Sunday, March 7, 2021
Home देश-समाज जब एयरपोर्ट, उद्योग, व्यापार आदि सरकार के हाथ में नहीं, तो फिर मंदिरों पर...

जब एयरपोर्ट, उद्योग, व्यापार आदि सरकार के हाथ में नहीं, तो फिर मंदिरों पर नियंत्रण कैसे: सद्गुरु

जग्गी वासुदेव कहते हैं कि तमिलनाडु राज्य में यह मंदिर और आस्था पूरे नियंत्रण में है और अगर आप एक नया मंदिर बनाना चाहते हैं जो कि यदि प्रसिद्ध हो जाता है, तो फ़ौरन सरकार की ओर से इसे टेक ओवर करने का नोटिस आ जाएगा।

मंदिरों पर सरकार का स्वामित्व या नियंत्रण देश में एक प्रमुख विषय रहा है। इस पर अब सद्गुरु जग्गी वासुदेव का एक वीडियो ट्विटर पर खूब शेयर किया जा रहा है। समाचार चैनल सीएनएन के रिपोर्टर आनंद नरसिम्हन के साथ इस बातचीत को सद्गुरु ने अपने ट्विटर अकाउंट से एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, “हम ऐसे समय में रहते हैं जहाँ हम समझते हैं कि सरकार को एयरलाइंस, हवाई अड्डों, उद्योग, खनन, व्यापार का प्रबंधन नहीं करना चाहिए, लेकिन फिर यह कैसे है कि सरकार द्वारा पवित्र मंदिरों का प्रबंधन किया जा सकता है। ये किस तरह से सरकारी प्रबंधन योग्य हो गए?”

इस वीडियो में सद्गुरु ईस्ट इण्डिया द्वारा लाए गए ‘मद्रास रेगुलेशन 1817’ का जिक्र करते हुए बताते हैं कि किस तरह मंदिरों पर अधिकार ज़माने के लिए मद्रास रेगुलेशन-111, 1817 लाया गया, लेकिन ईस्ट इंडिया कम्पनी ने 1840 में यह रेगुलेशन वापस ले लिया था। इसके बाद, 1863 में रिलिजियस एंडोवमेंट एक्ट लाया गया, जिसके अनुसार मंदिर ब्रिटिश ट्रस्टी को सौंप दिए गए।

ये ट्रस्टी ही मंदिर चलाते थे, लेकिन सरकार की दखलअंदाज़ी इसमें न्यूनतम होती थी। मंदिर का पैसा ज़्यादातर मंदिर के कार्यों के लिए ही प्रयोग किया जाता था। सैकड़ों मंदिर इस एक्ट के अनुसार चलते थे। जग्गी वासुदेव बताते हैं कि फिर ब्रिटिश सरकार ‘द मद्रास रिलीजियस एंड चैरिटेबल एंडावमैंट एक्ट-1925’ ले आई, जिससे अब हिन्दुओं के अलावा मुस्लिम और ईसाई संस्थाएँ भी इस कानून के दायरे में आ गईं। ईसाइयों और मुस्लिमों ने इसका कड़ा विरोध किया, तो सरकार को ये कानून दोबारा लाना पड़ा था।

विरोध के चलते ईसाई और मुस्लिमों को इस दायरे से बाहर करना पड़ा और नया कानून बनाया गया जिसका नाम था – ‘मद्रास हिन्दू रिलिजियस एंड एंडोवमेंट एक्ट-1927’। 1935 में इस एक्ट में बड़े बदलाव किए गए। आज़ादी के बाद तमिलनाडु सरकार ने वर्ष 1951 में एक कानून पारित किया- ‘हिन्दू रिलिजियस एंड एंडोवमेंट एक्ट’।

इस कानून को मठों ओर मंदिरों ने मद्रास हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। सरकार को बहुत सी धाराएँ हटानी पड़ीं और 1959 में तत्कालीन कॉन्ग्रेस राज्य सरकार ने हिन्दू रिलिजियस एंड चेरिटेबल एक्ट पास किया और बोर्ड भंग कर दिए गए। अब सरकारी ‘हिन्दू रिलिजियस एंड चेरिटेबल एंडावमेंट विभाग’ होता था, जिसका प्रमुख कमिश्नर होता है। तबसे मंदिरों में दान और चढ़ावे की 65 से 70% राशि प्रशासकीय कार्यों पर खर्च होती है।

सद्गुरु जग्गी कहते हैं, “अब 37,000 मंदिर सरकार के नियंत्रण में हैं। सिर्फ एक समुदाय के मंदिर सरकार के नियंत्रण में हैं। आप ऐसा किसी भी अन्य देश में नहीं सुनेंगे। हिन्दू मंदिरों की बात करते हुए अक्सर लोग कहते हैं कि चर्च, गुरुद्वारों और मस्जिदों का भी नियंत्रण किया जाना चाहिए। जबकि मैं कहता हूँ सेक्योलर देश में सरकार को मंदिरों या धार्मिक स्थलों में हस्तक्षेप से दूर रहना चाहिए चाहे वो किसी भी धर्म का हो।”

“यह समाधान नहीं है, जरुरी चीज यह है कि इतने सारे लोग जहाँ अपनी आस्था लेकर जाते हैं उन्हें आजाद होना चाहिए। उनके मानवाधिकारों के लिए यह होना चाहिए। अब विवाद और तर्क कुछ लोग यह देते हैं कि ये राजा के नियंत्रण में थे, तब वो सरकार थे इसलिए अब भी ये सरकार के ही पास होने चाहिए। यह सच्चाई नहीं है। राजा श्रद्दालू होते थे। वो कुछ मामलों में इतने बड़े श्रद्दालू हुआ करते थे कि कुछ साम्राज्यों में देवताओं को ही राजा मान लिया जाता था। राजा देवता के दीवान के रूप में काम करते थे। यानी हमारे मंत्री, और इस तरह सिर्फ देवता के नाम पर देवता के प्रतिनिधि की तरह वह राज करते थे। इस कारण वो लोग हमेशा दूसरी तरह के लोग रहे हैं।”

सरकारी नियंत्रण में मंदिरों की हो रही फजीहत का जिक्र करते हुए सद्गुरु कहते हैं, “यह खासकर दक्षिण भारतीय राज्यों में है। खासकर तमिलनाडु के मंदिरों का निर्माण बेहद खूबसूरती से हुआ है। उनकी इंजिनयरिंग और उनका आर्किटेक्चर.. अगर आप देखेंगे कि उन्होंने हजार-बारह सौ साल पहले किस तरह का निर्माण किया है, यह सब मंत्रमुग्ध कर देने वाला है। लेकिन बाद में यह सब चुरा लिया गया। सब कुछ बर्बाद होता रहा क्योंकि लोगों की भावनाएँ मंदिरों के प्रति उतनी प्रबल नहीं रहीं।”

“मेरी दिलचस्पी इन सब बातों में नहीं है। मेरी दिलचस्पी इस बात में है कि मौलिक रूप से अगर आप इस देश को आगे बढ़ाना चाहते हैं तो आपको सभी लोगों को साथ लेकर चलना होगा। आप लोगों के साथ भेदभाव नहीं कर सकते। सबके पास समान अधिकार होने चाहिए। तमिलनाडु के मंदिरों को स्वतंत्र करना ही होगा।”

बातचीत में ईशा फाउंडेशन के संस्थापक जग्गी वासुदेव (सद्गुरु) कहते हैं कि तमिलनाडु राज्य में यह मंदिर और आस्था पूरे नियंत्रण में है और अगर आप एक नया मंदिर बनाना चाहते हैं जो कि यदि प्रसिद्ध हो जाता है, तो फ़ौरन सरकार की ओर से इसे टेक ओवर करने का नोटिस आ जाएगा। वह सवाल करते हैं कि आखिर एक सेक्युलर देश में यह कैसे हो सकता है?

सद्गुरु आगे कहते हैं, “आप एक नई आस्था का निर्माण करिए अगर इतना जरुरी है, लेकिन चली आ रही आस्था के साथ बहुसंख्यक आबादी की आबादी की आस्था का संचालन सरकार के नियंत्रण में है। तमिलनाडु के कई मंदिरों में जो प्राचीन पत्थर थे, जिन पर खूबसूरत कला थी, उन पर सिल्वर पेंट लगा दिया गया।”

“मंदिर निर्माण के विज्ञान को हाशिए पर रख दिया गया है। सम्पत्ति को नुकसान पहुँचाया गया। मेरा सवाल ये है कि मौलिक अधिकारों का दमन क्यों किया जा रहा है? यह वो चीजें हैं जो दोबारा वापस नहीं आने वालीं। अब समय आ गया है इन्हें स्वतंत्र किया जाना चाहिए। लोग कहते हैं कि भ्रष्टाचार हो जाएगा। मैं इसे अपमानजनक मानता हूँ। क्या उन्हें लगता है कि बहुसंख्यक आबादी अपनी आस्था का प्रबंधन नहीं कर सकती? हम ऐसे समय में हैं, जब हमें लगता है कि सरकार को एयरलाइन, पोर्ट्स, बिजनेस, माइनिंग आदि को समाज के हाथों में देना चाहिए, तब मंदिरों को सरकार के नियंत्रण में देने की बात कैसे कर सकते हैं?”

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

अनुराग-तापसी को ‘किसान आंदोलन’ की सजा: शिवसेना ने लिख कर किया दावा, बॉलीवुड और गंगाजल पर कसा तंज

संपादकीय में कहा गया कि उनके खिलाफ कार्रवाई इसलिए की जा रही है, क्योंकि उन लोगों ने ‘किसानों’ के विरोध प्रदर्शन का समर्थन किया है।

‘मासूमियत और गरिमा के साथ Kiss करो’: महेश भट्ट ने अपनी बेटी को साइड ले जाकर समझाया – ‘इसे वल्गर मत समझो’

संजय दत्त के साथ किसिंग सीन को करने में पूजा भट्ट असहज थीं। तब निर्देशक महेश भट्ट ने अपनी बेटी की सारी शंकाएँ दूर कीं।

‘कॉन्ग्रेस का काला हाथ वामपंथियों के लिए गोरा कैसे हो गया?’: कोलकाता में PM मोदी ने कहा – घुसपैठ रुकेगा, निवेश बढ़ेगा

कोलकाता के ब्रिगेड ग्राउंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में अपनी पहली चुनावी जनसभा को सम्बोधित किया। मिथुन भी मंच पर।

मिथुन चक्रवर्ती के BJP में शामिल होते ही ट्विटर पर Memes की बौछार

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मिथुन चक्रवर्ती ने कोलकाता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली में भाजपा का दामन थाम लिया।

‘ग्लोबल इनसाइक्लोपीडिया ऑफ रामायण’ का शुभारंभ: CM योगी ने कहा – ‘जय श्री राम पूरे देश में चलेगा’

“जय श्री राम उत्तर प्रदेश में भी चलेगा, बंगाल में भी चलेगा और पूरे देश में भी चलेगा।” - UP कॉन्क्लेव शो में बोलते हुए सीएम योगी ने कहा कि...

‘राहुल गाँधी का ‘फालतू स्टंट’, झोपड़िया में आग… तमाशे की जिंदगानी हमार’ – शेखर गुप्ता ने की आलोचना, पिल पड़े कॉन्ग्रेसी

शेखर गुप्ता ने एक वीडियो में पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी की आलोचना की, जिससे भड़के कॉन्ग्रेस नेताओं ने उन्हें जम कर खरी-खोटी सुनाई।

प्रचलित ख़बरें

माँ-बाप-भाई एक-एक कर मर गए, अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने दिया: 20 साल विष्णु को किस जुर्म की सजा?

20 साल जेल में बिताने के बाद बरी किए गए विष्णु तिवारी के मामले में NHRC ने स्वत: संज्ञान लिया है।

मौलाना पर सवाल तो लगाया कुरान के अपमान का आरोप: मॉब लिंचिंग पर उतारू इस्लामी भीड़ का Video

पुलिस देखती रही और 'नारा-ए-तकबीर' और 'अल्लाहु अकबर' के नारे लगा रही भीड़ पीड़ित को बाहर खींच लाई।

‘शिवलिंग पर कंडोम’ से विवादों में आई सायानी घोष TMC कैंडिडेट, ममता बनर्जी ने आसनसोल से उतारा

बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए टीएमसी ने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। इसमें हिंदूफोबिक ट्वीट के कारण विवादों में रही सायानी घोष का भी नाम है।

‘40 साल के मोहम्मद इंतजार से नाबालिग हिंदू का हो रहा था निकाह’: दिल्ली पुलिस ने हिंदू संगठनों के आरोपों को नकारा

दिल्ली के अमन विहार में 'लव जिहाद' के आरोपों के बाद धारा-144 लागू कर दी गई है। भारी पुलिस बल की तैनाती है।

आज मनसुख हिरेन, 12 साल पहले भरत बोर्गे: अंबानी के खिलाफ साजिश में संदिग्ध मौतों का ये कैसा संयोग!

मनसुख हिरेन की मौत के पीछे साजिश की आशंका जताई जा रही है। 2009 में ऐसे ही भरत बोर्गे की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी।

पिछले 1000-1200 वर्षों से बंगाल में हो रही गोहत्या, कोई नहीं रोक सकता: ममता के मंत्री सिद्दीकुल्लाह का दावा

"उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने यहाँ आकर कहा था कि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो वह राज्य में गोहत्या को समाप्त कर देगी।"
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,301FansLike
81,971FollowersFollow
393,000SubscribersSubscribe