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केरल के 53 वर्षीय दोषी पादरी रॉबिन से शादी के लिए रेप पीड़िता पहुँची SC: 20 साल की हुई थी सजा, सोमवार को होगी सुनवाई

रेप पीड़िता ने पादरी वडक्कुमचेरी के लिए जमानत भी माँगी है ताकि उनकी शादी हो सके। अदालत सोमवार को मामले पर विचार करेगी।

केरल की एक बलात्कार पीड़िता ने उसका यौन शोषण करने वाले 53 वर्षीय कैथोलिक पादरी रॉबिन वडक्कुमचेरी से शादी करने की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। कोर्ट मामले की सुनवाई सोमवार (अगस्त 2, 2021) को करेगा। पादरी रॉबिन को फरवरी 2019 में एक अदालत द्वारा नाबालिग से बलात्कार और गर्भवती करने का दोषी पाए जाने के बाद 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई थी। उसे वेटिकन की तरफ से पादरी के पद से भी बर्खास्त कर दिया गया है।

पीड़िता ने वडक्कुमचेरी के लिए जमानत भी माँगी है ताकि उनकी शादी हो सके। रिपोर्ट्स के मुताबिक अदालत सोमवार को मामले पर विचार करेगी। इससे पहले, रॉबिन ने भी पीड़िता से शादी करने की माँग वाली एक याचिका के साथ केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन अदालत ने तब इसे ठुकरा दिया था

रॉबिन कन्नूर के पास एक पैरिश पादरी के रूप में सेवा कर रहा था और चर्च समर्थित स्कूल का प्रबंधक था। मई 2016 में लड़की कुछ डेटा-एंट्री कार्य के लिए वडक्कुमचेरी के कमरे में गई थी। उस साल उसने 10वीं के एग्जाम दिए थे। दोपहर में जब अन्य लड़कियाँ बाहर गई तो पादरी ने बच्ची को अपने बेडरूम में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। रॉबिन ने घटना के बारे में किसी को न बताने की बात कहकर उसे घर जाने दिया।

जिसके बाद लड़की ने अपने परिवार को इस बारे में कुछ नहीं बताया। वह स्कूल जाती थी और हर दिन स्थानीय चर्च में सामूहिक रूप से उपस्थित होती थी। बलात्कार के कारण वह गर्भवती हो गई थी, लेकिन किसी को इस बात का अहसास नहीं हुआ। 7 फरवरी, 2017 को, लड़की के पेट में तेज दर्द हुआ और उसे पास के एक अस्पताल में ले जाया गया। जाँच करने पर पता चला कि लड़की गर्भवती है। उसने बाद में एक बच्चे को जन्म दिया। उसने अपनी माँ को इस घटना के बारे में बताया। जिसके बाद परिवार ने वडक्कुमचेरी के सामने मामला उठाया, उसने अस्पताल के 30,000 रुपए के बिल का भुगतान करने की पेशकश की।

पादरी को 27 फरवरी, 2017 को कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास से गिरफ्तार किया गया था, जब वह देश से बाहर जाने की तैयारी कर रहा था। यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉस्को) अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने के बाद पादरी को 17 फरवरी, 2019 को थालास्सेरी की एक अदालत ने 20 साल कैद की सजा सुनाई थी। सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसकी माँ मुकर गई। मगर इसके बावजूद, अदालत पहले से एकत्र किए गए सबूतों के आधार पर आगे बढ़ी और फैसला सुनाया।

चार नन, एक अन्य पादरी और कॉन्वेंट से जुड़ी एक और महिला, जो पुलिस चार्जशीट में सह-आरोपित थे, को पर्याप्त सबूतों के अभाव में छोड़ दिया गया। संयोग से पिछले साल मार्च में, मंथवाडी (वायनाड जिले में) सूबे के अधिकारियों ने मीडिया को सूचित किया कि वेटिकन ने सारी प्रक्रिया से गुजरने के बाद रॉबिन को उसके पद से बर्खास्त करने का फैसला किया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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