केरल: SC के आदेश के बावजूद जैकोबाइट व ऑर्थोडॉक्स के बीच चर्च के अधिकार को लेकर संघर्ष, कई गिरफ्तार

चर्च का संचालन अपने हाथ में लेने के लिए जैकोबाइट ईसाई और ऑर्थोडॉक्स ईसाई एक-दूसरे से लड़ रहे हैं। फ़िलहाल चर्च पर जैकोबाइट ईसाइयों का नियंत्रण है।

केरल के एक चर्च पर नियंत्रण को लेकर ईसाई समुदायों की लड़ाई थमने का नाम नहीं ले रही है। एर्नाकुलम ज़िले के पिरवोम स्थित सेंट मेरी चर्च में उस समय अफ़रा-तफ़री मच गई जब सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार पुलिस ने चर्च में प्रवेश करने की कोशिश की।

पिरवोम में स्थित चर्च में गुरुवार को उस समय हालात बिगड़ गए जब ऑर्थोडॉक्स ग्रुप ने नियंत्रण लेने की कोशिश की और जैकबाइट्स ने नियंत्रण देने से इनकार कर दिया। आत्महत्या की धमकियों के बीच, जिला कलेक्टर एस सुहास मौके पर पहुँचे और प्रदर्शनकारियों के साथ उन्होंने बात की। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन शीर्ष अदालत के आदेशों का पालन कर रही है। आख़िरकार, पुलिस ने चर्च में प्रवेश किया और प्रदर्शनकारियों को गिरफ़्तार करना शुरू कर दिया। दरअसल पुलिस इतनी मुस्तैदी इसलिए दिखा रही है क्योंकि कोर्ट ने अपने आदेश पर की गई कार्रवाई की गुरुवार दोपहर 1.45 बजे तक रिपोर्ट माँगी थी।

दरअसल, चर्च का संचालन अपने हाथ में लेने के लिए जैकोबाइट ईसाई और ऑर्थोडॉक्स ईसाई एक-दूसरे से लड़ रहे हैं। फ़िलहाल चर्च पर जैकोबाइट ईसाइयों का नियंत्रण है।

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बता दें कि 3 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने चर्च प्रशासन को ऑर्थोडॉक्स ईसाइयों को देने का आदेश दिया था। इस आदेश के चलते 1,100 चर्च का नियंत्रण ऑर्थोडॉक्स ईसाइयों के पास चला गया।

2017 में, सुप्रीम कोर्ट ने मलंकरा चर्च के 1934 के संविधान को बरक़रार रखा था जिसके तहत केरल में 1,100 पैरिश (पादरी का इलाक़ा) और चर्चों के नियंत्रण को ऑर्थोडॉक्स समूह के नियंत्रण में देना था, लेकिन अधिकांश चर्चों को नियंत्रित करने वाले जैकबाइट्स इस बात के लिए तैयार नहीं थे।

केरल में इस तनाव को लेकर राजनीति भी गरमा गई है। राज्य में उपचुनाव होने हैं और नेतागण दोनों ही समुदायों की जनसंख्या को देखते हुए उन्हें अपनी तरह लुभाने में लगे हैं। जैकोबाइट पादरियों ने ऑर्थोडॉक्स ईसाई मानवाधिकार उल्लंघन करने का आरोप लगाया। जैकोबाइट ईसाई ने विरोध में धरना दिया, जिसमें केरल सरकार और विपक्ष के कई नेता शामिल हुए। वहीं, जैकोबाइट धड़े का आरोप है कि ऑर्थोडॉक्स उनके मृत रिश्तेदारों की अंतिम क्रिया में भी बाधा पहुँचा रहे हैं और यहाँ तक कि मरे हुए लोगों को भी शांति से नहीं रहने दे रहे।

इसी मामले में केरल हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ जाते हुए यथास्थिति बहाल रखने का निर्णय दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि उच्च न्यायालय को उच्चतम न्यायालय के आदेश के साथ छेड़छाड़ करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने जोड़ा था कि केरल के जजों को यह बताया जाना चाहिए कि वे भी भारत के ही अंग हैं। एक बुजुर्ग महिला की मृत्यु के बाद चर्च के ऑर्थोडॉक्स गुट ने परिवार की बात न मानते हुए जैकोबाइट पादरी से अंतिम क्रिया-कर्म की प्रक्रिया संपन्न कराने से मना कर दिया था, जिसके बाद दोनों गुट भिड़ गए थे।

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