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UP के मदरसों में किन विषयों की हो रही है पढ़ाई, CM योगी ने माँगी रिपोर्ट: बिना मान्यता और अनुदान लेने वाले संस्थानों का सर्वे भी जारी

विशेष सचिव आनंद सिंह ने यह भी सूचना माँगी है कि अनुदान प्राप्त करने वाले मदरसों में इस वित्त वर्ष के दौरान कुल कितने विषयों की कितनी पुस्तकें दी गई हैं और वे किन-किन भाषाओं में हैं। इसके साथ ही यह भी बताना होगा कि उर्दू माध्यम की कुल वितरित पुस्तकों की संख्या कितनी है। ये सारा विवरण जिलेवार उपलब्ध कराना होगा।

उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड से पंजीकृत और सरकार से अनुदान पाने वाले मदरसों के सर्वे के बाद अब योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) की सरकार अब इनके सिलेबस की जाँच कराने जा रही है। सरकार ने प्रदेश में अनुदान पाने वाले मदरसों में किन-किन विषयों की पढ़ाई कराई जा रही इसकी जानकारी माँगी है।

उत्तर प्रदेश के पाठ्यपुस्तक अधिकारी डॉ. पवन कुमार ने सभी जिलों के बेसिक शिक्षा पदाधिकारियों से इसकी जानकारी माँगी है। पवन कुमार ने मदरसों में पढ़ाई जाने वाली विषयों की जानकारी के साथ-साथ इनमें पढ़ने वाले बच्चों को किस विषय की कितनी पुस्तकों का नि:शुल्क वितरण किया गया है, इसकी भी रिपोर्ट अधिकारियों से देने के लिए कहा है।

गौरतलब है कि यूपी के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री धर्मपाल सिंह ने मदरसों में पुस्तकों के वितरण को लेकर प्रारूप बदलने का निर्देश दिया था। उन्होंने कहा था कि मदरसे के छात्रों को कोर्स की NCERT किताबों के लिए उनके अभिभावकों के खातों में सीधे पैसे दिए जाएँ।

हालाँकि, इस योजना पर अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ अनुभाग के विशेष सचिव आनंद कुमार सिंह ने सवाल खड़ा किया। आनंद सिंह ने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक को पत्र भेजकर कहा है किअभिभावकों के खातों में सीधा पैसा डालने के निर्णय से धनराशि के दुरुपयोग की आशंका है।

उन्होंने कहा कि सर्व शिक्षा अभियान के तहत प्रदेश भर में अनुदान प्राप्त करने वाले 558 मदरसों में कक्षा आठ तक के छात्रों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें दी जा ही हैं। उन्होंने कहा कि एक ही योजना में दोहरा व्यय भी होगा। इसलिए अभिभावकों के खाते में पैसे भेजने के निर्णय पर पुनर्विचार किया जाएगा।

प्रदेश में सरकार से अनुदान लेने वाले और गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे करने का आदेश पहले ही दिया गया है। 10 सितंबर 2022 से जारी इस सर्वे का रिपोर्ट 15 नवंबर 2022 को शासन को पेश करना है। इसलिए सर्वे का काम बहुत तेजी से चल रहा है।

इस सर्वे में यह जानकारी सामने आई है कि अकेले यूपी के सहारनपुर में अब तक 360 मदरसे ऐसे मदरसे मिले हैं, जो सरकार से अनुदान नहीं लेते हैं और इन्हें मान्यता भी नहीं मिली है। इनमें भारत के सबसे बड़े मदरसों में शामिल देवबंद का दारुल उलूम मदरसा (Darul Ulum Deoband Madarsa) भी शामिल है।

देवबंद का दारुल उलूम मदरसा लगभग 156 साल पुराना है और यह मदरसा सोसाइटी एक्ट के तहत पंजीकृत है। सर्वे के दौरान यह बात सामने आई है कि दारुल उलूम यूपी मदरसा बोर्ड में पंजीकृत नहीं है और यह सरकारी सहायता भी नहीं लेता है।

सहारनपुर के सदर तहसील में गैर-सहायता प्राप्त मदरसों की संख्या सबसे अधिक 123 है। वहीं, बेहट तहसील में इनकी संख्या सबसे कम है। हालाँकि, सर्वे का काम अभी भी जारी है और इन मदरसों की संख्या और बढ़ सकती है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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