Homeदेश-समाजसांप्रदायिक हिंसा में RSS कार्यकर्ता की मौत, बकरी चराने को लेकर हुई थी झड़प:...

सांप्रदायिक हिंसा में RSS कार्यकर्ता की मौत, बकरी चराने को लेकर हुई थी झड़प: MP के खंडवा में 19 गिरफ्तार

18 मई को खंडवा जिले के हापला और दीपाला गाँव के लोगों के बीच ये झड़प हुई थी। इसमें राजेश गंभीर रूप से घायल हुए थे और 13 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद रविवार को उसने इंदौर के अस्पताल में दम तोड़ दिया। इसके बाद...

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में बकरी चराने को लेकर दो गुटों में ऐसा विवाद हुआ कि एक RSS के कार्यकर्ता को अपनी जान गँवानी पड़ी। जानकारी के मुताबिक 18 मई को हुए इस विवाद में घायल राजेश फूलमाली ने 31 मई को अस्पताल में अपना दम तोड़ दिया।

राजेश की मौत की सूचना पाते ही जिला प्रशासन सक्रिय हो गया और संभावित तनाव को रोकने के लिहाज से पूरे गाँव को छावनी में तब्दील कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 18 मई को खंडवा जिले के हापला और दीपाला गाँव के लोगों के बीच ये झड़प हुई थी। इसमें राजेश गंभीर रूप से घायल हुए थे और 13 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद रविवार को उसने इंदौर के अस्पताल में दम तोड़ दिया।

उसके शव को सोमवार (जून 1, 2020) को जब अंतिम संस्कार के लिए खंडवा में उसके गाँव लाया गया, तो गाँव वालों ने हत्यारों की गिरफ्तारी, मुआवजा और सरकारी नौकरी की माँग को लेकर अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया।

हालाँकि प्रशासन के बहुत समझाने के बाद वो अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए। इस दौरान के उनके साथ भाजपा के स्थानीय नेता राम डंगोरे और देवेंद्र वर्मा भी मौजूद रहे।

खांडवा जिले के एसपी ने इस संबंध में न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि इस मामले के मद्देनजर 22 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इनमें से 19 को पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया है। बाकी बचे आरोपितों को पकड़ने का भी प्रयास जारी है।

इसके अलावा रामनगर पुलिस चौकी के इंस्पेक्टर प्रभारी को मामले में ढिलाई के लिए जिला पुलिस लाइंस में अटैच कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था, जिसमें दोनों ही पक्षों ने थाने में एफआईआर कराई थी।

वहीं, स्थानीय विश्‍व हिंदू परिषद (VHP) के एक सदस्य नवनीत अग्रवाल ने आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या होने पर यह आरोप लगाया है कि उनकी मौत दो समुदायों के बीच झड़प में नहीं हुई, बल्कि वो पूर्व नियोजित भीड़ की हिंसा का शिकार बने। हालाँकि पुलिस का कहना है कि अब तक की जाँच में कोई ऐसा तथ्य नहीं आया है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

जयललिता से तृषा कृष्णन तक: कैसे तमिलनाडु की राजनीति में बार-बार निशाने पर आईं महिलाएँ

जयललिता से तृषा कृष्णन तक मामला बताता है कि तमिलनाडु की राजनीति में महिलाओं को कैसे निशाना बनाया जाता है। एक विधानसभा के अंदर का तो दूसरा राजनीतिक मंच का।

इजरायल को 99% हथियार देने वाले पश्चिमी देशों को छोड़ भारत के खिलाफ प्रोपेगैंडा फैला रहा एमनेस्टी, समझिए गाजा की आड़ में किस खेल...

भारत डिफेंस एक्सपोर्ट में तेजी से उभरता खिलाड़ी है। भारत की प्राथमिकता अपने साथ अपने मित्र देशों को सुरक्षा उपकरण मुहैया कराना है।
- विज्ञापन -