उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा कृषि प्रधान राज्य है, जहाँ करोड़ों किसान प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर हैं। राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है। हाल के वर्षों में उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादन को स्थिर रखने तथा खेती को अधिक लाभकारी बनाने के लिए अनेक ठोस कदम उठाए हैं।
खासतौर पर उर्वरकों की उपलब्धता, उनकी आपूर्ति व्यवस्था, कालाबाजारी पर नियंत्रण और किसानों तक समय पर खाद पहुँचाने के क्षेत्र में योगी आदित्यनाथ सरकार की कार्यशैली उल्लेखनीय रही है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए खाद और उर्वरकों की आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। प्रदेश में यूरिया, डीएपी, एनपीके और एमओपी जैसे प्रमुख उर्वरकों का पर्याप्त भंडारण किया गया है।
राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के साथ मिलकर किसानों तक समय पर खाद पहुँचाने की प्रभावी व्यवस्था विकसित की है। यूपी सरकार का कहना है कि प्रदेश में लाखों मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध हैं और लगातार अतिरिक्त आवंटन भी कराया जा रहा है।
किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था
उत्तर प्रदेश सरकार ने खरीफ और रबी सीजन में खाद की कमी न होने देने के लिए बड़े स्तर पर भंडारण किए। एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश सरकार ने लगभग 4.8 मिलियन टन उर्वरकों का भंडार तैयार किया, जो कुल मांग का लगभग 84 प्रतिशत था। राज्य सरकार ने केवल घोषणाएँ नहीं कीं, बल्कि जमीनी स्तर पर खाद उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी प्रशासनिक प्रबंधन भी किया।
खेती में समय पर खाद की उपलब्धता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। यदि बुआई या सिंचाई के समय किसान को खाद नहीं मिले तो इसका सीधा असर फसल पर पड़ता है। इसे ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने बहुस्तरीय निगरानी तंत्र विकसित किया है।
दैनिक जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार कृषि विभाग ने ये भी स्पष्ट किया है कि प्रदेश के सभी जिलों में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध हैं तथा किसानों को अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। इस प्रशासनिक पारदर्शिता ने सरकार और किसानों के बीच विश्वास बढ़ाने का काम किया है।
कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई
देश के कई राज्यों में खाद की कालाबाजारी और कुछ अन्य परेशानियों से जूझ रहे किसानों के लिए बड़ी समस्या रही है। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार ने इस चुनौती से निपटने के लिए कठोर कदम उठाए हैं।
सरकार ने उर्वरकों की टैगिंग एवं पॉइंट ऑफ सेल (PoS) मशीनों के माध्यम से बिक्री को अनिवार्य बनाया है। किसानों के पहचान पत्र के माध्यम से खाद वितरण की व्यवस्था लागू की गई है। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि अनुदानित उर्वरक वास्तविक किसानों तक ही पहुँचे।
सरकार ने उर्वरकों की अनधिकृत बिक्री, जमाखोरी तथा कालाबाजारी पर उर्वरक नियंत्रण आदेश एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के अंतर्गत कार्रवाई सुनिश्चित की है।
एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार योगी सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए और उर्वरकों की कालाबाजारी करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसके जरिए किसानों के हितों की रक्षा के लिए ये कदम अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हुआ।
वैज्ञानिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा
सरकार ने किसानों से सही मात्रा में खाद के उपयोग की अपील की है। कृषि वैज्ञानिकों द्वारा सुझाई गई मात्रा के अनुसार ही उर्वरक खरीदने और प्रयोग करने का निर्देश दिया गया है।
यह पहल कई तरह से महत्वपूर्ण है। पहली इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है। इसके अलावा किसानों के फसल लगाने की लागत में कमी आती है। सही मात्रा में खाद के उपयोग से उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ती है और सबसे अहम पहलू येहा कि इससे पर्यावरण संरक्षण भी होता है।
उत्तर प्रदेश सरकार लगातार ‘संतुलित उर्वरक उपयोग’ की अवधारणा को बढ़ावा दे रही है। कृषि विभाग किसानों को जागरूक करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, किसान गोष्ठियाँ और कृषि मेलों का आयोजन भी कर रहा है।
कृषि क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की बढ़ती प्रगति
उत्तर प्रदेश ने हाल के वर्षों में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों का योगदान बढ़कर लगभग 24.9 प्रतिशत तक पहुँच गया है।
यह उपलब्धि कई कारणों से संभव हुई है। समय पर खाद और बीज की उपलब्धता मिली है। इसके अलावा सिंचाई व्यवस्था को बेहतर किया गया है। सरकार ने फसल विविधीकरण के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया है। कृषि तकनीक का विस्तार लगातार किया जा रहा है। और सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है।
एक रिपोर्ट कहती है कि उत्तर प्रदेश की कृषि वृद्धि दर 17.7 प्रतिशत तक पहुँच गई, जो पूर्व वर्षों की तुलना में काफी अधिक है। इससे ये तो साफ है कि योगी सरकार की कृषि नीतियाँ किसानों के हित में सकारात्मक परिणाम दे रही हैं।
कृषि आधुनिकीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा UP
सरकार द्वारा PoS मशीनों से उर्वरक वितरण की व्यवस्था लागू करना एक बड़ा प्रशासनिक सुधार है। इससे कई लाभ हुए। वास्तविक किसानों की पहचान आसान हुई। इससे फर्जी खरीद पर भी रोक लगी। साथ ही खाद की उपलब्धता का असल डेटा मिला और वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी बनी।
उत्तर प्रदेश सरकार केवल खाद वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि आधुनिकीकरण पर भी विशेष बल दे रही है। आर्थिक सर्वेक्षण में उल्लेख है कि राज्य में सोलर पंपों का विस्तार हुआ है। इसके साथ ही माइक्रो इरिगेशन, सीड पार्क की स्थापना, हाईटेक नर्सरी, कृषि प्रसंस्करण इकाइयों के विकास के साथ कोल्ड स्टोरेज की क्षमता भी बढ़ाई जा रही है। इन पहलों से कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने में सहायता मिल रही है।
योगी सरकार की सक्रियता के कारण किसानों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि सरकार उनकी समस्याओं के समाधान के लिए तत्पर है। खाद संकट की आशंकाओं के बीच भी राज्य सरकार ने नियमित प्रेस विज्ञप्तियों और प्रशासनिक निर्देशों के माध्यम से किसानों को भरोसा दिलाया कि प्रदेश में पर्याप्त खाद और उर्वरक उपलब्ध हैं।
चुनौतियाँ अभी और भी हैं
हालाँकि उत्तर प्रदेश सरकार ने उर्वरक प्रबंधन में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है, फिर भी कुछ चुनौतियाँ बनी हुई हैं। बढ़ती जनसंख्या के कारण खाद की माँग लगातार बढ़ रही है। इसके अलावा किसानी के कुछ क्षेत्रों में अचानक खाद की माँग बढ़ने लगी है।
इनके अलावा कुछ निजी विक्रेताओं द्वारा भी अनियमितताएँ भी बरती जा रही हैं जिस पर सरकार काम कर रही है। इन सभी के साथ-साथ किसानों में वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूकता कम है। इसे बढ़ाए जाने की जरूरत है।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए डिजिटल निगरानी प्रणाली को और मजबूत करने की जरूरत होगी। ब्लॉक स्तर पर उर्वरक नियंत्रण कक्ष बनाने, किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड से जोड़ने, जैविक एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और कृषि विस्तार सेवाओं को आगे बढ़ाने जैसे कदम किसानों के लिए प्रभावी हो सकते हैं।
योगी आदित्यनाथ सरकार ने यह सिद्ध किया है कि यदि प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो तो किसानों को समय पर संसाधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं। कृषि क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की बढ़ती विकास दर, उत्पादन में वृद्धि और किसानों के बढ़ते विश्वास से यह स्पष्ट है कि राज्य सरकार की नीतियाँ सकारात्मक परिणाम दे रही हैं।
आने वाले समय में यदि सरकार इसी प्रकार कृषि अवसंरचना, तकनीकी नवाचार और किसान हितैषी योजनाओं पर कार्य करती रही, तो उत्तर प्रदेश न केवल देश का सबसे बड़ा कृषि राज्य रहेगा, बल्कि आधुनिक एवं टिकाऊ कृषि मॉडल के रूप में भी स्थापित होगा।


