Sunday, September 25, 2022
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मुहर्रम पर यौन घटनाएँ, गौहत्या… कट्टरपंथी-सांप्रदायिक माहौल: UP वाली गाइडलाइन के खिलाफ CM योगी को पत्र

डीजीपी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के चौथे बिंदु में लिखा है, "पुराने लंबित धार्मिक एवं सांप्रदायिक प्रकरणों तथा ऐसे नए उठने वाले विवादों, अपरंपरागत धार्मिक जुलूसों एवं कार्यों, यौन संबंधी घटनाओं, गौवंश वध/परिवहन आदि घटनाओं को लेकर पूर्व में अनेक अवसरों पर सांप्रदायिक सद्भाव प्रभावित होता रहा है। उक्त के दृष्टिगत विशेष सर्तकता अपेक्षित है।"

उत्तर प्रदेश में मुहर्रम से पहले पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) द्वारा जारी गाइडलाइन पर शुरू हुआ विवाद अभी तक चल रहा है। इसी क्रम में ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के अध्यक्ष यासूब अब्बास ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। इस पत्र में जारी की गई गाइडलाइन से ‘अपशब्द’ हटाने की माँग है।

इससे पहले 31 जुलाई को जारी किए गए इन दिशा-निर्देशों के ख़िलाफ़ मौलाना कल्बे जव्वाद ने माँग की थी कि डीजीपी अपना बयान वापस लें और सर्कुलर को लेकर माफी माँगे। जव्वाद का आरोप था कि सर्कुलर में गलत भाषा का इस्तेमाल किया गया है और साथ ही गौहत्या, यौन संबंधी कई घटनाओं का भी जिक्र किया गया है। मौलाना ने प्रदेश की मुहर्रम कमेटियों को पुलिस की किसी भी मीटिंग में शामिल नहीं होने का फरमान जारी किया था।

अब शिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष यासूब अब्बास का कहना है कि सर्कुलर में कई लाइनें हैं जिनसे शिया समुदाय में रोष है। उनकी माँग है कि आपत्तिजनक बातों को हटाया जाए जिसे मुहर्रम में मुस्लिम समुदाय करता भी नहीं है। उन्होंने जारी गाइडलाइन और उसकी भाषा को निंदनीय करार दिया। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने रविवार (अगस्त 8, 2021) को लखनऊ पुलिस कमिश्नर डीके ठाकुर से मुलाकात कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। बोर्ड ने मुहर्रम से पहले नई गाइडलाइन जारी करने की माँग की। इसके अलावा मुहर्रम में दरमियान ताजियादारी पर कोई रोक न लगाए जाने की भी माँग की गई है।

उल्लेखनीय है कि ये पूरा विवाद 31 जुलाई को पुलिस महानिदेशक की तरफ से मुहर्रम पर जारी किए गए सर्कुलर को लेकर हुआ। इसमें दिशा-निर्देश बताने से पहले ये समझाया गया कि मुहर्रम क्यों मनाया जाता है और इस दिन क्या-क्या होता है। इसमें ये भी लिखा है कि आखिर कैसे मुहर्रम के अवसर पर शिया समुदाय के लोग ‘तबर्रा’ पढ़ते हैं और सुन्नी समुदय के लोग आपत्ति जताकर ‘मदहे-सराबा’ पढ़ते हैं। इस सर्कुलर में मुहर्रम को सांप्रदायिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील कहा गया। साथ ही ये भी लिखा गया कि कैसे इस दिन माहौल बिगड़ने की संभावना बढ़ जाती है और कट्टरपंथी तत्व अराजकता फैला सकते हैं।

दिशा-निर्देशों के चौथे बिंदु में लिखा है, “पुराने लंबित धार्मिक एवं सांप्रदायिक प्रकरणों तथा ऐसे नए उठने वाले विवादों, अपरंपरागत धार्मिक जुलूसों एवं कार्यों, यौन संबंधी घटनाओं, गौवंश वध/परिवहन आदि घटनाओं को लेकर पूर्व में अनेक अवसरों पर सांप्रदायिक सद्भाव प्रभावित होता रहा है। उक्त के दृष्टिगत विशेष सर्तकता अपेक्षित है।”

जारी किए गए दिशा-निर्देश

इसके बाद बताया गया कि इस बार मुहर्रम पर ताजिया का न जुलूस निकलेगा और ना ही कर्बला में मेला लगेगा। दो-तीन की संख्या में लोग ताजिया की मिट्टी ले जाकर कर्बला में ठंडा करेंगे। रास्ते से अतिक्रमण हटवा दिया जाएगा ताजिया चौक की सफाई भी कराई जाएगी। इस बार कोविड को देखते हुए जिलों में मुहर्रम जुलूस की अनुमति नहीं दी गई। डीजीपी ने जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया कि यूपी के सभी जरूरी स्थानों पर चेकिंग की जाए, मौलानाओं से संवाद बनाने और बीट स्तर पर हालातों का जायजा लेकर व्यवस्था बनाएँ।

इसी सर्कुलर में इस्तेमाल की गई भाषा से शिया समुदाय के मौलानाओं, इमामों में आक्रोश है। पूर्व में शिया मौलाना कल्बे सिब्तैन नूरी ने गाइडलाइन के ड्राफ्ट को तुरंत बदलने की माँग की थी। मौलाना कल्बे सिब्तैन नूरी ने कहा था कि मुहर्रम के संबंध में पुलिस प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइन से शिया समुदाय के धार्मिक जज़्बात को ठेस पहुँची है। इसमें मुहर्रम व शिया समुदाय पर सीधे तौर पर बेबुनियाद इल्ज़ाम लगाए गए हैं। इस ड्राफ्ट को तुरंत बदला जाए।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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