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पढ़ाई छूटी, स्टेशन पर कटी रातें और अब मिला पद्मश्री: पढ़ें- सत्यनारायण नुवाल की कहानी जिनकी सोलर इंडस्ट्रीज के हथियारों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में दिखाया जलवा

नुवाल एक प्रथम पीढ़ी के व्यवसायी हैं जिन्होंने 1990 के दशक के मध्य में कोल इंडिया लिमिटेड को वाणिज्यिक विस्फोटक की आपूर्ति करने वाले एक छोटे से व्यवसाय के रूप में शुरुआत की थी। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में तब सफलतापूर्वक प्रवेश किया जब उनकी कंपनी ने 2010 में सैन्य-ग्रेड विस्फोटक का उत्पादन शुरू किया।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया लिमिटेड के संस्थापक और चेयरमैन सत्यनारायण नुवाल को ट्रेड और इंडस्ट्री के क्षेत्र में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, उनकी कंपनी द्वारा बनाए गए ‘नागास्त्र’ हथियार सिस्टम का पिछले साल मई में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया था।

नुवाल, सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड (SDAL) के भी चेयरमैन हैं, जो देश की पहली और सबसे बड़ी निजी सैन्य-स्तरीय विस्फोटक निर्माण इकाइयों में से एक मानी जाती है। खास बात यह है कि SDAL ने ब्रह्मोस मिसाइल के लिए बूस्टर भी उपलब्ध कराए हैं।

उद्योग और समाज में असाधारण योगदान के लिए चुने गए सत्यनारायण नुवाल हाल के वर्षों में महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र से पद्मश्री पाने वाले इकलौते कारोबारी हैं। उन्होंने TOI से बातचीत में कहा, “मुझे उम्मीद नहीं थी कि मुझे इतना बड़ा सम्मान मिलेगा। यह पुरस्कार देश के लिए मेरी जिम्मेदारी को और बढ़ाता है। रक्षा क्षेत्र में कारोबार करने का मकसद मुनाफा नहीं बल्कि राष्ट्रसेवा है।”

नुवाल पहली पीढ़ी के उद्यमी हैं। उन्होंने 1990 के दशक के मध्य में बेहद साधारण शुरुआत की थी, जब वह कोल इंडिया लिमिटेड को व्यावसायिक विस्फोटक सप्लाई करते थे। उस दौर में वह अकेले यात्रा करते थे और कई बार रेलवे प्लेटफॉर्म पर घंटों इंतजार करना पड़ता था। बाद में 2010 में उनकी कंपनी ने सैन्य-स्तरीय विस्फोटक बनाना शुरू किया और रक्षा क्षेत्र में प्रवेश किया।

74 वर्षीय नुवाल बताते हैं, “निजी क्षेत्र की किसी कंपनी के लिए यह बिल्कुल नया क्षेत्र था। मैं अक्सर सशस्त्र बलों को सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों के बारे में सुनता था और समझ गया था कि देश को इस क्षेत्र में और उद्यमियों की जरूरत है। इसी सोच के साथ हमने रक्षा क्षेत्र में छोटा-सा योगदान देने का फैसला किया।”

इस महीने SDAL के दौरे के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पुष्टि की कि कंपनी का नागास्त्र ड्रोन-आधारित लॉइटरिंग म्यूनिशन भारत की इस अहम सैन्य कार्रवाई में दुश्मन के ठिकानों पर सटीक निशाना साधने में सफल रहा।

नुवाल ने उस दौरान बताया था, “अमेरिका या अन्य देशों में एक साथ चार मिसाइलें दागी जा सकती हैं लेकिन हमारा ‘भार्गवास्त्र’ एक साथ 60 माइक्रो-मिसाइलें फायर करता है। दुनिया में ऐसा सिस्टम अभी कहीं और मौजूद नहीं है।” भार्गवास्त्र एक मल्टी-लेयर माइक्रो-मिसाइल एंटी-ड्रोन या काउंटर अनमैन्ड एरियल सिस्टम (C-UAS) है।

रक्षा मंत्री को ‘प्रलय’ शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल के बारे में भी जानकारी दी गई थी। कंपनी के एक अधिकारी ने बताया, “हम प्रलय के लिए कई मोटर बनाते हैं लेकिन हमारी क्षमता पूरी मिसाइल बनाने की भी है। अगर मौका मिले तो हम दो महीने में पूरी मिसाइल विकसित कर सकते हैं।”

इसके अलावा SDAL ने SE-BEX-2 नाम का हाई-एनर्जी मटीरियल भी विकसित किया है, जिसे परमाणु बम के बाद सबसे शक्तिशाली विस्फोटक माना जाता है और जो पारंपरिक TNT से लगभग दोगुना ताकतवर है। SDAL पहली निजी कंपनी बनी जिसने सेना को पूरा म्यूनिशन सिस्टम उपलब्ध कराया, जिसमें पुराने मॉडल की जगह मल्टीमोडल हैंड ग्रेनेड भी शामिल हैं।

कंपनी ने शुरुआत में पिनाका रॉकेट के ऑर्डर पूरे किए। इसके बाद इसने मल्टीमोडल ग्रेनेड बनाए, जो किसी निजी कंपनी द्वारा तैयार किया गया पहला पूरा सिस्टम था। समय के साथ कंपनी ने एंटी-ड्रोन सिस्टम और ड्रोन निर्माण में भी कदम बढ़ाया। हाल ही में SDAL ने नागपुर के मिहान-SEZ में रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों के लिए जमीन खरीदी है।

आर्थिक तंगी के कारण छोड़नी पड़ी पढ़ाई

फोर्ब्स की सूची के अनुसार, सत्यनारायण नुवाल भारत के सबसे अमीर लोगों में शामिल हैं। उनकी कुल संपत्ति लगभग 5.2 अरब डॉलर (46,500 करोड़ से अधिक) आंकी गई है। रक्षा क्षेत्र में उनकी कंपनी को व्यापक पहचान मिली है और यह सशस्त्र बलों के लिए विस्फोटक बनाने का सरकारी लाइसेंस पाने वाली भारत की पहली निजी कंपनी थी।

हालाँकि, इस विशाल कारोबारी साम्राज्य की नींव राजस्थान के भीलवाड़ा के एक साधारण परिवार में पड़ी थी। उनके पिता एक सरकारी अकाउंटेंट थे, जो बचपन से ही व्यावसायिक समझ विकसित करने पर जोर देते थे। आर्थिक तंगी के कारण नुवाल 10वीं कक्षा के बाद पढ़ाई जारी नहीं रख सके।

इसके बाद वह अपने गुरु के साथ मथुरा में एक साल रहे और छोटे-मोटे व्यवसायों में हाथ आजमाया। उन्होंने फोर्ब्स को दिए इंटरव्यू में कहा था, “पढ़ाई से ज्यादा मेरी रुचि कारोबार करने में थी।” घर लौटने के बाद उन्होंने फाउंटेन पेन की स्याही बनाने, लीजिंग बिजनेस और ट्रांसपोर्ट कंपनी जैसे कई प्रयोग किए।

इसी दौरान 19 साल की उम्र में उनकी शादी हो गई और जिम्मेदारियाँ बढ़ती चली गईं। परिवार का खर्च चलाने के लिए वह 1977 में महाराष्ट्र के चंद्रपुर चले गए, जहाँ एक रिश्तेदार के साथ काम किया। कई बार हालात ऐसे थे कि उन्हें रेलवे स्टेशन पर ही रात गुजारनी पड़ती थी।

इसी दौरान उनकी मुलाकात अब्दुल सत्तार अल्लाह भाई से हुई, जिनके पास गनपाउडर डिपो था और विस्फोटक इस्तेमाल का लाइसेंस था। नुवाल ने वह जगह 1,000 महीने के किराए पर लेने की कोशिश की लेकिन यह रकम भी उनके लिए बड़ी थी। धीरे-धीरे उनका कारोबार बढ़ा और उन्हें कोयला खदानों से बड़े ऑर्डर मिलने लगे।

1984 तक उनकी कंपनी कंसाइनमेंट एजेंसी बन गई और 1990 तक वह एक बड़े डीलर बन चुके थे।

एक नई सुबह की शुरुआत

1990 का दशक नुवाल के लिए निर्णायक साबित हुआ। अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने 1995 में नागपुर में सोलर इंडस्ट्रीज की स्थापना की। उन्होंने बैंक से 60 लाख रुपए की व्यवस्था की और अपनी अन्य बचत भी इसमें लगाई। इसके बाद उन्होंने स्लरी विस्फोटकों का उत्पादन शुरू किया और आगे चलकर डेटोनेटर के साथ बड़े पैमाने पर विस्फोटक निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा। कोल इंडिया लिमिटेड भी उनकी कंपनी के प्रमुख ग्राहकों में शामिल था।

2006 में कंपनी ने शेयर बाजार में कदम रखा। उस समय कंपनी का शुद्ध मुनाफा लगभग 11 करोड़ रुपए और टर्नओवर 78 करोड़ रुपए था। जुटाई गई पूंजी से उत्पादन बढ़ाया गया और 13 नई इकाइयाँ स्थापित की गईं। सोलर इंडस्ट्रीज ने जाम्बिया, घाना, नाइजीरिया, तुर्की, तंजानिया और दक्षिण अफ्रीका में प्लांट लगाए।

इसके अलावा थाईलैंड, इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया में भी उत्पादन इकाइयाँ शुरू कीं। भारत में कंपनी की मौजूदगी नौ राज्यों के 29 शहरों तक फैल गई। यह देश की पहली निजी कंपनी बनी जिसे सशस्त्र बलों के लिए हथियार और विस्फोटक बनाने का सरकारी लाइसेंस मिला। नुवाल समझ चुके थे कि भविष्य में गोला-बारूद का स्वदेशी निर्माण जरूरी होगा।

इसलिए उन्होंने ग्रेनेड, मध्यम और बड़े कैलिबर का गोला-बारूद, हाई एनर्जी एक्सप्लोसिव (HMX), प्रोपेलेंट और वॉरहेड बनाने की क्षमता विकसित की। सोलर इंडस्ट्रीज को करीब 450 करोड़ रुपए का मल्टीमोड हैंड ग्रेनेड सप्लाई का ऑर्डर मिला, जो दो साल में पूरा किया जाना था। यह भारत के रक्षा इतिहास में पहली बार था जब किसी निजी कंपनी को ऐसा गोला-बारूद ऑर्डर मिला।

संदीप मेटैलिक्स के चेयरमैन संदीप अग्रवाल ने नुवाल के संघर्षों को याद करते हुए कहा, “उन्होंने खनन उद्योग को विस्फोटक सप्लाई करने से शुरुआत की। समय के साथ उन्होंने ऐसे सिस्टम विकसित किए, जो पहले निजी क्षेत्र में नहीं थे। 2010 से उन्होंने रक्षा क्षेत्र में निवेश शुरू किया और अब जाकर कंपनी को उसका फल मिलना शुरू हुआ है।”

आज सोलर इंडस्ट्रीज DRDO द्वारा विकसित कई रणनीतिक मिसाइल प्रणालियों जैसे प्रलय, पिनाका, आकाश और अन्य गाइडेड वेपन सिस्टम के निर्माण में भारत की प्रमुख निजी साझेदार है। कंपनी सॉलिड रॉकेट मोटर और प्रोपल्शन सिस्टम की भी बड़ी सप्लायर है।

सत्यनारायण नुवाल को सोलर इंडस्ट्रीज को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए भी जाना जाता है। शिक्षा, समाज कल्याण और सामुदायिक विकास के क्षेत्र में उनके योगदान की देशभर में सराहना हुई है। उन्हें मिला पद्मश्री सम्मान न केवल उनके कारोबारी सफर की उपलब्धि है, बल्कि राष्ट्र निर्माण में उनकी अहम भूमिका को भी रेखांकित करता है।

(यह रिपोर्ट मूल रुप से अंग्रेजी में रुक्मा राठौर ने लिखी है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

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Rukma Rathore
Rukma Rathore
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