नजर में मेरा गुनाह एक ही है- योग। और योग मेरा जिद है। जिद इसलिए है, क्योंकि ये भारतीय संस्कृति है और इसे फॉलो करने में हमें शर्म नहीं आनी चाहिए। अगर इन्होंने प्यार से बोला होता तो शायद मैं इसे छोड़ देती, लेकिन अब नहीं। अब तो योगा मैं मरते दम तक करती रहूँगी।”

वो आगे कहती हैं, “जब मैं पुलिस स्टेशन जाती थी तो वहाँ भी मुझे गंदी गालियाँ दी जाती थी। उस समय काफी लोग सलाह दे रहे थे कि सुसाइड कर लो। यही इसका सबसे अच्छा और सरल समाधान है। लोगों ने तो और भी बहुत कुछ कहा, जो कि मैं आपसे कह नहीं सकती। जब मै पुलिस स्टेशन में FIR करवाने जाती थी तो मुझसे कहा जात था, ‘रं** मेरे इलाके का माहौल बिगाड़ रही है साली तू।’ इसके बावजूद भी मैं जिद पर अड़ी रहती थी कि जब तक मुझे FIR की रसीद नहीं दी जाएगी, मैं नहीं जाऊँगी।”

राँची की राफिया नाज अपने साथ हुए एक हादसे का जिक्र करती हुई कहती हैं, “एक बार मेरे से कहा गया कि खेलगाँव में प्रोग्राम है, आ जाओ। अगर आज नहीं आओगी तो फिर तुम्हें आगे से कोई प्रोग्राम नहीं करने दिया जाएगा। मैं हड़बड़ाकर गई। वहाँ जाकर देखती हूँ कि कोई प्रोग्राम नहीं था। कोई भी नहीं था वहाँ पर। फिर मैं वापस घर आई। रास्ते में एक ट्रक ने मेरी गाड़ी को इतनी जोर से टक्कर मारा कि गेट के टुकड़े-टुकड़े हो गए। उस समय मेरे साथ कार के अंदर एक सरकारी सिपाही थे। हमलोगों ने पुलिस को फोन किया कि सर यहाँ पर मेरे साथ ऐसा-ऐसा हुआ है तो जवाब मिलता है कि कहाँ से पकड़ेंगे। आधे घंटे से ज्यादा हो गया। अब तक तो वो कहाँ से कहाँ निकल गया होगा। कहाँ से पकड़ेंगे? फिर जब मैंने कहा कि सीसीटीवी फुटेज चेक कीजिए, उसमें ट्रक का नंबर दिख जाएगा, तो कहते हैं कि इलाके का पूरा सीसीटीवी फुटेज खराब है।”

इसके साथ ही वो अपनी सिचुएशन बताती हुई कहती हैं कि अब तो वो बोलने से भी डरने लगी हैं। पहले तो कहीं भी कुछ भी गलत होता था, वो आंदोलन करने के लिए निकल पड़ती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। राफिया कहती हैं, मैं अपने लिए नहीं डरती। मैं अपने परिवार के लिए डरती हूँ कि उन्हें कोई किसी तरह का नुकसान न पहुँचा दे। मैंने लोगों का असली चेहरा देखा है। लोग ऑन कैमरा कैसे होते हैं और ऑफ कैमरा कैसे होते हैं, वो मैंने देखा है। मैंने लोगों को बिकते हुए देखा है। इसलिए अब मैं ऐसी हो गई हूँ। पहले मैं ऐसी नहीं थी, इन लोगों ने मुझे ऐसा बना दिया है।

चार साल की उम्र से कर रही है योग

राफिया नाज की योग में रुचि का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकती हैं कि वो 4 साल की उम्र से ही योग कर रही हैं। अब तक उन्होंने योग के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर 52 मेडल जीते हैं। राफिया को जम्मू-कश्मीर में अंतर्राष्ट्रीय योगा फेस्टिवल में ‘नेशनल पतंजलि योगा प्रमोटर पुरस्कार’ से नवाजा गया था। इसी तरह लखनऊ के अखिल भारतीय योग महासम्मेलन में ‘योगप्रभा’ की उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें खुद योगगुरु बाबा रामदेव सम्मानित कर चुके हैं। वो सबसे बड़े मदरसे में भी योग करवा चुकी हैं।

राफिया नाज कहती हैं कि योग आत्मा से परमात्मा को जोड़ने का माध्यम है। इससे धर्म से कोई लेना देना नहीं है। राफिया ने ‘Yoga beyond religion’ नाम से एक स्कूल खोला है। इसमें वो गरीब और अनाथ बच्चों को मुफ्त में योग सिखाती हैं और अब तक कई लोगों को उन्होंने योग सिखाकर योग शिक्षक के रुप में नौकरी भी उपलब्ध करवाई है।

मंत्र पढ़ने के लिए किसी मुस्लिम को मजबूर नहीं करती

राफिया से जब ‘योग में मंत्र पढ़ने और सूर्य नमस्कार से परेशानी’ के संबंध में पूछा तो बेबाक राफिया ने कहा, “मुझे मुस्लिम होने के बावजूद मंत्र पढ़ने से कोई परेशानी नहीं है। अगर, किसी को परेशानी है तो वे मंत्र नहीं पढें। कहीं भी योग में मंत्र की अनिवार्यता नहीं है। मैंने कभी भी किसी भी मुस्लिम से नहीं कहा कि वो मंत्र पढ़कर योग करें। दरअसल, योग की वजह से मेरा विरोध करने वाले योग की वास्तविकता को ही नहीं जानते हैं।”

वो कहती हैं कि इन घटनाओं की वजह से बहुत सारे दोस्त छोड़कर चले गए। बहुत सारे रिश्तेदारों ने मुँह मोड़ लिया। इन चीजों की वजह से उन्होंने काफी लोगों को खो दिया। अब सिर्फ मम्मी-पापा और भाई-बहन ही हैं। राफिया कहती हैं कि जब रात को सोती हूँ तो सोचती हूँ कि पता नहीं कल का सवेरा देखना नसीब होगा या नहीं। खैर, सवाल तो अब भी वही है कि उन्हें राफिया नाज का योग करना गुनाह क्यों लगता है?

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