Homeदेश-समाज'संविधान की बात करने वालों के हाथ में फिर पत्थर': शिमोगा में बुर्का के...

‘संविधान की बात करने वालों के हाथ में फिर पत्थर’: शिमोगा में बुर्का के समर्थन में कॉलेज पर पत्थरबाजी, लगाई गई धारा-144

पत्थरबाजी के वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने कहा कि संविधान की बात करने वालों ने एक बार फिर से पत्थर उठा लिए।

कर्नाटक में शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब (बुर्का) पहन कर जाने की मुस्लिम छात्र-छात्राओं की माँग अब हिंसक प्रदर्शनों में बदल गई है। शिमोगा में हिजाब के समर्थन में मुस्लिम छात्रों ने कॉलेज पर पत्थरबाजी की। इसके बाद वहाँ धारा-144 लगा दी गई है। पत्थरबाजी के वीडियो वायरल होने के बाद लोगों ने कहा कि संविधान की बात करने वालों ने एक बार फिर से पत्थर उठा लिए। बता दें कि वहाँ मुस्लिम और हिन्दू छात्रों के बीच झड़प के वीडियोज भी सामने आए हैं।

कर्नाटक के कई इलाकों में शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहन कर आने के विरोध में भगवा शॉल के साथ प्रदर्शन करने के लिए निकले हिन्दू छात्रों के साथ बदतमीजी भी की गई और उन्हें धमकाया गया। पुलिस के बीच-बचाव से मामला शांत हुआ। साथ ही शिवमोगा मर भगवा ध्वज फहराने के वीडियोज भी सामने आए हैं। स्कूल में बड़ी संख्या में दोनों समुदायों के छात्र-छात्राएँ मौजूद हैं। उच्च-न्यायालय में भी इस मामले की सुनवाई चल रही है। सभी की नजरें वहाँ टिकी हुई हैं।

उधर उडुपी के महात्मा गाँधी मेमोरियल कालेज में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया है। हिजाब पहनकर प्रदर्शन कर रही छात्राओं के जवाब में भगवा गमछा में छात्रों ने प्रदर्शन किया। कुछ छात्राएँ महात्मा गाँधी मेमोरियल कॉलेज परिसर में हिजाब विवाद को लेकर प्रदर्शन कर रही थीं। तभी वहाँ छात्रों का एक समूह पहुँच गया। इस दौरान भगवा गमछा पहने छात्रों ने छात्राओं के सामने ही नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस-प्रशासन ने छात्रों को समझाने की कोशिश करते हुए उनसे क्लास में वापस जाने को कहा।

भले ही इस विरोध प्रदर्शन को ‘हिजाब’ के नाम पर किया जा रहा हो, लेकिन मुस्लिम छात्राओं को बुर्का में शैक्षणिक संस्थानों में घुसते हुए और प्रदर्शन करते हुए देखा जा सकता है। इससे साफ़ है कि ये सिर्फ गले और सिर को ढँकने वाले हिजाब नहीं, बल्कि पूरे शरीर में पहने जाने वाले बुर्का को लेकर है। हिजाब सिर ढँकने के लिए होता है, जबकि बुर्का सर से लेकर पाँव। कई इस्लामी मुल्कों में शरिया के हिसाब से बुर्का अनिवार्य है। कर्नाटक में चल रहे प्रदर्शन को मीडिया/एक्टिविस्ट्स भले इसे हिजाब से जोड़ें, ये बुर्का के लिए हो रहा है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

आर्कबिशप पीटर मचाडो कौन हैं, जो चाहता है धर्मांतरण विरोधी कानून और गोहत्या कानून में बदलाव: कर्नाटक में कांग्रेस अध्यक्ष खड़गे से क्या...

आर्कबिशप की कॉन्ग्रेस अध्यक्ष खड़गे से मुलाकात के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। बैंगलुरु में हुई इस मुलाकात के बाद आर्कबिशप ने खुद अपनी माँगों को सार्वजनिक किया।

अग्निवीरों के रोजगार पर कांग्रेस शासित राज्यों की चुप्पी क्यों? बीजेपी सरकारों ने बनाई नीति, विपक्षी राज्यों में अब भी इंतजार

अग्रिवीरों का पहला बैच 31 दिसंबर 2026 को अपना कार्यकाल पूरा करेगा जिसमें से 75 फीसदी सेना छोड़ देंगे। इनके जॉब को लेकर कॉन्ग्रेस सरकारें कोई प्लान नहीं बना पाई है।
- विज्ञापन -