Friday, July 19, 2024
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सरकारी नौकरी में ब्राह्मणों का बोलबाला… तमिलों को आरक्षण दो: तमिलनाडु में ‘उत्तर भारतीयों’ की भर्ती के खिलाफ प्रदर्शन, TDPK समर्थकों ने बैरिकेड तोड़े

डीएमके समर्थक संगठन टीपीडीके ब्राह्मण विरोधी बयानबाजी के साथ ही राज्य में क्षेत्रवाद और संप्रदायवाद को बढ़ावा देने में सबसे आगे रहा है। अक्टूबर 2022 में, टीपीडीके ने सीबीएसई की किताब में 'वर्ण व्यवस्था' को लेकर एक चैप्टर के विरोध में प्रदर्शन किया था।

तमिलनाडु में हिंदी भाषियों के साथ हुई कथित हिंसा के बीच अब वहाँ सरकारी नौकरी में उत्तर भारतीयों और ब्राह्मणों के प्रभुत्व के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। प्रदर्शनकारी हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति में आरक्षण की माँग कर रहे हैं। यह प्रदर्शन राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके के सहयोगी संगठन टीपीडीके के नेतृत्व में हो रहा है। टीपीडीके कार्यकर्ता केंद्र सरकार की नौकरियों में तमिलों को आरक्षण देने की भी माँग कर रहे हैं।

रिपब्लिक की रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु के चेन्नई में स्थित शास्त्री भवन के सामने द्रविड़ समर्थक संगठन, थानथाई पेरियार द्रविड़ कज़गम (टीपीडीके) के कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी राज्य की सरकारी नौकरियों में उत्तर भारतीयों और ब्राह्मणों के प्रभुत्व का विरोध कर रहे हैं। साथ ही उनकी माँग है कि केंद्र सरकार की नौकरियों में तमिलों को आरक्षण दिया जाए। यही नहीं, प्रदर्शनकारी हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति में आरक्षण की माँग कर रहे हैं।

टीपीडीके पूरे चेन्नई में प्रदर्शन करने की योजना बना रहा है। इसमें टीपीडीके का उद्देश्य खासतौर से सरकारी कार्यालयों के सामने विरोध प्रदर्शन करने का है। प्रदर्शन को देखते हुए भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की की गई थी। टाइम्स नाउ द्वारा शेयर किए वीडियो में टीपीडीके समर्थक पुलिस बैरिकेड्स को तोड़ने का प्रयास करते देखे जा सकते हैं। प्रदर्शनकारियों के उपद्रव को देखते हुए पुलिस को लाठीचार्ज भी करना पड़ा है। वहीं, कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया है।

गौरतलब है कि डीएमके समर्थक संगठन टीपीडीके ब्राह्मण विरोधी बयानबाजी के साथ ही राज्य में क्षेत्रवाद और संप्रदायवाद को बढ़ावा देने में सबसे आगे रहा है। अक्टूबर 2022 में, टीपीडीके ने सीबीएसई की किताब में ‘वर्ण व्यवस्था’ को लेकर एक चैप्टर के विरोध में प्रदर्शन किया था।

यही नहीं, नवंबर 2022 में इसी संगठन ने तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि को हटाने के लिए मद्रास उच्च न्यायालय के समक्ष एक याचिका दायर की थी। टीपीडीके के कार्यकर्ता हिंसा में भी शामिल रहे हैं। साल 2013 में श्री अरबिंदो आश्रम में हुई हिंसा मामले में टीपीडीके के नाम सामने आया था।

तमिलनाडु में हो रहे इस प्रदर्शन को राज्य में हिंदी भाषी मजदूरों के साथ हुई कठिन हिंसा से जोड़कर भी देखा जा रहा है। दरअसल, इस प्रदर्शन में टीपीडीके के कार्यकर्ता नौकरियों में उत्तर भारतीयों के प्रभुत्व का विरोध कर रहे हैं। उत्तरभारत में ही हिंदी बोली जाती है। इसलिए ऐसा कहा जा रहा है कि कथित हिंसा की खबरों के बाद ही यह प्रदर्शन शुरू किया गया है।

हिंदी भाषियों के खिलाफ हिंसा

बता दें कि बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर ऐसे दावे किए जा रहे थे कि तमिलनाडु में हिंदी भाषियों के साथ हिंसा हो रही है। सोशल मीडिया पर वायरल कुछ वीडियो में लोगों को मारपीट करते हुए दिखाया गया था। हालाँकि तमिलनाडु सरकार ने ऐसे किसी भी हिंसा की घटनाओं का खंडन किया है। तमिलनाडु पुलिस ने कहा है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो फेक हैं। इनमें से ज्यादातर वीडियो तमिलनाडु के हैं भी नहीं। यही नहीं, तमिलनाडु पुलिस ने हिंदी भाषियों के साथ हो रही हिंसा की अफवाह फैलाने के आरोप में 9 लोगों के खिलाफ FIR भी दर्ज की है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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